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व्यवस्थित होना sentence in Hindi

pronunciation: [ vyavasthit hona ]
व्यवस्थित होना meaning in English

Examples

  1. प्रश्न का निर्माण सरल, सटीक और व्यवस्थित होना चाहिए क्योंकि प्रश्नावली निर्माण के समय हमेशा इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि उत्तरदाता को बिना शोधकर्ता की सहायता से ही प्रश्नो को उत्तर देना रहता है।
  2. उसने यह भी कहा कि क्यूबा की सेना का कार्रवाई के लिए व्यवस्थित होना जारी है, हालांकि उन्हें यह आदेश दिया गया है कि जब तक हमला न हो कोई कार्रवाई न की जा ए. [कृपया उद्धरण जोड़ें]
  3. इसके अलावा भी कई वजहें हो सकती है मसलन-समाज द्वारा शारीरिक संबंधों को मंजूरी मिलना, जीवन क व्यवस्थित होना, पारिवारिक खुशी मिलना, और आखिर किसी के लिये खुशी खुशी हर रोज आफ़िस में काम करने की वजह मिल जाना.
  4. यक़ीनन व्यवस्थित होना समय की बचत करता है, मैं अपने घर में रखी अपनी कोई भी वस्तु अँधेरे में भी खोज सकता हूँ,छात्र जीवन में होस्टल में रहने के दौरान ही हर वस्तु को नियत जगह रखने की आदत पड़ गयी जो अभी तक बरक़रार है|
  5. ज्यादा व्यवस्थित होना भी आराम में खलल डाल सकता है | काफी घरो में बच्चो को पलंग पर केवल इसलिए नहीं खेलने दिया जाता है कि चद्दर में सलवट पड जायेगी | घर को घर रहने दिया जाए उसे ना तो कबाड़ी की दूकान बनाए और ना ही पांच सितारा होटल |
  6. लेकिन इन चमत्कारों में प्रकृति में जो दिखाई देती है, उसके साथ कुछ असाधारण चमत्कार भी शामिल होते हैं: कौशलपूर्ण मानव ऊर्जा का संयोग: लाखों छोटी-छोटी विशेषज्ञताओं का स्वभाविक एवं सहज रूप से व्यक्ति की जरूरतों और इच्छाओं के अनरूप व्यवस्थित होना और तब जब कोई भी व्यक्ति इसका नियंता नहीं।
  7. मनुष्य का सौन्दर्य बोध (सौन्दर्य को इस तरह से भी देखा जा सकता है, कि यह चीज़ों का सही तरीक़े से, सलीके से, व्यवस्थित होना ही है, जो उसे प्रिय लगते हैं, किसी तरह की अप्रिय प्रतिक्रिया नहीं जगाते) सब कुछ सही देखना चाहता है, सही करना चाहता है, सही के साथ होना चाहता है।
  8. मनुष्य का सौन्दर्य बोध (सौन्दर्य को इस तरह से भी देखा जा सकता है, कि यह चीज़ों का सही तरीक़े से, सलीके से, व्यवस्थित होना ही है, जो उसे प्रिय लगते हैं, किसी तरह की अप्रिय प्रतिक्रिया नहीं जगाते) सब कुछ सही देखना चाहता है, सही करना चाहता है, सही के साथ होनाचाहता है।
  9. दरअसल स्कूल या टीचर सिर्फ बच्चों को नियमित और व्यवस्थित होना ही सिखा सकते हैं...बच्चा स्कूल में तो पांच या छह घंटे ही गुज़ारता है, बाकी वक्त तो घर पर ही रहता है...इसलिए घर पर ही ज़्यादा तय होता है कि बच्चा किस दिशा में जा रहा है...स्कूल नए ज़माने के हिसाब से अपने को ढालते रहते हैं, ज़रूरत है बस हमारे जागते रहने की... जय हिंद...
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