सर विलियम जोन्स sentence in Hindi
pronunciation: [ ser viliyem jones ]
Examples
- अठारहवीं शताब्दी में भारत के अतीत की खोज और यूरोप के सामने उसे प्रस्तुत करने का काम अधिकांशतया भारत में जेसुइट संप्रदाय के लोगो और सर विलियम जोन्स तथा चार्ल्स विल्किन्स जैसे ईस्ट इंडिया कंपनी के यूरोपीय कर्मचारियों ने किया।
- संस्कृत भाषा में इन नामों की उपयुक्तता और अभिव्यक्ति के कारण सर विलियम जोन्स ने कहा था ‘यदि लिनियस (आधुनिक वर्गीकरण विज्ञान का जनक) ने संस्कृत सीख ली होती तो उसके द्वारा वह अपनी नामकरण पद्धति का और अधिक विकास कर पाता।‘
- इसके बाद सन् 1784 में सर विलियम जोन्स ने, जो उन दिनों कलकत्ता के प्रधान न्यायाधीश थे, एशियाटिक सोसाइटी की स्थापना की तथा स्वयं कालिदास की ' शकुन्तला ' का अनुवाद किया और ' ऋतुसंहार ' का एक सम्पादित संस्करण प्रकाशित कराया।
- अभिज्ञान शाकुन्तलम् की प्रसिद्धि का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि आज से लगभग 200 वर्ष पूर्व सन् 1789 में सर विलियम जोन्स ने इसका अंग्रेजी में अनुवाद किया तो उस अंग्रेजी अनुवाद का जॉर्ज फोरेस्टर ने सन् 1891 में जर्मनी भाषा में अनुवाद प्रकाशित कर दिया।
- भारतीय सांस्कृतिक सम्पदा से प्रभावित होकर सन् 1784 ई0 में सर विलियम जोन्स ने एिशयाटिक सोसायटी की स्थापना की और एिशयाटिक सोसायटी के सतत प्रयास से ही सन् 1814 ई0 में भारतीय संग्रहालय, कलकत्ता (प्दकपंद डनेमनउ ज्ञवसबंजजंद्ध की स्थापना हुई, जिसे भारत का प्रथम संग्रहालय होने का गौरव प्राप्त हुआ।
- ' 5 इस दिशा में वारेन हैस्टिंग्स के प्रयासों का ही परिणाम था कि इन्हीं दिनों (1767) जे. जेड. हावेल की पुस्तक ÷ रिलीजियस टेनेट्स आफ जेन्ट्ज' और सर विलियम जोन्स के शोधपरक लेख ÷ एशियाटिक रिसर्चेज' के अंकों में प्रकाशित हुए, जिनसे ब्रिटिशों की निगाह में हिन्दू धर्म की विधिवत् पहचान बनी।
- शब्दगम्य इतिहास में विदेशी यात्रियों के यात्रा-वृत्तांत और अन्य लिपियुक्त अवशेषों, साहित्यिक सामग्रियों का विवरण पाठ्य पुस्तकों में पर्याप्त है, किन्तु राजतरंगिणी के पश्चात् काल के शब्दगम्य इतिहास में विवेच्य प्रयोजन हेतु अंतिम आधुनिक चरण आरंभ होता है-15 जनवरी सन 1784 से, जब सर विलियम जोन्स ने कलकता में एशियाटिक सोसायटी की स्थापना की।
- डॉ. रामविलास शर्मा ने सर विलियम जोन्स के ऊपर जो कथन प्रस्तुत किए हैं उनसे यह स्पष्ट होता है कि सर, विलियम जोन्स ने देवनागरी, अरबियन, पर्शियन, रोमन और बांग्ला आदि अनेक लिपियों का अध्ययन किया था और उन्होंने देवनागरी लिपि में उपयुक्तता, स्पष्टता और संतुलन आदि वैज्ञानिक गुण पाये थे।
- शब्दगम्य इतिहास में विदेशी यात्रियों के यात्रा-वृत्तांत और अन्य लिपियुक्त अवशेषों, साहित्यिक सामग्रियों का विवरण पाठ् य पुस्तकों में पर्याप्त है, किन्तु राजतरंगिणी के पश्चात् काल के शब्दगम्य इतिहास में विवेच्य प्रयोजन हेतु अंतिम आधुनिक चरण आरंभ होता है-15 जनवरी सन 1784 से, जब सर विलियम जोन्स ने कलकता में एशियाटिक सोसायटी की स्थापना की।