रेल का टिकट sentence in Hindi
pronunciation: [ rel kaa tiket ]
"रेल का टिकट" meaning in English
Examples
- बहुत से बेचारे अपनी सारी जमा पूँजी समेट कर ‘ ममता की रेल का टिकट कटा भाग खड़े हुए! मगर जितने भागे थे उससे भी कई गुना ज्यादा ‘ यमुना की मार ' से तरबतर और आ गए.
- भदंत आनंद कौसल्यायन परिचय जन्म: 5 जनवरी 1905भाषा: हिंदीविधाएँ: निबंध निधन 22 जून 1988 हिंदी समय में भदंत आनंद कौसल्यायन की रचनाएँ निबंध रेल का टिकट लेखक सूची पर वापस जाएँ मुखपृष्ठ उपन्यास कहानी कविता व्यंग्य नाटक निबंध आलोचना विमर्श बाल साहित्य
- विदेशी महमान जब इन फटेहाल मजदूरों को देखेंगे! हमारी तो बस नाक कट जाएगी! सभी को तुरंत खेल गाँव से दफा होने को कहा गया-कुछ को तो शीला जी की दिल्ली पुलिस म्युन्स्पल गाड़ियों में भर भर कर रेल का टिकट कटा आई.
- लम्बी लम्बी लाईने लगी हैं, जैसे आम आदमी रेल का टिकट, बिजली / पानी / आयकर जमा करने की खिड़की पर घंटो खड़े रहते हैं आज भी इस प्रगति युग में, जब लोग चन्द्र मंगल से लेकर सारे अन्तरिक्ष की परिक्रमा कर रहे हैं!
- रेल का टिकट भी अगर बुक कराना है तो हम धड़ल्ले से हरी या लाल नोटों की आग से टीटी की जेब गरने में जरा भी नहीं हिचकते! ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए भी कतारों में लगने से बचने के लिए ये पत्तियां हमें फिर से बचा लेती हैं ।
- विदेशी महमान जब इन फटेहाल मजदूरों को देखेंगे! हमारी तो बस नाक कट जाएगी! सभी को तुरंत खेल गाँव से दफा होने को कहा गया-कुछ को तो शीला जी की दिल्ली पुलिस म्युन्स्पल गाड़ियों में भर भर कर रेल का टिकट कटा आई. बाकी को बड़े बड़े साईन बोर्डों की ओट में छुपा दिया-यह कलमाड़ी जी का आईडिया था.
- हरियाणा में जमीन कीमत 95 लाख रुपये सोनिया का दामाद यानि प्रियंका का पति होने का क्या मतलब होता है, यह रोबर्ट वडरा के जीवन शैली के स्तर से और उसकी आठ महीने की लगभग चालीस करोड़ की संपत्ति से साफ़ झलकता है, कुछ साल पहले जो व्यक्ति रेल का टिकट तक नहीं खरीद सकता था, आज बड़ी बड़ी लक्जरी कारों में शान से घूमता रहता है.
- पुराना ओवरकोट ही नहीं बल्कि पनीर का टुकड़ा, कॉफ़ी के प्याले का निशान, पुराने अखबार में लिपटे रस्क या फ़ेन, कुनीन की चौथाई गोली, शहद की शीशी का कॉर्क, हल्के बुखार की हरारत, सर में जमा कफ़, सीला हुआ तंबाकू, कमीज़ की जेब से धुलने के बाद निकला इस्तेमालशुदा रेल का टिकट, सेब के सूखे छिलके, गले सेब की गन्ध, पेंसिल को चाबने से पैदा रस यानि वो तमाम अहसासात जो मुझे महसूसते हैं ये साहित्य पढ़ते हुए ।