विश्वासहीनता sentence in Hindi
pronunciation: [ vishevaashinetaa ]
"विश्वासहीनता" meaning in English "विश्वासहीनता" meaning in Hindi
Examples
- कांग्रेस जिस विश्वासहीनता के भंवर में फंसी दिखती है उसमें मुखर्जी के लिए इससे मुफीद वक्त कोई नहीं हो सकता।
- कांग्रेस जिस विश्वासहीनता के भंवर में फंसी दिखती है उसमें मुखर्जी के लिए इससे मुफीद वक्त कोई नहीं हो सकता।
- वह जनतांत्रिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं के प्रति लोगों में हताशा और विश्वासहीनता पैदा करने और उसे दोगुना-चैगुना करने में दिलचस्पी रखता है।
- फिर भी अगर ऐसी बातें पार्टी के आम कार्यकर्ता तक करते रहे हों तो इससे साफ है कि अपनी ही पार्टी के नेताओं को लेकर उनमें कितनी विश्वासहीनता है।
- सुरजीत को लेकर अब तक यही कहा जाता रहा है कि 1982 में उन्होंने गलती से सीमा पार कर ली और भारत-पाकिस्तान के बीच जारी कूटनीतिक और सैनिक विश्वासहीनता और खींचतान के शिकार बन गए।
- “ इन संदेशों में कहीं थकान, हताशा, असफलताओं से उपजी विश्वासहीनता और नये शहरी संपन्न मध्यवर्ग में हर रोज़ गहराती जाती सत्ता और पूंजी के हासिल से मिलने वाली महत्वाकांक्षा के सामने अपनी टूट और विखंडन का दर्द भी दिखता है।
- जैसे कि परम ज्ञानी श्री बेनामी जी को छिपानी पड़ी है, और जब वे स्वयं अपने प्रति विश्वासहीनता के कारण कोई तार्किक बात कहने का साहस नहीं कर पा रहे तो हमारी प्रतिक्रिया क्यों? कृपया तभी किसी आलोचनात्मक टिप्पडी को विहो.
- आप बाहर खड़े होकर उन पर हंसते रहिये! पर इससे उनको क्या लेना देना? आप कहते रहिये कि ‘ वह लोग अंधविश्वासी है ' पर ऐसे मे अगर एक पल आप अपने अंदर झांक कर देखिये तो पायेंगे कि वहां तो विश्वासहीनता की स्थिति है जो कि और अधिक भयावह है।
- आदरणीय महेंद्र श्रीवास्तव जी और पक्षी-विपक्षी सभी अन्य कमेंटकारी ब्लॉगर्स से विनती है कि काफ़ी सारी बोझिल बातों के बाद हमें थोड़ी हल्की फुल्की बातें भी कर लेनी चाहिएं ताकि हम सबका मन भी बहल जाए और वह उपाय भी सामने आ जाए, जिसके ज़रिये विश्वासहीनता के इस दौर में भी बड़े ब्लॉगर आपसी विश्वास को क़ायम रखे हुए हैं।
- कुछ पुराने साथी-दोस्त हैं, जिनका हर साल लगभग एक जैसा संदेश होता है “हम मेहनतकश इस दुनिया से, जब अपना हिस्सा मांगेगे, इक गांव नहीं, इक खेत नहीं, हम सारी दुनिया मांगेंगे!” या “जिस खेत से दहकां को मयस्सर नहीं रोटी, उस खेत के हर गोश-ए-गंदुम को जला दो!” इन संदेशों में कहीं थकान, हताशा, असफलताओं से उपजी विश्वासहीनता और नये शहरी संपन्न मध्यवर्ग में हर रोज़ गहराती जाती सत्ता और पूंजी के हासिल से मिलने वाली महत्वाकांक्षा के सामने अपनी टूट और विखंडन का दर्द भी दिखता है।
More: Next