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यथार्थ sentence in Hindi

pronunciation: [ yathartha ]
यथार्थ meaning in English

Examples

  1. As a matter of fact , civilisation is that stage in the cultural development of a people when they begin to live in large habitations called cities , which represent a higher level of material life or a higher standard of living .
    यथार्थ में सभ्यता , मनुष्यों के सास्कृतिक विकास की वह स्थित है , जिसमें नगर कहे जाने वाले जनसंख़्या के क्षेंत्रों में , वे रहना प्रारंभ कर देते हैं , तथा उच्च श्रेणी के भौतिक जीवन या उच्च जीवन स्तर के प्रतीक बन जाते हैं .
  2. The culture which emerged in this way should not really be called English or Western but an Indian variety of the Colonial culture which was springing up in the colonies and dependencies of the Western powers in Asia and Africa .
    संस्कृति हजो इस तरह से अस्तित्व में आयी उसे यथार्थ में अंग्रेजी या पश्चिमी संस्कृति नहीं कहा जाना चाहिए , बल्कि भारतीय रूप में औपनिवेशक संस्कृति कहा जा सकता है , जो पश्चिमी ताकतों के एशिया तथा अफ्रीका के उपनिवेशों एवं अधिक्Qत क्षेत्रों में बढ़ रही थी .
  3. But even richer was the intimacy he thus gained with the actual life of the common people , their daily drudgery and constant struggle against the indifference of nature and the worse indifference of a rigid social orthodoxy and of an alien political rule .
    लेकिन इससे भी उपयोगी चीज थी वह अंतरंगता , जो उन्होंने उस सामान्य जन के यथार्थ जीवन से मिलकर प्राप्त की- जो प्रकृति की उदासीनता के चलते निरंतर संघर्ष और दिनचर्या की एकरसता या ऊब तथा कठोर सामाजिक रूढ़ियों से ग्रस्त एवं विदेशी राजनैतिक शासन के घोर शिकार थे .
  4. As a matter of fact they wanted to establish in India the same type of Islamic state as existed in other Muslim countries , i.e . a dynastic monarchy limited by the Shariah and giving its non-Muslim subjects religious and cultural freedom but slightly fewer political rights .
    यथार्थ में , उन्होनें भारत में उसी तरह का इस्लामी राज़्य स्थापित Zकरना चाहा जैसाकि दूसरे मुसलमान देशों में था अर्थात शरिया की सीमाओं में वंश परंपरा का राजतंत्र उसके गैर मुसलमान विषयों को धार्मिक और सास्कृतिक स्वतंत्रता तथा कुछ राजनैतिक अधिकार देते हूए .
  5. Strangely enough , during this period when his interest in the life of the common people of his country was most vivid and realistic , his poetry shows the sprouting of a mystic sensibility which was later to grow and suffuse much of his writing .
    दूसरी ओर आश्चर्य इस बात पर भी होता है कि इस अवधि के दौरान जब वे बड़ी दिलचस्पी से इस देश के आम लोगों के आम लोगों के सुख-दुख का बड़ा ही सूक्ष्म और यथार्थ चित्रण कर रहे थे , उनके काव्य में रहस्यात्मक संवेदना के अंकुर फूट रहे थे जो परवर्ती काल में क्रमश : बढ़ते चले गए और उनकी लेखनी में परिव्याप्त हो गए .
  6. Others think that only the First Cause has real existence , because it alone is self-sufficing , whilst everything else absolutely requires it ; that a thing which for its existence stands in need of something else has only a dream-life , no real life , and that reality is only that one , and fusl being -LRB- the First Cause -RRB- .
    कुछ अन्य लोगों का विचार है कि वास्तविक अस्तित्व केवल आदि कार का हए क्योंकि केवल वही स्वावलंबी है अर्थात किसी का मुखापेक्षी नहीं है जबकि अन्य प्रत्येक वस्तु उसकी मुखापेक्षी हैं.कोई भी वस्तु जो अपने अस्तिव के लिए किसी अन्य वस्तु की अपेक्षा करती है उसका जीवन स्वग्निल होता है यथार्थ नहीं और वह यथार्त केवल वही एक है और आदि जीव ( आदि कारण ) हैं .
  7. Since the precise cortical organisation of human cerebral cortex that enables him first to learn to speak and thus armed to familiarise himself with World2 of objective knowledge depends greatly on appropriate neonatal environment , the old debate about the relative contributions of heredity -LRB- genes -RRB- and environment -LRB- nurture -RRB- in making the mind of man is by no means closed .
    मनुष्य की प्रमस्तिष्कीय झिल्ली की यथार्थ प्रांतीस्या व्यवस्था उसे बोलने की क्षमता प्रदान करती है तथा इस प्रकार तैयार हो जाने के पश्चात उसे वस्तुनिष्ठ ज्ञान की दुनिया से परिचित होने का अवसर देती है.यह व्यवस्था समीचीन नवजात परिवेश पर निर्भर करती है.मनुष्य का मन निर्माण करने में आनुवंशिकी ( जीन ) तथा परिवेश ( प्रकृति ) का आनुपातिक योगदान कितना होता है यह प्रश्न आज भी अनुत्तरित है .
  8. The revival of drama and the beginning of the novel in Indian languages restored to the Indian mind in a wider and richer form what it had possessed in the classical , but lost in the medieval agethe concept of life as a complex of subjective and objective reality and the art of portraying man in the setting of his physical and social environment in realistic proportion and natural colours .
    भारतीय भाषाओं में नाटकों के पुनरूत्थान तथा उपन्यासों के प्रारंभ से , वस्तुनिष्ठ एवं व्यक़्तिनिष्ठ वास्तविकता की विविधताओं के रूप में जीवन की अवधारण तथा मनुष्य को उसके भौतिक और सामाजिक वातावरण की व्यवस्था में यथार्थ रूप में स्वाभाविक रंगों में चित्रित करने की कला , जो पुरातन युग में थी किंतु मध्यकालीन युग में खो गयी थी , भारतीय मस्तिष्क में अधिक व्यापक और उन्नत अवस्था में पुन : वापिस आयी .
  9. The Law Commission in its Fourteenth Report has stated that though ancient writers have outlined a hierarchy of courts which existed in the remote past , their exact structure cannot be established with any certainty ; but later works of writers like Narada , Brahaspati and others seem to suggest that regular courts must have existed on a fairly large scale , if the evolution of a complex system of procedural rules and of evidence can be any guide .
    विधि आयोग ने अपनी चोदहवीं रिपोर्ट में बताया है कि यद्यपि प्राचीन लेखकों ने बहुत प्राचीन काल में विद्यमान न्यायालयों के सोपानक्रम का वर्णन किया है किंतु उसकी यथार्थ संरचना के बारे में निश्चित रूप से बताना संभव नहीं है.नारद , बृहस्पति आदि लेखकों द्वारा रचित परवर्ती ग्रंथों से ऐसा आभास मिलता है कि उस काल में नियमित न्यायालय बड़ी संख्या में विद्यमान रहे होंगे.प्रक्रिया के नियमों और साक्ष्य की जटिल प्रणाली के विकास से यह संकेत
  10. In other words , the riddle of biophys- ics is to discover how the fortuitous concourse of myriads of blind and chaotic molecules while obeying the laws of physics and chemistry become ' at the same time integrated into organic wholes , capable of entropy-decreasing ani- mated activity . The problem , therefore , is to trace the very real differences in the behaviour of animate and inanimate matter to their objective foundations in some kind of spatio- temporal relationships . E . Schrodinger was the first to divine the nature of this difference when he formulated his ' order from order ' principle , which is “ the real clue to the understanding of life ” .
    दूसरे शब्दों में ऐसा कहा जा सकता है ' कि जैव-भैतिकी की समस्या इस बात का पता लगाने की है कि आकस्मिक रूप से एकत्रित हुए ये दृष्टिहीन तथा अव्यवस्थित अणुओं के समूह किस प्रकार भौतिकी तथा रसायनशास्त्र के नियमों का पालन करते हुए संपूर्ण जीवों में सुग्रथित होकर एंट्रोपी घटाने की सजीव गतिविधियों में संलग़्न हो जाते हैं1 चर या अचर पदार्थों के आचारण में दिखाई देने वाली भिन्नता किस प्रकार उत्पन्न हुई है तथा समय के संदर्भ में इसका कौन यथार्थ आधार है , इसे भी हमें देखना होगा .
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