मूसर sentence in Hindi
pronunciation: [ muser ]
"मूसर" meaning in English "मूसर" meaning in Hindi
Examples
- दोस्त लोग के जिद में आकर हमको ई ब्लॉग फ्लॉग के चक्कर में पड़ना पड़ा. बाकी अब जब ओखली में माथा ढुकाइए दिए हैं, त देखेंगे कि केतना मूसर पड़ता है हमरा मूड़ी पर...
- हालांकि माहौल किस तरफ करवट लेता है वह आने वाला वक्प बतायेगा परन्तु कांग्रेस के बिरोध में ओछी मानसिकता के साथ किया जाने वाला पचार पसार उन्ही पत्याशियें के लिये सिर मूसर में धुसता दिखाई दे रहा है।
- परिवार की पुरखिन ताई को कुछ याद आ गया, आवाज़ लगाई, ' अरे, तनी मूसर तो लै आओ, बहुयें-बिटियां सब भूल जाती हैंगी.... ' किरन ने दोहराया, ' अरे हाँ मूसल..
- ' ' यह तो माई की आवा ज.... इतनी रात गये.... । '' '' हाँ, छोड़ो, हटो! बरसो बाद मिले भी तो दाल-भात में मूसर चंद! यहाँ रात भी अपनी नहीं हो पाती।
- दाल-भात में मूसर मारें और खाएं तरकारी, बिन बल्ला कौ किरकिट खेलें लंबी ठोकें पारी, गैल-गैल भाजै बनवारी ऊधौ देत सुपारी॥ कुछ और संवाद कथाएं संवेदनशील लेखक-पत्रकार रत्नेश कुमार रहने वाले बिहार के हैं और नौकरी गुवाहाटी में करते हैं।
- हरेक समाज और जाति कुछ दृढ़व्रती, संयमी और निर्भीक व्यक्तियों के त्याग और संयम के बल पर आज भी गौरवान्वित है, ‘ जब कांडी म मूंड़ दीन त मूसर से कउन डेरि ' उक्खान ऐसे ही जुझारू चरित्र को उजागर करता है।
- कृशि के करने के लिये तमाम हल खुरपे फावङे दराँती पंचा पचा थ्रेसर बखर पटेला नाल कुदाल गेंती गँडासा कुल्हाङी मूसर कोल्हू कंटर ओखली बिरबार बरमा सब्बल हँसिया पहसुल और इनकी पजाई धार धराई बेंट डलाई में लगता पैसा भी कर्ज से चलता है ।
- जब किसी से सहयोग और सहायता की अपेक्षा हो और वह हानि करने पर उतारू हो जाय तो स्थिति कुछ इस तरह बनती है कि‘ मांछी भगावे बैठारे और संगे खान लग ' यह तथ्य तो सभी जानते हं कि ‘ओखद कउं से आय, लुडिया सिलौटा तो गांव कोई लगत 'जहां,‘ सूज सी बारीकी और मूसर सोे भरा'हो वहंा तो ग़डबड़ ही है लेकिन ‘सब रात पीसौऔर पारे से उठाव 'कुछ अखरता है।
- जब किसी से सहयोग और सहायता की अपेक्षा हो और वह हानि करने पर उतारू हो जाय तो स्थिति कुछ इस तरह बनती है कि ‘ मांछी भगावे बैठारे और संगे खान लग ' यह तथ्य तो सभी जानते हं कि ‘ ओखद कउं से आय, लुडिया सिलौटा तो गांव कोई लगत ' जहां, ‘ सूज सी बारीकी और मूसर सोे भरा ' हो वहंा तो ग़डबड़ ही है लेकिन ‘ सब रात पीसौऔर पारे से उठाव ' कुछ अखरता है।
- बारिस में किसान की लडकियां जब कुछ समय के लिए कृषि कार्य से मुक् त होती हैं तो घर में आगामी व् यस् त दिनों के लिए पहले से ही धान से चांवल बनाने के लिए मूसर व ढेंकी से धान कुटती हैं उसे पछीनती निमारती है (साफ करती है), जतवा में गेहूं पीसती हैं इस कार्य में उन् हें कुछ देर हो जाती है और जब वे समय निकाल कर सामुहिक रूप से इकट्ठा होकर भोजली दाई के सामने जाती हैं और कुछ इस तरह से अपनी अभिव् यक्ति प्रस् तुत करती हैं:-