मानव क्षमता sentence in Hindi
pronunciation: [ maanev kesmetaa ]
"मानव क्षमता" meaning in English
Examples
- स् वास् थ् य, शिक्षा और कौशल विकास महत् वपूर्ण क्षेत्र हैं, जिनसे मानव क्षमता में वृद्धि होती है और जो समावेशी विकास के लक्ष् य की प्राप्ति में मददगार हो सकते हैं।
- यह पूरा करने के लिए, संगठन सकारात्मक निर्णय बनाने के कौशल को बढ़ावा देता है, निवारक स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं प्रदान करता है, और सहायक समुदाय संस्थानों को प्रोत्साहित करती है, जो मानव क्षमता का अनुकूलन.
- इस मास्टर कोर्स करने के लिए तथाकथित “सकारात्मक शांति” निर्माण पद्धति के रूप में अहिंसा के आवेदन पर आधारित है पुनर्गठन यानी समाज और नए दृष्टिकोण है कि मानव क्षमता का पूर्ण विकास की अनुमति के साथ
- आधुनिक गवेषणाओं के कारण जैसे जैसे दूरबीन की क्षमता बढ़ती जाती है, वैसे वैसे ब्रह्मांड के इस दृश्यमान क्षेत्र की सीमा बढ़ती जाती है, पर यह निर्विवाद सत्य है कि ब्रह्मांड की पूरी थाह मानव क्षमता की कल्पना के भी परे है।
- आधुनिक गवेषणाओं के कारण जैसे जैसे दूरबीन की क्षमता बढ़ती जाती है, वैसे वैसे ब्रह्मांड के इस दृश्यमान क्षेत्र की सीमा बढ़ती जाती है, पर यह निर्विवाद सत्य है कि ब्रह्मांड की पूरी थाह मानव क्षमता की कल्पना के भी परे है।
- प्रकृति प्रदत्त भौतिक सामग्री में से तथा वस्तुगत जगत की नियमसंगतियों के संज्ञान के आधार पर समाज की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाले नये यथार्थ का निर्माण करने की मानव क्षमता ही सृजनात्मकता है, जिसकी उत्पत्ति श्रम की प्रक्रिया में हुई हो।
- धर्मनिरपेक्ष शोधकर्ता इन चीजों के बारे में अपने खोज में निर्णायक नहीं थे क्योंकि वो इस बात को समझाने में सक्षम नहीं थे के कैसे इन लोगों ने ये चीजें अनुभव किया जो उनके समझने या अनुभव के मानव क्षमता से परे बातें थे.
- आधुनिक गवेषणाओं के कारण जैसे जैसे दूरबीन की क्षमता बढ़ती जाती है, वैसे वैसे ब्रह्मांड के इस दृश्यमान क्षेत्र की सीमा बढ़ती जाती है, पर यह निर्विवाद सत्य है कि ब्रह्मांड की पूरी थाह मानव क्षमता की कल्पना के भी परे है।
- पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल के दिनों में यह बात सामने आयी है कि केंद्र सरकार रॉ-मेटेरियल के निर्यात पर छूट देने जा रही है, जिस देश में मानव क्षमता अधिक हो, बेरोजगारी अधिक हो, वहां इस तरह के फैसले से बेरोजगारी और अधिक बढ़ेगी।
- इतनी बड़ी संख्या में भिखारियों को दान-दक्षिणा देने वाले हम लोग स्वर्ग या ईश्वर को पाने की कामना में देश की बहुत बड़ी जनसंख्या को कामचोर और हरामखोर बना रहे हैं जबकि इस मानव क्षमता का उपयोग जन कल्याण और विकास के कई आयामों में किया जा सकता है।