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दैव योग sentence in Hindi

pronunciation: [ daiv yog ]
दैव योग meaning in English

Examples

  1. जिस दिन वे (अकबर) दक्षिण को विजय करने चढ़े उसी दिन मुझे बड़ी सेना और विश्वासपात्र सरदारों के साथ राणा पर भेजा, परन्तु ये दोनों चढ़ाइयां दैव योग से निष्फल हुई।
  2. स्वाभाविक ही पिताजी मुझे संगीत कला में पारंगत देखना चाहते थे, परन्तु दैव योग से हम जिन स्थानों में रहा करते थे अधिकाँश स्थानों पर संगीत प्रशिक्षण की कोई व्यवस्था ही न थी..
  3. पिछवाड़े पानी भरा होने की दुर्दशा में बरसाती घास, केंचुआ, मेंढक और बरसात के दिनों में जाने किस दैव योग से आई केवई मछलियाँ तक, जो पानी से निकाले जाने पर घँटों छटपटाती अधमरी, कीचड़ लिसड़ी जिन्दा रहतीं ।
  4. पिछवाड़े पानी भरा होने की दुर्दशा में बरसाती घास, केंचुआ, मेंढक और बरसात के दिनों में जाने किस दैव योग से आई केवई मछलियाँ तक, जो पानी से निकाले जाने पर घँटों छटपटाती अधमरी, कीचड़ लिसड़ी जिन्दा रहतीं ।
  5. इस तत्व को ध्यान से सुनो | मनुष्य जब विरक्त होता है तभी वह अधिकारी कहलाता है, ऐसा उपनिषद कहते हैं | अर्थात् दैव योग से गुरु प्राप्त होने की बात अलग है और विचार से गुरु चुनने की बात अलग है |
  6. हे देवी! इस तत्व को ध्यान से सुनो | मनुष्य जब विरक्त होता है तभी वह अधिकारी कहलाता है, ऐसा उपनिषद कहते हैं | अर्थात् दैव योग से गुरु प्राप्त होने की बात अलग है और विचार से गुरु चुनने की बात अलग है | (175)
  7. हे देवी! इस तत्व को ध्यान से सुनो | मनुष्य जब विरक्त होता है तभी वह अधिकारी कहलाता है, ऐसा उपनिषद कहते हैं | अर्थात् दैव योग से गुरु प्राप्त होने की बात अलग है और विचार से गुरु चुनने की बात अलग है | (175)
  8. आज गुरू की कमी नहीं है, तथा शिष्य भी बहुत मिल जाते है लेकिन जो सिद्ध गुरू है वहाँ निम्न स्तरीय लोग पहुँच ही नहीं पाते, अगर दैव योग से पहुँच जाये तो उन्हें समझ नहीं पाते, और दैव कृपा से थोड़ा समझ में आया भी
  9. भूतकाल में यदि हमने अच्छे विचारों, भावों और कर्मों का संग किया हो तो सत्संग हमे कभी न कभी दैव योग से मिल ही जाता है,और यदि वर्तमान में ही अच्छे विचारों, भावों और कर्मों का संग करें तो तत्काल राम कृपा हो जाती है और सत्संग सहज रूप से सदा उपलब्ध रहता है.
  10. एक जगह दो रास्ते मिले मैंने नीरज से पुछा, “ कौन से पर चलना है? ” (यहाँ मैं एक रोचक बात बताना चाहूँगा, वो ये कि इस पूरी यात्रा में हम कई बार रास्ता भटके, लेकिन कोई दैव योग ही था कि थोडा सा आगे जाने पर ही कोई न कोई आकर हमें सही रास्ता बता देता था.
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