एम॰ए॰ sentence in Hindi
pronunciation: [ em॰e॰ ]
Examples
- कोल्लम के एस् एन कॉलेज से इतिहास पर् बी॰ए॰ और तिरुवनन्तपुरम यूणिवेरसिट्टि कांलेज् से मलयालम पर एम॰ए॰ की उपाधियाँ प्राप्त कर उन्होंने यूणिवेरसिट्टि कांलेज् में अध्यापन कार्य किया।
- मूल नाम-जयप्रकाश रथ जन्मतिथि-२ अक्टूबर, १९६५ शिक्षा-एम॰ए॰ (भाषा विज्ञान), एम॰एस॰सी॰ (आई॰टी॰) प्रकाशित कृतियाँ कविता संग्रह १॰ तभी होती है सुबह २॰ होना ही चाहिए आँगन ललित निबंध
- यह छुट्टियाँ तो जैसे तैसे काट लूँगी पर फ़ाइनल परीक्षा के बाद कहा जाउँगी? तुम बड़ी लकी हो दीदी! एम॰ए॰ के झट बाद जीजा जी को फाँस लिया।
- मूल नाम-जयप्रकाश रथ जन्मतिथि-२ अक्टूबर, १९६५ शिक्षा-एम॰ए॰ (भाषा विज्ञान), एम॰एस॰सी॰ (आई॰टी॰) प्रकाशित कृतियाँ कविता संग्रह १॰ तभी होती है सुबह २॰ होना ही चाहिए आँगन ललित निबंध दोपहर में गाँव (पुरस्कृत) बाल
- मगही भाषा के लिखवइया में भी हम डॉ॰ सम्पत्ति अर्याणी, एम॰ए॰ (हिन्दी आउ पालि), डी॰लिट्॰, पूर्व रीडर, स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग, पटना विश्वविद्यालय के सबसे ऊपर स्थान मानऽ ही ।
- हिन्द-युग्म की सलाहकार जयप्रकाश मानस मूल नाम-जयप्रकाश रथ जन्मतिथि-२ अक्टूबर, १९६५ शिक्षा-एम॰ए॰ (भाषा विज्ञान), एम॰एस॰सी॰ (आई॰टी॰) प्रकाशित कृतियाँ कविता संग्रह १॰ तभी होती है सुबह २॰ होना ही चाहिए आँगन ललित निबंध दोपहर में गाँव (पुरस्कृत) बाल साहित्यः बाल गीत पुरस्कार एवम् सम्मान १॰
- उमीद थी कि कोई नौकरी मिल जाएगी सो वह भी नहीं मिली और यह जो आपने आँगन बाड़ी केन्द्र खुलवाया है, इसमें कौन जाएगा पढ़ने और कौन सी नाचने वाली जाएगी पढ़ाने? एक लड़की जो एम॰ए॰ हिन्दी में पढ़ रही थी मैं उसके घर गया।
- “ कइले ” का “ किया हुआ ” अर्थ में भी प्रयोग होता है, जैसे-ऊ कीऽ कइले हइ / हकइ?-उसने क्या किया हुआ है? (ऐसा सवाल योग्यता के बारे में हो सकता है, जैसे कि वह मैट्रिक किया हुआ है, या बी॰ए॰, एम॰ए॰, बी॰टेक्॰,...?)
- जीवन में अध्ययन को प्रमुखता देने वाले कालीचरण ने घोर आर्थिक विपन्नता के बावजूद एम॰ए॰ (हिंदी) की पढ़ाई पूरी की और उसके उपरान्त तत्कालीन मेरठ विश्वविद्यालय(वर्तमान चौधरी चरण सिंह विश्वविद्याल, मेरठ) से ‘हिंदी लघुकथा ' पर केन्द्रित किसी विषय पर शोध हेतु पंजीकरण भी कराया था, लेकिन निर्धनता के कारण अपने शोध-कार्य को वे न तो कभी शुरू कर पाये और न पूरा ही कर पाये।
- जीवन में अध्ययन को प्रमुखता देने वाले कालीचरण ने घोर आर्थिक विपन्नता के बावजूद एम॰ए॰ (हिंदी) की पढ़ाई पूरी की और उसके उपरान्त तत्कालीन मेरठ विश्वविद्यालय (वर्तमान चौधरी चरण सिंह विश्वविद्याल, मेरठ) से ‘ हिंदी लघुकथा ' पर केन्द्रित किसी विषय पर शोध हेतु पंजीकरण भी कराया था, लेकिन निर्धनता के कारण अपने शोध-कार्य को वे न तो कभी शुरू कर पाये और न पूरा ही कर पाये।