×

come at in a sentence

come at meaning in Hindi

Examples

  1. At four o'clock , I shall already be worrying and jumping about . I shall show you how happy I am ! But if you come at just any time , I shall never know at what hour my heart is to be ready to greet you …
    ठीक चार बजने पर , मैं इधर - उधर मँडराने लगती और घबराहट में पड़ जाती , खुशी का मूल्य खोज निकालती , लेकिन यदि तुम समय निश्चित किए बिना यहाँ आते हो , तो कभी भी मुझे यह पता नहीं लग सकेगा कि मैं तुम्हारे आगमन के लिए अपने हृदय को किस समय सजाऊँ …
  2. The Brahman , as long as he lives , eats only twice a day , at noon and at nightfall ; and when he wants to take his rrieal , he begins by putting aside as much as is sufficient for one or two men as alms , especially for strange Brahmans who happen to come at evening-time asking for something .
    ब्राह्मण जीवनपर्यंत Zदिन में केवल दो बार भोजन करता है-दोपहर को और रात को.और जब भी उसे भोजन करना हो खाना शुरू करने से पहले वह उतना भोजन अलग रख देता है जो एक या दो व्यक्तियों के Zलिए विशेष रूप से उन अपरिचित ब्राह्मणों के Zलिए पर्याप्त हो जो हो सकता है शाम के समय कुछ मांगते हुए आ Zनिकलें .
  3. Less famously, the initiative's death knell came at the same moment, as a pre-recorded speech by Arafat to the Palestinians rolled on Jordanian television: Arafat avoided any mention of peace with Israel or the renunciation of terrorism, the central premises of that day's agreement. Instead, he explained how his having signed the Oslo accord fit into the context of destroying Israel.
    इस पहल की मृत्यु उसी क्षण हो गई थी जब बहुत कम प्रसिद्घ जार्डन के टेलीविजन पर अराफात का पहले से रिकार्ड भाषण फिलीस्तीनियों के लिए सुनाया गया जिसमें अराफात ने उस दिन के समझौते के केन्द्र बिन्दु आतंकवाद त्यागने और इजरायल के साथ शान्ति का कोई उल्लेख नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने व्याख्या की कि किस प्रकार इजरायल को नष्ट करने का सन्दर्भ उनके समझौते के हस्ताक्षर के उपयुक्त है।
  4. In that spirit, here are two responses concerning Schweitzer's take on the Samir al-Kuntar incident. Schweitzer argues that “to fail to do the utmost to rescue any citizen or soldier who falls into enemy hands would shatter one of the basic precepts of Israeli society.” I agree that rescuing soldiers or their remains is an operationally useful and morally noble priority, but “utmost” has it has limits. For example, a government should not hand live citizens to terrorists in return for soldiers' corpses. In like manner, the Olmert government's actions last week went much too far. Another specific: Schweitzer claims that, “relatively speaking, the recent exchange with Hizbullah came at a cheap price. It is debatable whether Kuntar's release granted any kind of moral victory to Hizbullah.” If that deal was cheap, I dread to imagine how an expensive one would look. And with Kuntar's arrival in Lebanon shutting down the government in giddy national celebration, denying Hizbullah a victory amounts to willful blindness.
    इस भावना के अनुकूल समीर अल कुंतर घटनाक्रम को लेकर स्कवीजर के सम्बंध में दो प्रतिक्रियाये हैं । स्क्वीजर का तर्क है कि, “ शत्रु के हाथ लगे किसी नागरिक या सैनिक को बचा पाने की अक्षमता से इजरायल के समाज का मूल आधार ही ध्वस्त हो जायेगा”। मैं इस बात से सहमत हूँ कि सैनिक को बचाना उपयोगी है और नैतिक रूप से प्राथमिकता है परंतु इसकी भी अपनी सीमायें हैं। उदाहरण के लिये सरकार को अपने सैनिकों को बचाने के बदले आतंकवादियों के हाथों जीवित नागरिकों को नहीं सौंप देना चाहिये। ओल्मर्ट सरकार ने पिछले सप्ताह जो किया वह कहीं अधिक है।
  5. All signs point to a wider regional conflict, and if you've been following these events from the United States, it indeed appears as though Turkey is just one incident away from sending in troops. All his fiery rhetoric and heroic vows to stand up to Assad would also imply that the Turkish people are behind him. They are not. A few weeks ago, protesters marched through Istanbul, bearing innocuous slogans such as, “No to War,” as well as revealing ones like, “USA Take Your Hands Out of the Middle East,” which reflects a suspicion (typically from the left) that Erdoğan's belligerence has come at the behest of President Obama. Newspaper columnists have denounced him as a warmonger. And according to the latest poll by Turkish polling agency Metropol, 76 percent of Turks are against intervention in Syria. …
    दमिश्क के पास अब भी मास्को के रूप में एक शक्तिशाली संरक्षक उपलब्ध है, जहाँ कि व्लादिमीर पुतिन की सरकार ने अब भी शस्त्र और संयुक्त राष्ट्र संघ के वीटो के रूप में अपनी सहायता प्रदान कर रखी है। इसके साथ ही असद को ईरान की क्रूर और मानवीय सहायता से भी लाभ प्राप्त हो रहा है जो कि मुल्ला शासन के गम्भीर आर्थिक संकट के बाद भी जारी है। इसके विपरीत अंकारा अब भी औपचारिक रूप से नाटो का सदस्य है और इसके प्रसिद्ध धारा 5 का सैद्दांतिक रूप से विशेषाधिकार प्राप्त कर रहा है जिसके अनुसार यदि एक सदस्य देश पर कोई सैन्य आक्रमण होता है तो “ इसके लिये आवश्यक रूप से कार्रवाई हो सकती है जिसमें कि सशस्त्र सेना का उपयोग भी शामिल है” , परंतु नाटो के शक्तिशाली सदस्यों ने सीरिया में हस्तक्षेप का कोई आशय नहीं दिखाया है।
More:   Prev  Next


PC Version
हिंदी संस्करण


Copyright © 2021 WordTech Co.