यतीन्द्रनाथ दास sentence in Hindi
pronunciation: [ yetinedrenaath daas ]
Examples
- इनमें से एक-यतीन्द्रनाथ दास की बोर्स्टल जेल लाहौर में लगातार भूख हड़ताल करने से मृत्यु हो गयी, शेष बचे १७ में से ३ को फाँसी, ७ को उम्र-कैद, एक को ७ वर्ष व एक को ५ वर्ष की सजा का हुक्म हुआ।
- इनमें से एक-यतीन्द्रनाथ दास की बोर्स्टल जेल लाहौर में लगातार भूख हड़ताल करने से मृत्यु हो गयी, शेष बचे १ ७ में से ३ को फाँसी, ७ को उम्र-कैद, एक को ७ वर्ष व एक को ५ वर्ष की सजा का हुक्म हुआ।
- जन्मदिन की बहुत बहुत हार्दिक बधाईयां और शुभकामनाएं! आजादी का अनोखा सपना बुना था दुर्गा भाभी ने स्वतंत्रता संग्राम की मशाल थामने वाले हाथ एक ओर जहां चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, यतीन्द्रनाथ दास और राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों के थे तो दुर्गा भाभी और सुशीला जी जैसी वीरांगनाओं के भी।
- यहां यतीन्द्रनाथ दास से मिलकर दीर्घकालीन योजनाएं बनाई और ब्रिटिश सरकार के जनविरोधी कानूनों को पास किए जाने के विरोध में 8 अप्रैल 1929 को संसद भवन में उन्होंने बटुकेश्वर दत्त क साथ मिलकर बम विस्फोट करने के साथ ही क्रांतिकारी दल की नीतियों और कार्यक्रमों में छपे हुए पर्चे फेंके और अपनी गिरफ्तारी दे दी।
- यहां यतीन्द्रनाथ दास से मिलकर दीर्घकालीन योजनाएं बनाई और ब्रिटिश सरकार के जनविरोधी कानूनों को पास किए जाने के विरोध में 8 अप्रैल 1929 को संसद भवन में उन्होंने बटुकेश्वर दत्त क साथ मिलकर बम विस्फोट करने के साथ ही क्रांतिकारी दल की नीतियों और कार्यक्रमों में छपे हुए पर्चे फेंके और अपनी गिरफ्तारी दे दी।
- संतानम · बृजलाल वियाणी · ठाकुर केसरी सिंह · सत्येन्द्र नारायण सिंह · स्वामी सहजानंद सरस्वती · रफ़ी अहमद क़िदवई · यतीन्द्रनाथ दास · चारू मजूमदार · मीरा बेन · मोहम्मद अली · पूरन चन्द जोशी · मानवेन्द्र नाथ राय · मिनजुर भक्तवत्सलम · पंडित कांशीराम · भगवतीचरण बोहरा · बारीन्द्र कुमार · रास बिहारी बोस
- इस ऐतिहासिक अनसन व्रत में घुल-घुल कर स्वर्गीय यतीन्द्रनाथ दास ने 63 दिन के उपवास के बाद प्राण विर्सजन कर दिया था, जिसकी प्रतिक्रिया से एक बार ही घबराकर ब्रिटिश गवर्नमेंटेे को जेल संबंधी कानूनों में परिवर्तन करना पड़ा जिसके परिणामस्वरूप ए, बी और सी क्लास की रचनाएं हुई और इस प्रकार राजनैतिक बंदियों ने यतीन्द्रनाथ दास के प्रत्यक्ष तथा अन्य वीर युवकों के मूक बलिदानों से लाभ दठाया!
- इस ऐतिहासिक अनसन व्रत में घुल-घुल कर स्वर्गीय यतीन्द्रनाथ दास ने 63 दिन के उपवास के बाद प्राण विर्सजन कर दिया था, जिसकी प्रतिक्रिया से एक बार ही घबराकर ब्रिटिश गवर्नमेंटेे को जेल संबंधी कानूनों में परिवर्तन करना पड़ा जिसके परिणामस्वरूप ए, बी और सी क्लास की रचनाएं हुई और इस प्रकार राजनैतिक बंदियों ने यतीन्द्रनाथ दास के प्रत्यक्ष तथा अन्य वीर युवकों के मूक बलिदानों से लाभ दठाया!