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एड़ी से चोटी तक sentence in Hindi

pronunciation: [ edi se coti tak ]
एड़ी से चोटी तक meaning in English

Examples

  1. सरकार ने महंगाई के दंश को निर्मूल करने के लिए एड़ी से चोटी तक का दम लगा रखा है, लेकिन अर्थशास्त्र का सामान्य विद्यार्थी भी बता सकता है कि इससे खुले बाज़ार में महंगाई और बढ़ेगी.
  2. उन्हें अपनी ब्राह्मण जाति के नाम से इतना मोह था कि एक बार जब परहन के ब्राह्मणों द्वारा उन्हें बिरादरी से निकाल दिया गया, तो उन्होंने अपने को ÷ब्राह्मण' कहलवाने के लिए एड़ी से चोटी तक का जोर लगा दिया।
  3. प्रौढ़ शिक्षा में आज एड़ी से चोटी तक एक महा विडम्बना भरी हुई है और यह महा विडम्बना इसमें से जब तक निकाली नहीं जायगी, न तो प्रौढ़ शिक्षा व्यावहारिक बनेगी और न यह राष्ट्र की जनता के हित में होगी।
  4. प्रौढ़ शिक्षा में आज एड़ी से चोटी तक एक महा विडम्बना भरी हुई है और यह महा विडम्बना इसमें से जब तक निकाली नहीं जायगी, न तो प्रौढ़ शिक्षा व्यावहारिक बनेगी और न यह राष्ट्र की जनता के हित में होगी।
  5. कोशाध्यक्ष ने विनोद को एड़ी से चोटी तक परख कर देखा, उसकी नौकरी का हाल जान लिया, तब वे बोले, ‘‘ तुम्हारा विचार वाकई अच्छा है, लेकिन जैसा तुम समझते हो, कोशाध्यक्ष का पद सुखदायक नहीं है।
  6. उन्हें अपनी ब्राह्मण जाति के नाम से इतना मोह था कि एक बार जब परहन के ब्राह्मणों द्वारा उन्हें बिरादरी से निकाल दिया गया, तो उन्होंने अपने को ÷ ब्राह्मण ' कहलवाने के लिए एड़ी से चोटी तक का जोर लगा दिया।
  7. इसीलिए आज जब किसी आते-जाते के साथ बूढ़ा अपने पोते की खोज-खबर लेने और अपने पुराने मालिकों की देहरी पूजने यहाँ आया तो पोते का कन्धा पकड़ उस विराट बगीचे को निहारने भी चला आया, जहाँ अपना तन-मन लेकर वह एड़ी से चोटी तक खर्च हुआ था।
  8. अनेक दीप बत्तियाँ जलाकर विग्रह के चारों ओर घुमाने का अभिप्राय यही है कि पूरा-का-पूरा विग्रह एड़ी से चोटी तक प्रकाशित हो उठे-चमक उठे, अंग-प्रत्यंग स्पष्ट रूप से उद्भासित हो जाय, जिसमें दर्शक या उपासक भली-भाँति देवता की रूप-छटा को निहार सके, हृदयंग्म कर सके।
  9. जिनके पास भावना है ही नहीं, जो कृपणता के दलदल में एड़ी से चोटी तक फँसे पड़े हैं उन दीन, दयनीय लोगों से क्या याचना की जाए? कर्ण जैसे उदार व्यक्ति ही मरणासन्न स्थिति में अपने दाँत उखाड़ कर देते रहे हैं, हरिश्चन्द्रों ने ही अपने स्त्री, बच्चे बेचे हैं।
  10. ये अपने बेहद अपने पल क्यों इतने बेगाने बीते! एड़ी से चोटी तक कैसा टंगा हुआ है एक अपरिचय दस्तक देता दरवाजों पर शंकाओं, संदेहों का भय भीड़ भरे इस महाद्धीप को हम बतौर क्रूसो हैं जीते! साँसों का विनिमय आलिंगन और वेदना की कुछ बूँदे, नर्म छुवन की गर्माहट को याद करें हम, …
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