आदर सत्कार करना sentence in Hindi
pronunciation: [ adar satkar karana ]
Examples
- चन्द्रमा: यदि कुन्डली मे चन्द्रमा अशुभ प्रभाब दे रहा हो तो परिवार मे चन्द्रमा अर्थात माता या माता तुल्य लोगों का आदर सत्कार करना चहिये उनकी सेवा करनी चहिये उन्हें प्रसन्न रखना चहिये, यदि परिवार मे माता या माता तुल्य लोग आपसे संन्तुष्ट रहेंगे तो चन्द्रमा के अशुभ प्रभाव से आप बचे रहेंगे!
- राहू: यदि कुन्डली मे राहू अशुभ प्रभाब दे रहा हो तो परिवार मे राहू अर्थात दादा या दादा तुल्य लोगों का आदर सत्कार करना चहिये उनकी सेवा करनी चहिये उन्हें प्रसन्न रखना चहिये, यदि परिवार मे दादा या दादा तुल्य लोग आपसे संन्तुष्ट रहेंगे तो राहू के अशुभ प्रभाव से आप बचे रहेंगे!
- सूर्य: यदि कुन्डली मे सूर्य अशुभ प्रभाब दे रहा हो तो परिवार मे सुर्य अर्थात पिता या पिता तुल्य लोगों का आदर सत्कार करना चहिये उनकी सेवा करनी चहिये उन्हें प्रसन्न रखना चहिये, यदि परिवार मे पिता या पिता तुल्य लोग आपसे संन्तुष्ट रहेंगे तो सुर्य के अशुभ प्रभाव से आप बचे रहेंगे!
- केतू: यदि कुन्डली मे केतू अशुभ प्रभाब दे रहा हो तो परिवार मे केतू अर्थात नाना या नाना तुल्य लोगों का आदर सत्कार करना चहिये उनकी सेवा करनी चहिये उन्हें प्रसन्न रखना चहिये, यदि परिवार मे नाना या नाना तुल्य लोग आपसे संन्तुष्ट रहेंगे तो केतू के अशुभ प्रभाव से आप बचे रहेंगे!
- मंगल: यदि कुन्डली मे मंगल अशुभ प्रभाब दे रहा हो तो परिवार मे मंगल अर्थात भाई या भाईयों के तुल्य लोगों का आदर सत्कार करना चहिये उनकी सेवा करनी चहिये उन्हें प्रसन्न रखना चहिये, यदि परिवार मे भाई या भाई तुल्य लोग आपसे संन्तुष्ट रहेंगे तो मंगल के अशुभ प्रभाव से आप बचे रहेंगे!
- तुकाराम ओम्बले का हमे दिल से आदर सत्कार करना चाहिये उस वीर की वजह से आज कितने लोग बच गये, ओर कितने भेद खुले है दुशमन के. आप इस कमीने अखबार वाले का नाम भी जरुर देती, ताकि लोग इस से खुब नफ़रत करे, ऎसे अख्वार वाले इस देश के दुशमन है.
- बुध: यदि कुन्डली मे बुध अशुभ प्रभाब दे रहा हो तो परिवार मे बुध अर्थात बहनें या बहनों के तुल्य लोगों का आदर सत्कार करना चहिये उनकी सेवा करनी चहिये उन्हें प्रसन्न रखना चहिये, यदि परिवार मे बहनें या बहनों के तुल्य लोग आपसे संन्तुष्ट रहेंगे तो बुध के अशुभ प्रभाव से आप बचे रहेंगे!
- गुरू: यदि कुन्डली मे गुरू अशुभ प्रभाब दे रहा हो तो परिवार मे गुरू अर्थात अध्यापक, धर्म आचार्य आदि या उनके तुल्य लोगों का आदर सत्कार करना चहिये उनकी सेवा करनी चहिये उन्हें प्रसन्न रखना चहिये, यदि अध्यापक, धर्म आचार्य आदि या उनके तुल्य लोग आपसे संन्तुष्ट रहेंगे तो गुरू के अशुभ प्रभाव से आप बचे रहेंगे!