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सीमा रहित sentence in Hindi

pronunciation: [ sima rahit ]
सीमा रहित meaning in English

Examples

  1. अहंकार का सार्थक विश्लेष्ण--” अद्वैत मत के अनुसार अहं को ' अहं ब्रह्मस्मि ' कहकर अहं का आकार विस्तृत करके ' अनन्त सीमा रहित ब्रहम ' के रूप में बताया गया है.
  2. माया, गुण और परमात्मा पहले गीता के छः श्लोकों को देखिये-श्लोक-7.14-7.15 तीन गुणों का एक माध्यम है जो सनातन है, सीमा रहित है जिसको माया कहते हैं ।
  3. क्रिश्चियन ट्रांसलेशन हमारे भाईयों तक समस्त विश्व में सीमा रहित सिद्धांतों का प्रचार करने ; आत्माओं तक पहॅुंचने के लिए ईश्वर द्वारा प्रदान किए गए उपहार को अनेक भाषाओं में पहुँचाने के लिए एक अंर्तराष्ट्रीय मिशन है।
  4. शुरुआती चरण में 18 महीनों के भीतर संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम और भारत, चीन व नेपाल की संस्थाएं मिलकर एक सीमा रहित सांस्कृतिक व जैव विविधता क्षेत्र यानी माउंट कैलाश लैंड स्केप को स्पष्ट रूप से चिह्निंत करेंगे।
  5. प्रभु कहीं कोई बस्तु नहीं, कोई सूचना नहीं जो time space में हो और इस से प्रभावित हो, यह तो एक अब्यक्त, निराकार, सीमा रहित द्रष्टा / साक्षी रूप में सब का आदि, मध्य एवं अंत का कारण है ।
  6. वे सीमा रहित रूप से देश प्रत्यावर्तन आधार पर सरकारी दिनांकित प्रतिभूतियों (वाहक प्रतिभूतियों के अलावा) या खजाने के बिलों या घरेलू म्युचुअल फंड, भारत में एक सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में एक सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम बांटते हैं जिसे भारत सरकार द्वारा विनिमयन किया हैं।
  7. ऐसा मानना है ‘ मेडिसिन्स सांस फ़्रंटियर (एमएसएफ) / सीमा रहित डाक्टर ' नामक अंतर्राष्ट्रीय चिकित्सीय मानवतावादी संस्था का, जिसका अनुमोदन जन स्वास्थ्य अभियान, स्टॉप टीबी पार्टनरशिप, तथा दिल्ली नेटवर्क आफ पोसिटिव पीपुल (डीएनपी +) ने भी किया है।
  8. वे देश प्रत् यावर्तन के आधार पर सीमा रहित रूप से खरीद सकते हैं, सरकारी दिनांकित प्रतिभूतियां (वाहक प्रतिभूतियों के अलावा) या खजाने के बिल या घरेलू म् युचुअल फंड यूनिट ; और मौद्रिक बाजार म् युचुअल फंड की यूनिट ले सकते हैं।
  9. गीता का परमात्मा हीरे के मुकुट से खुश नहीं होता, और न हमारी दरिद्रता पर रोता है, गीता का परमात्मा एक माध्यम है जो गुनातीत, भावातीत, सीमा रहित, स्थिर, सर्वत्र, सनातन, अज्ञेय, अविज्ञेय तथा अति सूक्ष्म है ।
  10. अपनी माया के पर्दे में छिपा हुआ है, जो सीमा रहित और अविनाशी है अर्थात् जो देश-काल से सर्वथा अतीत है तथा जिनका कभी किसी प्रकार से विनाश नहीं हो सकता तथा जिन परमात्मा में अविद्या और विद्या-दोनों विद्यमान रहते हैं, वे ही पूर्णब्रम्ह पुरुषोत्तम हैं ।
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