कामता प्रसाद गुरु sentence in Hindi
pronunciation: [ kaametaa persaad gauru ]
Examples
- होते यदि कामता प्रसाद गुरु, ज़िदा, तो पूछती, कली ऒर फूल का यह व्याकरण कॆसा? दिविक रमेश बी-295, सेक्टर-20, नोएडा-201301 मो ० +9910177099 www.divikramesh.blogspot.com [email protected]
- इसीलिए कामता प्रसाद गुरु ने कहा था कि ÷हिन्दी में समालोचना का प्रारम्भ और प्रचार ' छत्तीसगढ़ मित्र' ने ही किया।' हिन्दी समालोचना के विकास में छत्तीसगढ़ मित्र और सप्रे जी, योगदान की चर्चा हम बाद में करेंगे।
- पं. कामता प्रसाद गुरु ने अपने “हिन्दी व्याकरण” की भूमिका में लिखा है-“अधिकांश में दूषित होने पर भी इस पुस्तक के आधार और अनुकरण पर हिन्दी के कई छोटे-मोटे व्याकरण बने और बनते जाते हैं ।
- पं. कामता प्रसाद गुरु ने अपने “हिन्दी व्याकरण” की भूमिका में लिखा है-“अधिकांश में दूषित होने पर भी इस पुस्तक के आधार और अनुकरण पर हिन्दी के कई छोटे-मोटे व्याकरण बने और बनते जाते हैं ।
- 1. कामता प्रसाद गुरुः “हिन्दी-व्याकरण,” नागरीप्रचारिणी सभा, काशी; प्रथम संस्करण संवत् 1977 (1920 ई.); षष्ठ पुनर्मुद्रण, संवत् 2017 (1960 ई.) । डॉ. वासुदेवनन्दन प्रसाद लिखते हैं-“पं. कामता प्रसाद गुरु का 'हिन्दी-व्याकरण' सन् 1920 ई. में प्रकाशित हुआ था ।
- पं. कामता प्रसाद गुरु ने अपने “ हिन्दी व्याकरण ” की भूमिका में लिखा है-” अधिकांश में दूषित होने पर भी इस पुस्तक के आधार और अनुकरण पर हिन्दी के कई छोटे-मोटे व्याकरण बने और बनते जाते हैं ।
- पं. कामता प्रसाद गुरु के समकालीन तथा बाद के हिन्दी वैयाकरणों में मुख्य रूप से अंबिका प्रसाद वाजपेयी, आचार्य रामचंद्र वर्मा, डॉ. आर्येंदु शर्मा, डॉ. हरदेव बाहरी, पं. किशोरीदास वाजपेयी का नाम आता है जिनमें पं. किशोरीदास वाजपेयी अधिक चर्चित तथा विश्रुत हुए।
- पण्डित कामता प्रसाद गुरु ने ‘ हिन्दी व्याकरण ' के ‘ शब्दसंधान ' नामक खण्ड में ‘ लिंग ' का विवेचन करते हुए कहा कि कुछ अर्थ जो केवल स्त्रियों में संभव हैं, उनके सूचक स्त्रीलिंग शब्दों के पुलिंग जोड़े संभव नहीं हो सकते।
- द्विवेदी युग के विशिष्ट साहित्यकारों-बाबू श्यामसुंदर दास, गिरिधर शर्मा चतुर्वेदी, रायकृष्णदास, अम्बिका प्रसाद बाजपेयी, मुंशी देवी प्रसाद, आचार्य राम चन्द्र शुक्ल, महावीर प्रसाद द्विवेदी, कामता प्रसाद गुरु और मैथिलीशरण गुप्त आदि के साथ गुलेरी जी का पत्र-आदान-प्रदान था ।
- ऊ-उत्तर आधुनिक काल-स्वातन्त्र्योत्तर युग (सन् 1947 से वर्तमान काल तक) नोट (संदर्भ-संकेत) 1. कामता प्रसाद गुरुः “हिन्दी-व्याकरण,” नागरीप्रचारिणी सभा, काशी; प्रथम संस्करण संवत् 1977 (1920 ई.); षष्ठ पुनर्मुद्रण, संवत् 2017 (1960 ई.) । डॉ. वासुदेवनन्दन प्रसाद लिखते हैं-“पं. कामता प्रसाद गुरु का 'हिन्दी-व्याकरण' सन् 1920 ई. में प्रकाशित हुआ था ।