तरुणसागर sentence in Hindi
pronunciation: [ terunesaagar ]
Examples
- रामबाग के एसएमएस इन्वेस्टमेंट ग्राउंड में चल रहे कड़वे प्रवचन दिव्य सत्संग में गुरुवार राष्ट्रसंत मुनि तरुणसागर ने कहा कि बड़े संतों पर ऐसे आरोप लगना सौ प्रतिशत गलत है।
- राष्ट्रसंत मुनि तरुणसागर ने कहा कि देश में महंगाई चरम पर है, इसमें आम आदमी पिस रहा है और नेता खयाली ख्वाब दिखाकर गरीबी का मजाक बना रहे हैं।
- अचूक शैली में, अपने विचारों से लोगों को अपनी ही खोज के तौर तरीके बताने वाले राष्ट्रसंत मुनि तरुणसागर जी महाराज की वाणी सहज आकर्षण का विषय बन गई है।
- अचूक शैली में, अपने विचारों से लोगों को अपनी ही खोज के तौर तरीके बताने वाले राष्ट्रसंत मुनि तरुणसागर जी महाराज की वाणी सहज आकर्षण का विषय बन गई है।
- राष्ट्रप्रीति की छाया में राजनिति हो तो ठीक है-मुनि तरुणसागर औरंगाबाद (महा) 10 अगस्त-क्रांतिकारी राष्ट्रसंत मुनिश्री तरुणसागरजी ने कहा कि राष्ट्रप्रीति की छाया में यदि राजनिति होती है तो बुरी नहीं है।
- राजापार्क स्थित आर्य समाज में अपना अनशन शुरू करने से पूर्व छाबड़ा ने भट्टारकजी की नसियां में चल रहे जैन मुनियों के चातुर्मास कार्यक्रम में पहुंचकर तरुणसागर महाराज, चंद्रप्रभ सागर महाराज और ललितप्रभ सागर से आशीर्वाद लिया।
- दिगंबर जैन मुनि संघ सेवा जागृति मंच के प्रचार मंत्री संदीप बोहरा ने बताया कि जुलूस में ‘ जब तक सूरज-चांद रहेगा तरुणसागर का नाम रहेगा ' जैन जयतु शासनम्, णमोकार मंत्र आदि के माध्यम से गुणगान किया जा रहा था।
- ऐसे बांटनेवालों को मैं मुनि तरुणसागर चुनौती देता हूँ कि ऐ बांटने वाले इंसानों तुमने लकीर खींचकर जमीन को तो बांट दिया लेकिन मैं तुम्हारी शक्ति उस दिन मानूंगा जिस दिन तुम आसमान में लकीर खींचकर दिखाओगे कि यह हिंदु की हवा है और यह मुसलमान की हवा है ।
- मैंने कहा: खाना है आम, और बबूल के बीज बो रहा है, इसलिए रो रहा है | अपनी तो धुलती नहीं, और दूसरों की धो रहा है, इसलिए रो रहा है | चादर है छोटी और पांव पसार के सो रहा है, इसलिए रो रहा है | और जो कभी नहीं हुआ वह देश में अब हो रहा है | इसलिए बापू पूरा देश रो रहा है |-मुनि तरुणसागर
- इस बारे में मेरी नजरों में सबसे बेहतरीन उदाहरण है, जैन महाऋषि तरुणसागर जी महाराज हैं, जो कहते हैं कि जब वह 12-13 साल के थे, तो स्कूल से आते वक्त वह एक जैन धर्मशाला में कुछ पल रुके, वहां प्रवचन हो रहे थे, वहां प्रवचन करने वाले महाराज जी ने एक बात कही, जो महाराज के दिल में घर कर गई, और आज जैन मुनि तरुण्ा सागर ऋषि को कौन नहीं जानता, वह बात थी, ईश्वर हर व्यक्ति के भीतर है, और हर व्यक्ित ईश्वर हो सकता है।