पानी के चश्मे sentence in Hindi
pronunciation: [ paani k cheshem ]
Examples
- मनिकरण आने पर नदी के दाई तरफ के हिस्से में मंदिर, गुरुद्वारा, धर्मशालाये, बाजार और गर्म पानी के चश्मे हैं, यहाँ पर केवल पैदल ही पुल पार करके जाया जा सकता हैं ।
- अगले लेख में मनिकरण के मंदिर, गुरुद्वारा और गर्म पानी के चश्मे आदि पर बिताए अपने बहुमूल्य और खूबसूरत पलो के बारे में अपना अनुभव इस श्रृंखला के अंतिम भाग में प्रस्तुत करूँगा ।
- गर्म पानी के स्रोत: मणिकर्ण घाटी में गर्म पानी के चश्मे कसोल से रूपगंगा (7 कि. मी.) के क्षेत्र में पार्वती नदी के दाहिने किनारे पर पाए जाते हैं।
- हरी-भरी वादियां, मछुवाओं के गांव, अग्नि उगलती हुई ज्वालामुखी, खौलते हुए पानी के चश्मे, सफेद रेतीले समुद्री तट देखते हुए ऐसा लगता है कि जैसे किसी काल्पनिक-लोक में विचर रहे हों।
- एक जगह आपने लिखा है नदी के बाए तरफ के हिस्से में मंदिर, गुरुद्वारा, धर्मशालाये, बाजार और गर्म पानी के चश्मे हैं, नदी के दाई तरफ के हिस्से में टैक्सी, बस स्टैंड, रेस्तरा और होटल हैं ।
- ऐसे ही कुरान के अनुसार मूसा ने एक पत्थर पर डंडा मारा और उससे पानी के चश्मे बह निकले, मुहम्मद साहिब द्वारा चाँद के दो टुकड़े करना, मुहम्मद साहिब द्वारा एक मुर्दा लड़की को जिन्दा करना आदि आदि.
- ऐसी खुशी जो दो दिलों के मेल और दो दिमागों की हम आहंगी से शफ़्फ़ाफ ठंडे पानी के चश्मे की तरह फूट निकलती है और जो दूसरे अफसुर्दा या गमगीन रूहों को भी सैराब करके उनमें तरन्नुम और बालीदगी पैदा कर देती है।
- रसूले करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की मुबारक उंगलियों से पानी के चश्मे जारी होते हमने देखे और यह भी हमने देखा कि खाते वक़्त में ख़ाना तस्बीह करता था (बुख़ारी शरीफ़) हदीस शरीफ़ में सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फ़रमाया, मैं उस पत्थर को पहचानता हूँ जो मेरी नबुव्वत के ज़माने में मुझे सलाम करता था.
- बाद में इमाम अलैहिस सलाम फ़रमाते हैं कि रसूले ख़ुदा (स) ने नमाज़ और इबादत को एक पानी के चश्मे से तशबीह दी है जिस के अंदर गर्म पानी हो और वह चश्मा किसी के घर के दरवाज़े पर मौजूद हो और वह शख़्स दिन रात पाँच मरतबा उस के अंदर ग़ुस्ल करे तो बदन की तमाम मैल व आलूदगी ख़त्म हो जायेगी, फ़रमाया नमाज़ भी इसी तरह ना पसंदीदा अख़लाक़ और गुनाहों को साफ़ कर देती है।
- बाद में इमाम अलैहिस सलाम फ़रमाते हैं कि रसूले ख़ुदा (स) ने नमाज़ और इबादत को एक पानी के चश्मे से तशबीह दी है जिस के अंदर गर्म पानी हो और वह चश्मा किसी के घर के दरवाज़े पर मौजूद हो और वह शख़्स दिन रात पाँच मरतबा उस के अंदर ग़ुस्ल करे तो बदन की तमाम मैल व आलूदगी ख़त्म हो जायेगी, फ़रमाया नमाज़ भी इसी तरह ना पसंदीदा अख़लाक़ और गुनाहों को साफ़ कर देती है।