कोरी गप्प sentence in Hindi
pronunciation: [ kori gapep ]
"कोरी गप्प" meaning in English
Examples
- प्रश्न उत्पन्न हुआ कैसे? इस प्रश्न का मूल भाव था कोरी गप्प! बहरहाल अनिल जी कहीं खो गये, “ हेलीकॉप्टर से होना चाहिये।
- जिन लोगों को हमारी बात कोरी गप्प लगे वो कृपया बीबीसी. कॉम पर बीबीसी के पटना संवाददाता मणिकांत ठाकुर के पुल के उपर और नीचे जाकर नाव से लिए गए फोटो को देख लें!
- हो सकता है एकदम से यह बात सुनकर यह कोरी गप्प नजर आये कि इन सबके पीछे दुनिया के विकसित देशों की अति विकसित योजनाएं हैं लेकिन योजनाएं हैं और यह सब अनायास नहीं है।
- आगे से कोई पृथ्वीराज चौहान और चन्द्रबरदाई के प्रसंग ‘चार बाँस.... अंगुल अष्ट प्रमाण' को कोरी गप्प कहे तो आप ‘मत चूको चौहान' को मन में दुहराते हुये उसे ‘अंगुल कर सकते' हैं यानि उसे रहस्य बता सकते हैं।
- आगे से कोई पृथ्वीराज चौहान और चन्द्रबरदाई के प्रसंग ‘ चार बाँस.... अंगुल अष्ट प्रमाण ' को कोरी गप्प कहे तो आप ‘ मत चूको चौहान ' को मन में दुहराते हुये उसे ‘ अंगुल कर सकते ' हैं यानि उसे रहस्य बता सकते हैं।
- जी हां यह कोई कहानी या कोरी गप्प नहीं बल्कि सच्चाई है आज यह महाश्य मसालों की दुनिया के बेताज बादशाह हैं जी हां हम बात कर रहे हैं एमडीएच मसाला कंपनी के मालिक महाश्य धर्मपाल जी की जिनका जन्म 27 मार्च 1927 को सियालकोट में हुआ था।
- इस पर लेखक, जो निश्चित रूप से आप जैसा विद्वान नहीं रहा होगा, की टिप्पणी थी कि इस परीक्षा में 70 % अंक लेकर ज्योतिषी ने यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय ज्योतिष कोरी गप्प नहीं है वरन् एक वैज्ञानिक पद्धति है, जिसे व्यापक शोध के द्वारा और अधिक अचूक बनाया जा सकता है.
- जो लोग इस जाल में फंस रहे हैं कि ब्राहमण ब्रहम-संवाद, वायवीयता, अमूर्त, अगड़म-बगड़म के माहिर होते थे, उन्हें पहले ठीक से यह तो जान लेना चाहिए कि यह सब होता क्या है, इसमें जूस कितना होता है और फोग कितना होता है, कुछ होता भी है या सब कोरी गप्प होती है!?
- अकिला बुआ भोजपुरी इलाके के मौखिक सांस्कृतिक इतिहास का एक ऐसा चरित्र हैं जिनके बारे में कोई भूले से भी यह सवाल नहीं करता कि कि उनका गांव-गिरांव कौन-सा था, उनका जात-धरम कौन-सा था और सबसे बड़ी बात तो यह है कोई यह संदेह व्यक्त नहीं करता कि वे सचमुच थीं भी या कि यह कोरी गप्प है!
- पहली कि उसका बाप दकियानूस है और उसका दादा दिवाना था जो उसकी सोच है वही उत्कृष्ठ है, दूसरी कि हमारे सारे धर्मग्रंथ झूठे और कोरी गप्प हांकने वाले है, तीसरी कि अपने शौक और इच्छाएं ज़रुरी है और उनको पूरा करना ही सुख तथा चौथी कि विकास सिर्फ पश्चिम में ही है और हमारी उन्नति एवं शक्ति का विस्तार भी पाश्चात्य विचारप्रणाली से हो सकता है।