होमकुण्ड sentence in Hindi
pronunciation: [ homekuned ]
"होमकुण्ड" meaning in Hindi
Examples
- कहा जाता है कि जो यात्री रेखा से बाहर होकर घी फेंकेगा और जिसका घी शिला पर नहीं चिपकेगा, वह वर्णशंकर होगा इसके बाद यात्री दल होमकुण्ड पहुंचकर होमकुण्ड यग्य स्थल के दर्शन करता है।
- कहा जाता है कि जो यात्री रेखा से बाहर होकर घी फेंकेगा और जिसका घी शिला पर नहीं चिपकेगा, वह वर्णशंकर होगा इसके बाद यात्री दल होमकुण्ड पहुंचकर होमकुण्ड यग्य स्थल के दर्शन करता है।
- नौटी के बाद सेम, कोटी, भगोती, कुलसारी, चेपड़्ियूं, नन्दकेशरी, पफल्दिया गांव, मुन्दोली, वाण, गैरोलीपातल, पातरनचैणियां होते हुए यात्रा शिला समुद्र होते हुए अपने गन्तव्य होमकुण्ड पहुंचती है।
- इसके बाद कासुंवा, सेम, कोटी, भगौती, कुलसारी, चैपडों, लोहाजंग, वाँण, बेदनी, पातर नचौणियाँ से विश्व-विख्यात रूपकुण्ड, शिला-समुद्र, होमकुण्ड से चनण्यॉंघट (चंदिन्याघाट), सुतोल से घाट होते हुए नन्दप्रयाग और फिर नौटी आकर यात्रा का चक्र पूरा होता है।
- इस पर भी 11, 12 और 13 सितम्बर को यात्रा क्रमशः पातरनचैणियाँ (3885 मी 0), शिला समुद्र (4002 मी 0) और होमकुण्ड (अंतिम स्थान जहाँ पर पूजा कर वापस लौटते हैं।
- शुद्ध वस्त्र धारण कर संस्कार विधि इस प्रकार की जाती है-सर्वप्रथम मंगलाचरण, मंगलाष्टक का पाठ, पुन: हस्तशुद्धि, भूमिशुद्धि, द्रव्यशुद्धि, पात्रशुद्धि, मन्त्रस्नान, साकल्यशुद्धि, समिधाशुद्धि, होमकुण्ड शुद्धि, पुण्याहवाचन [...]
- नंदा को मायके से ससुराल के लिए विदाई देने के प्रतीकस्वरूप गढ़वाल में तो नंदा घुंघटी के चरण होमकुण्ड तक एक वृहद यात्रा का आयोजन होता नौटी से होमकुण्ड तक की लगभग 280 किमी0 लम्बी पैदल यात्रा नन्दा राजजात के नाम से जानी जाती है.
- नंदा को मायके से ससुराल के लिए विदाई देने के प्रतीकस्वरूप गढ़वाल में तो नंदा घुंघटी के चरण होमकुण्ड तक एक वृहद यात्रा का आयोजन होता नौटी से होमकुण्ड तक की लगभग 280 किमी0 लम्बी पैदल यात्रा नन्दा राजजात के नाम से जानी जाती है.
- अक्सर रूपकुण्ड जाने वाले ट्रैकर कर्णप्रयाग से पिण्डर नदी के साथ साथ आगे बढते हैं और लोहारजंग से अपनी ट्रैकिंग शुरू करते हैं और अगर उन्हें होमकुण्ड भी जाना हो तो रूपकुण्ड से आगे एक दर्रे को लांघकर होमकुण्ड पहुंचते हैं और वापसी में नंदाकिनी के साथ साथ नंदप्रयाग आ जाते हैं।
- अक्सर रूपकुण्ड जाने वाले ट्रैकर कर्णप्रयाग से पिण्डर नदी के साथ साथ आगे बढते हैं और लोहारजंग से अपनी ट्रैकिंग शुरू करते हैं और अगर उन्हें होमकुण्ड भी जाना हो तो रूपकुण्ड से आगे एक दर्रे को लांघकर होमकुण्ड पहुंचते हैं और वापसी में नंदाकिनी के साथ साथ नंदप्रयाग आ जाते हैं।