शान्ति पर्व sentence in Hindi
pronunciation: [ shaaneti perv ]
Examples
- ' कुरुक्षेत्र' में महाभारत के शान्ति पर्व के मूल कथानक का ढाँचा लेकर दिनकर ने युद्ध और शान्ति के विशद, गम्भीर और महत्त्वपूर्ण विषय पर अपने विचार भीष्म और युधिष्ठर के संलाप के रूप में प्रस्तुत किये हैं।
- ' कुरुक्षेत्र ' में महाभारत के शान्ति पर्व के मूल कथानक का ढाँचा लेकर दिनकर ने युद्ध और शान्ति के विशद, गम्भीर और महत्त्वपूर्ण विषय पर अपने विचार भीष्म और युधिष्ठर के संलाप के रूप में प्रस्तुत किये हैं।
- balloon title = “ महाभारत, शान्ति पर्व 14.11 ” style = color: blue > * / balloon > नैषधीयचरित महाकाव्य की प्रकाश टीका के रचयिता नारायण भट्ट ने कणाद और उलूक शब्दों को एक दूसरे का पर्यायवाची माना है।
- (महाभारत: शान्ति पर्व: 234) महाभारत के अनुशासन पर्व में सुदर्शन की कथा है जिसमें वह अपनी पत्नी ओघवती को गृहस्थाश्रम धम्र की मर्यादा समझाते हुए अतिथि को रमण के लिए प्रस्तुत होने की भी शिक्षा देता है.
- महाभारत के शान्ति पर्व में बताई गई अहम बातें साफ करती है कि भगवान मात्र धार्मिक क्रियाओं या विधियों से ही प्रसन्न नहीं होते है, बल्कि भगवान ऐसे भक्त को पाने के लिए स्वयं आतुर होते हैं, जिसका मन और विचार बेहद पवित्र होते हैं।
- तब शान्ति कैसे हो? तो समाधान क्या? जब तक संसार में वैदिक धर्म प्रतिपादित सच्ची शान्ति का प्रचार न किया जायेगा, तब तक संसार सुख समाधान से बिल्कुल नहीं बैठ सकेगा? महाभारत कें शान्ति पर्व में जिस धर्म का वर्णन आया है ।
- इन अयाचक ब्राह्मणों के पूर्वज प्रथम इसी प्रकार के पुरोहित, ऋत्विक् और मन्त्री भी थे जिससे इनका व्यवहार राजसी था, जैसा कि मनु वाक्यों द्वारा दिखा चुके हैं कि क्षत्रिय, राजा और राज पुरोहित राजस कहलाते हैं और शान्ति पर्व के 76 वें अध्याय में भी लिखा हैं कि:
- शान्ति पर्व में युद्ध की समाप्ति पर युधिष्ठिर का शोकाकुल होकर पश्चाताप करना, श्रीकृष्ण सहित सभी लोगों द्वारा उन्हें समझाना, युधिष्टिर का नगर प्रवेश और राज्याभिषेक, सबके साथ पितामह भीष्म के पास जाना, भीष्म के द्वारा श्रीकृष्ण की स्तुति, भीष्म द्वारा युधिष्ठिर के प्रश्नों का उत्तर तथा उन्हें राजधर्म, आपद्धर्म और मोक्षधर्म का उपदेश करना आदि वर्णित है।
- शान्ति पर्व में युद्ध की समाप्ति पर युधिष्ठिर का शोकाकुल होकर पश्चाताप करना, श्रीकृष्ण सहित सभी लोगों द्वारा उन्हें समझाना, युधिष्टिर का नगर प्रवेश और राज्याभिषेक, सबके साथ पितामह भीष्म के पास जाना, भीष्म के द्वारा श्रीकृष्ण की स्तुति, भीष्म द्वारा युधिष्ठिर के प्रश्नों का उत्तर तथा उन्हें राजधर्म, आपद्धर्म और मोक्षधर्म का उपदेश करना आदि वर्णित है।
- शान्ति पर्व में युद्ध की समाप्ति पर युधिष्ठिर का शोकाकुल होकर पश्चाताप करना, श्री कृष्ण सहित सभी लोगों द्वारा उन्हें समझाना, युधिष्ठिर का नगर प्रवेश और राज्याभिषेक, सबके साथ पितामह भीष्म के पास जाना, भीष्म के द्वारा श्रीकृष्ण की स्तुति, भीष्म द्वारा युधिष्ठिर के प्रश्नों का उत्तर तथा उन्हें राजधर्म, आपद्धर्म और मोक्षधर्म का उपदेश करना आदि वर्णित है।