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इफरात से sentence in Hindi

pronunciation: [ ipharat se ]
इफरात से meaning in English

Examples

  1. जिस इफरात से कारों की संख्या बढ़ रही है और ज्यादा तेल पीने वाली गाड़ियाँ बाजार में उतर रही हैं, उसे देखते हुए पेट्रोल के उपभोग पर अंकुश लगाना आवश्यक हो गया है।
  2. फिल्म शुरू होते ही हम एक पंजाबी शादी का दृश्य देखते हैं, जिसमें परंपरागत रूप से भांगड़ा और गिद्दा चल रहा है और ‘ मर जावां ' और ‘ सोणिये ' जैसे शब्दों का इफरात से इस्तेमाल किया जा रहा है।
  3. पाव भाजी हो या पाव बड़ा या फिर भेलपूरी में प्रयुक्त चटनियाँ, हम अपने खाने पीने में ही न सिर्फ इफरात से नमक का इस्तेमाल करते हैं ऊपर से भी सलाद आदि पे छिड़कते हैं और उसी ने हमें इस मुकाम इस
  4. ये निर्धन भारत-भूमि-भोजन-रोजगार के मुद्दों पर इंसानी बदमाशी को कभी भी समझ न पाए सो तथाकथित ईश्वर और अल्लाह की मर्जी बताने बाले नजूमियों के झुण्ड-मीडिया, मठ, मंदिर और महात्माओं के रूप में इफरात से पाले जाते हैं.
  5. संघ के सभी अनुषंगी एक साथ बैठकर निर्णय करते हैं और फिर बारी-बारी से जनांदोलनो की नूरा कुश्ती करते हैं भगवतीचरण वर्मा की कहानी ” दो बांके ' भोपाल, इंदौर. जबलपुर. ग्वालियर. सागर में इफरात से सड़कों पर अभिनीत हो रही है.
  6. मुझे लगा कि दो-तीन दिन बाद दुकानों में दारू खत्म हो जायेगी तो फिर क्या होगा? कहीं दंगे न भड़क जायें! लेकिन नहीं साहब, बाजार से टमाटर के नाम पर टमाटो-प्यूरी भले ही गायब हो गयी, मगर दारू उचित मूल्य पर इफरात से मिलती रही।
  7. मुझे लगा कि दो-तीन दिन बाद दुकानों में दारू खत्म हो जायेगी तो फिर क्या होगा? कहीं दंगे न भड़क जायें! लेकिन नहीं साहब, बाजार से टमाटर के नाम पर टमाटो-प्यूरी भले ही गायब हो गयी, मगर दारू उचित मूल्य पर इफरात से मिलती रही।
  8. मुझे लगा कि दो-तीन दिन बाद दुकानों में दारू खत्म हो जायेगी तो फिर क्या होगा? कहीं दंगे न भड़क जायें! लेकिन नहीं साहब, बाजार से टमाटर के नाम पर टमाटो-प्यूरी भले ही गायब हो गयी, मगर दारू उचित मूल्य पर इफरात से मिलती रही।
  9. मज़ेकी और दुःख की बात यह, की,यही लोग रात में अपने जानवरों को हमारे खेतों में चरने के लिए छोड़ देते! ये सभी आदतें क़ुदरत की नैमत,जिसे पानी कहते हैं(और जीवन भी) बचाके इस्तेमाल करने की बेहतरीन सीख थी! पानी जब इफरात से होता तब भी यही नियम जारी रहता.
  10. संस्कृति के रंगों से संसिक्त मार्ग दर्शक पोस्ट है अरविन्द भाई मिश्र की, छोटी बना है पंडत.राम लीला की शुरुआत दिवाली के और भी रंग भरेगी.आत्म रति भी एक रति है भाई साहब.अपने पास इफरात से है इसी का व्युत्पाद है विषयरति,अलबत्ता दृश्य रतिक हम नहीं हैं.
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