धार्मिक हिंसा sentence in Hindi
pronunciation: [ dhaaremik hinesaa ]
Examples
- इस देश में रोना यह रोया जाता है कि विदेशी आक्रांताओं के आने के बाद धार्मिक हिंसा शुरू हुई लेकिन इतिहास का सच यह है कि धार्मिक हिंसा का सूत्रपात करने का श्रेय इसी देश की ओछी मानसिकता को है।
- कुमार मंगल ने बताया कि जब फिल्म को सेंसर बोर्ड के सामने रखा गया तो उन्होंने कुछ सीन काटने के लिए कहे क्योंकि इन दृश्यों में ऑनर किलिंग तथा राजनीतिक और धार्मिक हिंसा का सीधे तौर पर उल्लेख किया गया है।
- जब यह फिल्म सेंसर बोर्ड के सामने रखी गई तो उन्होंने हमें कई तरह के सीन को हटाने का सुझाव दिया क्योंकि इसमें कई दृश्यों में आनर किलिंग तथा राजनीतिक और धार्मिक हिंसा का सीधे तौर पर उल्लेख किया गया है।
- और पूरे भारत में जगह-जगह पर अलग-अलग समय में कभी सिक्खों पर (84), कभी कंधमाल में (जिसमें ईसाई स्टेल को जलाया गया) एवं बौद्धों (बोद्धगया की हालिया घटना) पर धार्मिक हिंसा होती रही है.
- इसके बावजूद कई लोग देश की कमजोर सरकार को इसके लिए जिम्मेदार मानते हैं जो कि भ्रष्टाचार, गलत नीतियां बनाने, धार्मिक हिंसा को रोकने और संसद में गतिरोध को तोड़ने में नाकाम रहने के आरोपों से घिरी हुई है.
- आम लोगों के खिलाफ धार्मिक हिंसा की इस मौजूदा बाढ़ ने एक बार फिर पाकिस्तान में फैसलाबाद झांग के बिशप डॉ. जॉन जोसेफ की भविष्यवाणी की याद दिला दी है, जिन्होंने पाकिस्तान में ईसाइयों पर बढ़ते अत्याचारों के खिलाफ विरोध करते हुए अपनी जान दी थी।
- ' ' अमेरिकी मुस्लिम काउंसिल ने ऋतंभरा के पूर्व के दौरे का हवाला देते हुए कहा है कि उस समय भी उन्होंने एक व्यापक तौरपर विवाद को जन्म दिया था और हाल ही में भारतीय न्यायालय में साध्वी धार्मिक हिंसा को उत्प्रेरित करने के लिए चलाया जा रहे मुकदमें का सामना कर रही है।
- फरीद जकारिया ने कहा है कि लोकतंत्र की पहचान केवल चुनाव कराना या बहुमत की इच्छा का प्रतिनिघित्व (जिसका मतलब बहुमत द्वारा धार्मिक हिंसा भी हो सकता है) करना नहीं है, बल्कि स्वतंत्र संस्थानों का निर्माण करना भी है, जो नेताओं और बहुमत या भीड़ को न्याय में बाधा उपस्थित करने से रोक सके।
- फरीद जकारिया ने कहा है कि लोकतंत्र की पहचान केवल चुनाव कराना या बहुमत की इच्छा का प्रतिनिघित्व (जिसका मतलब बहुमत द्वारा धार्मिक हिंसा भी हो सकता है) करना नहीं है, बल्कि स्वतंत्र संस्थानों का निर्माण करना भी है, जो नेताओं और बहुमत या भीड़ को न्याय में बाधा उपस्थित करने से रोक सके।
- भारत विभाजन के पीछे छिपे राजनीतिक स्वार्थ, अनियंत्रित धार्मिक हिंसा की त्रासदी, राजनीतिक अदूरदर्शिता और खोखले आदर्शवाद ने भारत को जो स्थाई शल्य प्रदान किये हैं उनका निर्हरण शताब्दियों तक संभव नहीं | हिन्दू समुदाय में एकता और राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव ने भारत के भविष्य को संकट में डालदिया है |