जय शंकर प्रसाद sentence in Hindi
pronunciation: [ jey shenker persaad ]
Examples
- जय शंकर प्रसाद मेरे प्रिय कवि हैं, उनके जीवन पर इतनी आधिकारिक कल्पना शक्ति और रोचक शैली में रचा यह कथानक पढने की उत्कण्ठा जगा रहा है, इंतज़ार रहेगा इस महत्त्वपूर्ण कृति का..
- छापामारी दस्ता में नगर थानाध्यक्ष संजय कुमार पांडेय, कुर्साकांटा थानाध्यक्ष जय शंकर प्रसाद, बरदाहा के मनोज कुमार मनीष, ताराबाड़ी के उमा राव राय व टाइगर मोबाइल दस्ता के सदस्य शामिल थे।
- चित्रांकन में जहाँ आपने जिन रंगों का प्रयोग किया है वह सर्वथा उसी तरह से उचित है जिस तरह से जय शंकर प्रसाद जी द्वारा रचित कामायनी में सभी सर्गों का चित्रण किया है।
- एक अनूठे प्रयास के लिए सबसे पहले तो आदित्य जी को दिल से शुक्रिया करना चाहती हूँ, जय शंकर प्रसाद जी की इस अमूल्य कृति को स्वर देने पर सभी पुरूस्कृत प्रतिभागियों को बधाई ।
- आप जानते ही हैं कि जय शंकर प्रसाद जी की ' कामायनी' में एक पंक्ति थी: 'नारी! तुम केवल श्रद्धा हो' उसकी जगह गलती से लिखा गया: 'नारी! तुम केवल अद्धा हो' मॉडरेशन के बारे में आपकी सलाह ठीक ही लगती है.
- मञ्जूषा जी की आवाज़ सुन कर तो हम डूब ही गए | दंग रह गए संकल्पना करने वाले पर कि जय शंकर प्रसाद की रचना को इस तरह स्वर और संगीत मिल पायेगा | कृष्ण राज कुमार जी को भी बधाई |
- बीती विभावरी जाग रीअम्बर पनघट में डुबो रहीतारा घट उषा नागरीखग कुल कुल सा बोल रहाकिसलय का अंचल दोल रहालो लतिका भी भर लायी मधु मुकुल नवल रस गागरीअधरों में राग अमंद पिए अलकों में मलयज बंद कियेतू अब तक सोयी है आलीआँखों में लिए विहाग री-जय शंकर प्रसाद
- बीती विभावरी जाग रीअम्बर पनघट में डुबो रहीतारा घट उषा नागरीखग कुल कुल सा बोल रहाकिसलय का अंचल दोल रहालो लतिका भी भर लायी मधु मुकुल नवल रस गागरीअधरों में राग अमंद पिए अलकों में मलयज बंद कियेतू अब तक सोयी है आलीआँखों में लिए विहाग री-जय शंकर प्रसाद...
- आप जानते ही हैं कि जय शंकर प्रसाद जी की ' कामायनी ' में एक पंक्ति थी: ' नारी! तुम केवल श्रद्धा हो ' उसकी जगह गलती से लिखा गया: ' नारी! तुम केवल अद्धा हो ' मॉडरेशन के बारे में आपकी सलाह ठीक ही लगती है.
- आधुनिक हिंदी साहित्य में प्रेमचंद, सूर्यकांत त्रिपाठी ' निराला ', जय शंकर प्रसाद और रामधारी सिंह दिनकर के बात यदि कोई लब्ध प्रतिष्ठत लेखक नहीं हुआ तो उसका कारण यही है कि बाद के काल में लेखक की लेखन से कम उससे होने वाली उपलब्धि पर ज्यादा दृष्टि अधिक रही है।