नेशनल पब्लिशिंग हाउस sentence in Hindi
pronunciation: [ neshenl peblishinega haaus ]
Examples
- ‘भारतीयता की धारणा ' (भारतीयता पर निबन्ध)-नेशनल पब्लिशिंग हाउस (2005) नई दिल्ली 19. ‘भारतीय रंगमंच' (भारतीय नाट्यशैलियों पर)-नेशनल पब्लिशिंग हाउस (2005) नई दिल्ली 20. ‘जलती हुई नदी' (कविता संकलन)-शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार(2006) बीकानेर 21. ‘कलाओं की मूल्य-दृष्टि'(सौन्दर्यशास्त्र)-वाणी प्रकाशन नई दिल्ली (2008) नई दिल्ली
- ‘भारतीयता की धारणा ' (भारतीयता पर निबन्ध)-नेशनल पब्लिशिंग हाउस (2005) नई दिल्ली 19. ‘भारतीय रंगमंच' (भारतीय नाट्यशैलियों पर)-नेशनल पब्लिशिंग हाउस (2005) नई दिल्ली 20. ‘जलती हुई नदी' (कविता संकलन)-शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार(2006) बीकानेर 21. ‘कलाओं की मूल्य-दृष्टि'(सौन्दर्यशास्त्र)-वाणी प्रकाशन नई दिल्ली (2008) नई दिल्ली
- ' तुफैल ' साहेब ने इस किताब को ' उन आसुओं के नाम जो इस किताब में आने से रह गए ' किया है, आप इस किताब को ' नेशनल पब्लिशिंग हाउस, २ ३ दरियागंज, नई दिल्ली-११ ००० २ से ' प्राप्त कर सकते हैं.
- अलबत्ता, हिन्दी के लब्ध-प्रतिष्ठ उच्च-श्रेणी के कम प्रकाशकों ने ही मेरी काव्य-कृतियाँ प्रकाशित कीं-पटना के ‘ अजन्ता प्रेस प्रकाशन ', वाराणसी के ‘ हिन्दी प्रचारक पुस्तकालय ', इलाहाबाद के ‘ लोक भारती प्रकाशन ' और ‘ किताब महल ', दिल्ली के ‘ नेशनल पब्लिशिंग हाउस ' के सिवा।
- नई दिल्ली की अन्सारी रोड पर स्थित नेशनल पब्लिशिंग हाउस के बैनर तले 1985 में यह कहानी-संग्रह प्रकाशित हुआ था, जिसकी विषय-सूची में छठी कहानी ‘ किम्पुरुष ' थी. कहानी का आरंभ रहस्यमय वातावरण के बीच कुछ संवादों से होता है, जिसे मैंने फौरन रजनी रावत जी को सुना दिया:
- इस बीच एक और संस्था ‘ हिंदी प्रचार संस्था ' का गठन हु आ. इसके साथ कुछ पत्रिकाएँ भी निकलीं जैसे ‘ नैवेद ', ‘ अमर दीप ', ‘ चेतक ' आदि. 1969 में भारत से आए वेद मित्र मोहला की गद्य की पुस्तक ‘ संसार के अनोखे पुल ' 1972 नेशनल पब्लिशिंग हाउस की मिली. पत्रिका
- जैसे एक आलाप के सात सुरों में चढ़ती-उतरती अंतराएँ हों ‘ राधा ' और ‘ माधव '! स्वनामधन्य रचनाकार और धाकड़ लेखक ‘ उद्भ्रांत ' ने इस बात को ‘ नेशनल पब्लिशिंग हाउस ' से छपी अपनी काव्यरचना ‘ राधामाधव ' में प्रस्तुत किया है अपनी अनुभूति के राधा-भाव को अत्यंत मधुर काव्यात्मक शब्द-चित्रों और भाव-चित्रों के साथ सात सर्गों में बाँधकर!...
- साहित्य अकादेमी, दिल्ली द्वारा प्रकाशित ‘ इंटीग्रेटेड हिस्ट्री ऑव इंडियन लिटरेचर ' के संपादक मंडल के सदस्य, हिंदी माध्यम कार्यान्वयन निदेशालय, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित ‘ भारतीय साहित्य का समेकित इतिहास ' में लेखन, नेशनल पब्लिशिंग हाउस, दिल्ली द्वारा प्रकाशित ‘ हिंदी साहित्य का इतिहास (डॉ. नगेन्द्र) में लेखन जैसा साहित्येतिहास लेखन का कार्य कर चुके हैं ।
- आनंद प्रकाश दीक्षित दिल्ली में गुरुवार को अपनी पुस्तक ‘ त्रेता: एक अन्तर्यात्रा ' के लोकार्पण के अवसर पर अपनी वृद्धावस्था एवं अस्वस्थता के कारण पुणे से नहीं आ सके थे, किंतु इस अवसर पर पढ़े जाने के लिए उन्होंने पुस्तक के प्रकाशक, नेशनल पब्लिशिंग हाउस, नई दिल्ली के प्रबंध निदेशक सुरेन्द्र मलिक को एक पत्र भेजा था, जिसका पाठ उक्त अवसर पर किया गया।
- उनकी इस कविता से असहमति मेरी समझ में कतई नहीं आयी, हो सकता है इसके पीछे उनके यानी सम्पादक समकालीन भारतीय साहित्य और नामवर सिंह यानी सम्पादक आलोचना के बीच की कोई कटुता रही हो, जिसका शिकार इस कविता और कवि को बनना पड़ा, लेकिन बात यहीं समाप्त नहीं हुई-शानी ने इस कविता के खिलाफ़ नवभारत टाइम्स के अपने स्तम्भ में भी लिखा, जो नेशनल पब्लिशिंग हाउस से आयी उनकी एक किताब में संकलित भी है।