कायचिकित्सा sentence in Hindi
pronunciation: [ kaayechikitesaa ]
"कायचिकित्सा" meaning in Hindi
Examples
- चरक एवं सुश्रुत (सुश्रुत के लैटिन आनुवादक हेसलर के अनुसार समय लगभग 1,000 वर्ष ई.पू.) में इसके पृथक्-पृथक् शल्य एवं कायचिकित्सा के रूप में, दो भेद हो गए हैं।
- चरक एवं सुश्रुत (सुश्रुत के लैटिन आनुवादक हेसलर के अनुसार समय लगभग 1,000 वर्ष ई.पू.) में इसके पृथक्-पृथक् शल्य एवं कायचिकित्सा के रूप में, दो भेद हो गए हैं।
- आज सूक्ष्मदर्शी का उपयोग कायचिकित्सा (Medicine), जीवविज्ञान (Biology), शैलविज्ञान (Perology), मापविज्ञान (Metrology), क्रिस्टलविज्ञान (Crystallography) एवं धातुओं और प्लास्टिक की तलाकृति के अध्ययन में व्यापक रूप से ही हो रहा है।
- शल्यचिकित्सा आदि के विकास के साथ साथ शल्यचिकित्सा में भी तीव्रतापूर्वक विकास, सुधार एवं उन्नति होने लगी, जिससे कायचिकित्सा की भाँति समाज में शल्यचिकित्सा के लिए भी समान बढ़ने लगा।
- यद्यपि दोनों में ही औषधो पचार का न्यूनाधिक सामान्यरूपेण महत्व होने पर भी शल्यचिकित्सा में चिकित्सक के हस्तकौशल का महत्व प्रमुख होता है, जबकि कायचिकित्सा का प्रमुख स्वरूप औषधोपचार ही होता है।
- यद्यपि दोनों में ही औषधो पचार का न्यूनाधिक सामान्यरूपेण महत्व होने पर भी शल्यचिकित्सा में चिकित्सक के हस्तकौशल का महत्व प्रमुख होता है, जबकि कायचिकित्सा का प्रमुख स्वरूप औषधोपचार ही होता है।
- यद्यपि दोनों में ही औषधो पचार का न्यूनाधिक सामान्यरूपेण महत्व होने पर भी शल्यचिकित्सा में चिकित्सक के हस्तकौशल का महत्व प्रमुख होता है, जबकि कायचिकित्सा का प्रमुख स्वरूप औषधोपचार ही होता है।
- चरक एवं सुश्रुत (सुश्रुत के लैटिन आनुवादक हेसलर के अनुसार समय लगभग 1,000 वर्ष ई.प ू.) में इसके पृथक्-पृथक् शल्य एवं कायचिकित्सा के रूप में, दो भेद हो गए हैं।
- 18वीं शताब्दी से शल्यचिकित्सोपयोगी शास्त्रों यथा शरीररचना-विज्ञान, शरीर-क्रिया-विज्ञान एवं क्रियात्मक (operative) शल्यचिकित्सा आदि के विकास के साथ साथ शल्यचिकित्सा में भी तीव्रतापूर्वक विकास, सुधार एवं उन्नति होने लगी, जिससे कायचिकित्सा की भाँति समाज में शल्यचिकित्सा के लिए भी समान बढ़ने लगा।
- 18 वीं शताब्दी से शल्यचिकित्सोपयोगी शास्त्रों यथा शरीररचना-विज्ञान, शरीर-क्रिया-विज्ञान एवं क्रियात्मक (operative) शल्यचिकित्सा आदि के विकास के साथ साथ शल्यचिकित्सा में भी तीव्रतापूर्वक विकास, सुधार एवं उन्नति होने लगी, जिससे कायचिकित्सा की भाँति समाज में शल्यचिकित्सा के लिए भी समान बढ़ने लगा।