विवेकवाद sentence in Hindi
pronunciation: [ vivekevaad ]
Examples
- आधुनिक अर्थों में उन सभी विचारों को विवेकवाद (rationalism) की श्रेणी में गिना जाता है जो ज्ञान के स्रोत या न्यायसंगति के लिये तर्क (रीजन) का सहारा लेते हैं।
- जिन दक्षिणपंथी ताकतों ने यह घृणित कारनामा अंजाम दिया है, वे यह न भूलें कि भारत में विवेकवाद और तर्क-प्रमाणवाद की भी एक परम्परा है जो हजारों साल पुरानी है।
- स्तालिन के नेतृत्व में इस महा-परिवर्तन के कारण रूस स्वयं अपने देश में ही विवेकवाद और प्रबु (वाद के प्रतिनिधि चिंतकों बेलिन्सकी, चेर्नीशेवस्की आदि की परंपराओं से कट गया।
- कबीर की सहज दृष्टि, उनके सहज तर्क और प्रत्यक्ष अनुभव को महत्व देने की घोषणा अर्थात उनके अनुभव सम्मत विवेकवाद ने ‘ निषेध के निषेध ' को उनकी काव्य युक्ति में बदल लिया है.
- अतः हर प्रकार के अपराध के प्रति उनको अपने विवेक से काम करना चाहिए क्योंकि इस देश में ईमानदार, बहादुर तथा विवेकवाद प्रशासनिक अधिकारियों की ही आवश्यकता है और मीडिया तो केवल हल्के प्रसारणों के लिये है।
- अतः हर प्रकार के अपराध के प्रति उनको अपने विवेक से काम करना चाहिए क्योंकि इस देश में ईमानदार, बहादुर तथा विवेकवाद प्रशासनिक अधिकारियों की ही आवश्यकता है और मीडिया तो केवल हल्के प्रसारणों के लिये है।
- वस्तुतः आज जहां सारी लड़ाई मानवाधिकार, सामाजिक न्याय और विवेकवाद की पुनर्स्थापना के लिए हो, वहां ये पुरानी धार्मिक आस्थाएं या खूबसूरत, गरिमामय मगर अप्रासंगिक हो चुकी व्यवस्था की पुनर्स्थापनाएं अतार्किक और फूहड़ लगती हैं।
- इसके चलते रूस अपने इतिहास की विवेकवाद और प्रबुद्धवाद की परंपरा से कट गया और रूस की आयरन कर्टेन से घेराबंदी कर स्तालिन का रूस पीटर द ग्रेट के रूस की मानसिक खिड़कियां और दरवाजे खोलने की परंपरा से भी कट गया।
- और कंजूस बनियों के छवि निर्माता ‘ औपनिवेशिक आधुनिकता ' से उसका यह महान योगदान छीन लेते हैं कबीर! कवि कबीर की खोज क्या ऐसे ही आधारहीन साक्ष्यों पर होगी! वास्तव में पुरुषोत्तम जी को बनियों के एथिक्स के सहारे कबीर की कविता के मूल में निहित उस क्रांतिकारी संवेदना से ध्यान हटाना था जिसे हम ‘ अनुभवसम्मत विवेकवाद ' कहते हैं.
- धार्मिक परम्परा में किसी मुद्दे पर अंतिम राय जांच पड़ताल, विचार विमर्श, वैचारिक संवाद द्वारा नहीं बनती है बल्कि अंतिम निर्णय का अधिकार धार्मिक संस्थान के सर्वोच्च, शीर्षस्थ अध्यक्ष का होता है, जो सभी को स्वीकार्य है।” डॉ. जोशी अपने इस निष्कर्ष के पक्ष में तर्क यह देते हैं कि ÷÷स्तालिन ने जब मार्क्सवाद और कम्युनिज्म और पार्टी की सदस्यता को स्वीकार किया तो वे मार्क्सवाद के मूल पे्ररणास्रोत, विवेकवाद और प्रबुद्धवाद के कठिन रास्ते से लेनिन की तरह मार्क्सवाद तक नहीं पहुंचे थे।