चिरी sentence in Hindi
pronunciation: [ chiri ]
Examples
- वो क्या जाने पीर पराई. फटी एङियों के बारे में जिस भी कवि ने ये पंक्तियां लिखी हैं सत्य है, क्यों कि फटी बिवाईयों का दर्द इतना ज्यादा होता है कि जब मेरी मां इनके उपचार के लिए पिघला मोम डालती थी चिरी हुई एङियों में तो वो जलन भी कम लगती थी, सर्दी के दिनो...
- तुम खट्टी होगी... तुम खट्टी होगी... पर सच्ची होगी... अभी छौंक रही होगी हरी चिरी मिर्चें... खट्टे करौंदों के साथ... या कच्ची आमी के... या नींबू के... या ना भी शायद... नाप रही होगी अपना कंधा... बाबू जी के कंधे से... या भाई से... और एड़ियों के बल खड़ी तुम्हारी बेईमानी बड़ा रही होगी तुम्हारे पिता की चिंता...
- -समीर लाल ' समीर' वाह देवेश जी!! तुम खट्टी होगी... पर सच्ची होगी... अभी छौंक रही होगी हरी चिरी मिर्चें... खट्टे करौंदों के साथ... या कच्ची आमी के... या नींबू के... या ना भी शायद... नाप रही होगी अपना कंधा... बाबू जी के कंधे से... या भाई से... और एड़ियों के बल खड़ी तुम्हारी बेईमानी बड़ा रही होगी तुम्हारे पिता की चिंता...
- वो क्या जाने पीर पराई. फटी एङियों के बारे में जिस भी कवि ने ये पंक्तियां लिखी हैं सत्य है, क्यों कि फटी बिवाईयों का दर्द इतना ज्यादा होता है कि जब मेरी मां इनके उपचार के लिए पिघला मोम डालती थी चिरी हुई एङियों में तो वो जलन भी कम लगती थी,सर्दी के दिनों में एङी फटना एक सर्व सामानतय समस्या है.
- फटी एङियों के बारे में जिस भी कवि ने ये पंक्तियां लिखी हैं सत्य है, क्यों कि फटी बिवाईयों का दर्द इतना ज्यादा होता है कि जब मेरी मां इनके उपचार के लिए पिघला मोम डालती थी चिरी हुई एङियों में तो वो जलन भी कम लगती थी, सर्दी के दिनों में एङी फटना एक सर्व सामानतय समस्या है.
- वो क्या जाने पीर पराई. फटी एङियों के बारे में जिस भी कवि ने ये पंक्तियां लिखी हैं सत्य है, क्यों कि फटी बिवाईयों का दर्द इतना ज्यादा होता है कि जब मेरी मां इनके उपचार के लिए पिघला मोम डालती थी चिरी हुई एङियों में तो वो जलन भी कम लगती थी, सर्दी के दिनों में एङी फटना एक सर्व सामानतय समस्या है.
- तालाबों के प्रबंधक अघोषित-अलिखित लेकिन होते निश्चित हैं, जो सुबह पहले-पहल तालाब पहुंचकर घटते-बढ़ते जल-स्तर के अनुसार घाट-घठौंदा के पत्थरों को खिसकाते हैं, घाट की काई साफ करते हैं, दातौन की बिखरी चिरी को इकट्ठा कर हटाते हैं और इस्तेमाल के इस सामुदायिक केन्द्र के औघट (पैठू की दिशा में प्रक्षालन के लिए स्थान) आदि का अनुशासन कायम रखते हैं।
- जाके पैर न फटी बिवाई-वो क्या जाने पीर पराई. फटी एङियों के बारे में जिस भी कवि ने ये पंक्तियां लिखी हैं सत्य है, क्यों कि फटी बिवाईयों का दर्द इतना ज्यादा होता है कि जब मेरी मां इनके उपचार के लिए पिघला मोम डालती थी चिरी हुई एङियों में तो वो जलन भी कम लगती थी, सर्दी के दिनों में एङी फटना एक सर्व सामानतय समस्या है.
- ब्रज-साहित्य-मंडल के लिए उन्होंने जो असाधारण परिश्रम किया, उसके कारण भी हम लोग अधिकाधिक निकट आते रहे और फिर उसके बाद तो दिल्ली में हम लोगों ने बारह वर्ष तक साथ-साथ भाड़ झोंका! संस्थाओं को कायम करने की बीमारी हम दोनों को रही है और जो लोग इस अव्यापार में फंसते हैं, उनकी मिसाल 'पंचतंत्र' के उस बंदर से दी जा सकती है, जिसने चिरी हुई लकड़ी में से खूंटा उखाड़ लिया था और उसके बाद उसकी जो दुर्गति हुई थी, वह जगज़ाहिर है!
- जबकि चिरी हुई दीवार की ओट मंे खड़े उनके आँसुओं के पीछे धूल में पिटते नंगे चेहरों को धोता कँटीला घड़ियाल है कीचड़ में पद्म-श्री सूँघता हुआ और प्रतीकों की जकड़ जहाँ ख़ून में मिली हुई दूर तक उभड़ती चली गयी है उस दुर्घटना में-कोई है जो मेरे बदहवास निहत्थेपन को सिर्फ़ मेरा कुचला हुआ सौन्दर्यबोध न कहे और जब मेरी चुप चीख से उतरकर हाथ-पाँव की हरक़त में बदल जाए तो उसे पिछड़ेपन की छटपटाहट नहीं, चीजों को तोड़ने का इरादा समझे?