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स्वतंत्रता देना sentence in Hindi

pronunciation: [ svatamtrata dena ]
स्वतंत्रता देना meaning in English

Examples

  1. अपने बच्चो के भोजन, कपडे़ अथवा घूमने-फिरने के शौक पर भले ही वे किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाते हों, कैरियर के चुनाव में किसी भी तरह की स्वतंत्रता देना उन्हें नागवार गुजरने लगता है या वे फिर इसे उचित भी नहीं समझते।
  2. निज से ही विशेष सम्बंध रखने वाले काम-काज के सम्बंध में हर आदमी को स्वतंत्रता देना जैसे गवर्नमेंट का कर्तव्य है, वैसे ही उसका यह भी कर्तव्य है कि जिसको उसने दूसरों पर हुकूमत करने का अधिकार दिया है उसपर वह अच्छी तरह निगाह रक्खे।
  3. ये शर्तें थी: पंचायतो को अपने निर्णय स्वयं करने का अधिकार, पंचायत को सेना रखने का अधिकार, पंचायतो को पूर्ण स्वतंत्रता देना, हिन्दुओं को पूर्ण धार्मिक स्वतंत्रता देना, जजिया कर की समाप्ति, और दरबार में पंचायत को प्रतिनिधित्व देना.
  4. ये शर्तें थी: पंचायतो को अपने निर्णय स्वयं करने का अधिकार, पंचायत को सेना रखने का अधिकार, पंचायतो को पूर्ण स्वतंत्रता देना, हिन्दुओं को पूर्ण धार्मिक स्वतंत्रता देना, जजिया कर की समाप्ति, और दरबार में पंचायत को प्रतिनिधित्व देना.
  5. -रश्मि प्रभा तुम स्वतंत्र होना चाहते तो हो पर स्वतंत्रता देना नहीं चाहते!-रश्मि प्रभा कोई तुम्हारे काँधे पर हाथ रखता है तो तुम्हारा हौसला बढ़ता है पर जब किसी का हाथ काँधे पर नहीं होता तुम अपनी शक्ति खुद बन जाते हो और वही शक्ति ईश्वर है!
  6. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन में हुए चुनावों के बाद जब वहां नई सरकार आयी और उसने भारत को स्वतंत्रता देना स्वीकार कर लिया और देश में पं. नेहरू के नेतृत्व में एक कार्यवाहक सरकार बन गयी, महत्मा गांधी इस देश् की राजनीतिक मुख्य धारा से जानबूझकर दूर कर दिये गये।
  7. (जवाहर लाल नेहरु, पाकिस्तान के प्रधान मंत्री को पत्र, २ १-११-१ ९ ४ ७). ४. हमारा उद्देश्य कश्मीर के लोगों को शांतिपूर्ण ढंग से अपने भविष्य का निर्णय करने कि स्वतंत्रता देना है जिससे कोई विपरीत स्थिति उत्पन्न न हो, जैसा हमने अपने संयुक्त वक्तव्य में कहा था.
  8. शास्त्री जी ' पैरों तले की धरती के खिसकने ' की स्थिति एक दिन में नहीं आती,पहले संस्कारों की धरती पोली होती है तब खिसकने की स्थिति आती है | अभिभावकों और संतानों के बीच जेनेरेशन गैप एवं संवादों का आभाव ही इसका वास्तविक कारण होता है | पालितों को केवल सुख-सुविधाएं उपलब्ध करा कर उनके प्रति कर्तव्यों की इतिश्री मान लेना, उम्र से अधिक अधिकार एवं सीमा से अधिक स्वतंत्रता देना आदि ही उन्हें उच्श्रंखल बनाता है | अतः इसके लिय वे नहीं शायद हम ही असली दोषी हैं
  9. शास्त्री जी ‘पैरों तले की धरती के खिसकने ‘ की स्थिति एक दिन में नहीं आती, पहले संस्कारों की धरती पोली होती है तब खिसकने की स्थिति आती है | अभिभावकों और संतानों के बीच जेनेरेशन गैप एवं संवादों का आभाव ही इसका वास्तविक कारण होता है | पालितों को केवल सुख-सुविधाएं उपलब्ध करा कर उनके प्रति कर्तव्यों की इतिश्री मान लेना, उम्र से अधिक अधिकार एवं सीमा से अधिक स्वतंत्रता देना आदि ही उन्हें उच्श्रंखल बनाता है | अतः इसके लिय वे नहीं शायद हम ही असली दोषी हैं
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