सितारों के आगे sentence in Hindi
pronunciation: [ sitaaron kaaga ]
Examples
- वैसे सोते-सोते उनींदी आंखों से हमने देखा कि अनूप भार्गव अपना पुरस्कार वाला फोल्डर देख रहे थे, शायद यह सोचते हुये कि अभी तो ये अंगड़ाई है या फिर सितारों के आगे जहां और भी है…।
- वहाँ के बारे में दो साल के लिए कर रहे हैं, तारों के नीचे सो रही है, मैंने पाया कि सभी सितारों के आगे और पीछे 15 से 20 सेमी के बारे में आगे बढ़ रहे थे.
- वैसे सोते-सोते उनींदी आंखों से हमने देखा कि अनूप भार्गव अपना पुरस्कार वाला फोल्डर देख रहे थे, शायद यह सोचते हुये कि अभी तो ये अंगड़ाई है या फिर सितारों के आगे जहां और भी है …।
- नज़र बे-जुबाँ और जुबाँ बे-नज़र है इशारे समझने का अपना हुनर है सितारों के आगे अलग भी है दुनिया नज़र तो उठाओ उसी की कसर है मुहब्बत की राहों में गिरते, सम्भलते ये जाना कि प्रेमी पे कैसा कहर है अतिरिक्त......
- नज़र बे-जुबाँ और जुबाँ बे-नज़र है इशारे समझने का अपना हुनर है सितारों के आगे अलग भी है दुनिया नज़र तो उठाओ उसी की कसर है मुहब्बत की राहों में गिरते, सम्भलते ये जाना कि प्रेमी पे कैसा कहर है अतिरिक्त...
- यूपीए-२ का रिपोर्ट कार्ड जारी करने के बाद प्रधानमंत्री की सितारों के आगे जहाँ और भी है वाली बात पर प्राइमटाइम में शायर मुनव्वर राणा की प्रतिक्रिया-” तुम आसमान की बुलंदियों से लौट आना, हमें जमीनी मसाहो पर बात की जरुरत … शेष »
- लेखन ने मुझे कुछ दिया हो या नहीं, मगर मनोजगत की अर्गलाएं, खिड़कियां खोलते, बंद करते, दीवारों के पुख़्तेपन, सीलन या भुरभुरेपन को महसूस करते, आदिम गंध की खोहों से सितारों के आगे तक स्मृति और कल्पना की आंखमिचौली में भटक कर सत्य को टटोलना मेरे लिए एक दिलचस्प अनुभव रहा है।
- रोग पैदा कर ले कोई जिंदगी के, वास्ते सिर्फ सेहत के सहारे जिंदगी कटती नहीं सितारों के आगे जहां और भी हैं, अभी इश्क के इम्तेहां और भी हैं बुत को बुत और खुदा को जो खुदा कहते हैं, हम भी देखें कि तुझे देख के क्या कहते हैं
- सितारों के आगे जहाँ है किधर कोई तो कहो आस्मां है किधर यहाँ इंसान देखे ज़माना है गुजरा क्यों परेशान हो के खुदा है किधर सच देखती थी सही बोलती थी कहाँ है वो आँखें, जुबां है किधर रात से सहर रास्ता पूछती है पूछूं मैं किसको, है मंजिल किधर पसीने में सब धुल गयीं हैं...
- सितारों के आगे जहाँ है कहाँ परकोई तो कहो आस्मां है कहाँ परयहाँ इंसान देखे ज़माना है गुजरा क्यों परेशान हो के खुदा है कहाँ पर पसीने में सब धुल गयीं हैं लकीरें नसीबों का जाने निशाँ है कहाँ पर सच देखती थी सही बोलती थी कहाँ है वो आँखें, जुबां है कहाँ पर सहर से सुबह रा...