बेढब बनारसी sentence in Hindi
pronunciation: [ bedheb benaaresi ]
Examples
- भैयाजी बनारसी, चोंच बनारसी, बेढब बनारसी जैसे कई बनारसी आपको मिल जाएंगे, लेकिन हाथरस ने इस पटाक तख़ल्लुस या उपनामोपनाम रखने की परंपरा में कीर्तिमान स्थापित किया।
- कृष्णदेवप्रसाद गौड़ ‘ बेढब बनारसी ' के साथ रहते हुए वहीदा रहमान, वैजयंती माला, रागिनी व पद्मिनी (दक्षिण भारतीय अभिनेत्री-नृत्यांगना बहनें) को देखने-सुनने का मौका मिला.
- आपने ऐसे समय हास्य-व्यंग्य के क्षेत्र में अपनी जगह बनाई जब बनारस में ही बेढब बनारसी और भैया जी बनारसी जैसे उन्ही की विधा में लिखने वाले राष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध रचनाकार सक्रीय थे।
- बेढब बनारसी, काका हाथरसी, शैल चतुर्वेदी, प्रदीप चौबे, गोपालप्रसाद व्यास, अशोक चक्रधर, माणिक वर्मा, ओमप्रकाश आदित्य, गोविन्द व्यास जैसे कवियों ने एक ओर जहाँ श्रोताओं को गुदगुदाया और हँसाया है वहीं कुछ सोचने समझने को भी उकसाया है.
- प्रसिद्द व्यंग कवि ' बेढब बनारसी ' आजादी से पहले मिली अंग्रेज मेजर, “ लंफटट पिगलस ” की डायरी के माध्यम से लिखते हैं कि ' बनारस की सड़कें ऐसी हैं, जिनपर खेती की जा सकती है '!
- कृष्णदेव प्रसाद गौड़ जो ' बेढब बनारसी ' के उपनाम से लिखते थे, ने छायावादी युग की तथा उसके बाद के समसामयिक आचार-व्यवहार पर व्यंग्य और विनोद की एक अलग ही ढ़ग की काव्य-रचना की, जिसकी भाषा-शैली में एक अलग तरह की नवीनता थी।
- 1942 के त्रिमूर्ति के रूप में पाण्डेय बेचन शर्मा ‘ उग्र ', अन्नपूर्णानंद और रूद्र जी माहौल जमाते थे और आगे चलकर पंचमहाभूतों के रूप में बेढब बनारसी, रूद्र जी, काशिकेय, चोंच बनारसी और भैया जी बनारसी साहित्यिक हलचलों के केंद्र में होते थे।
- वो मान गया | पर माताश्री अड़ गयीं की १ ५ रुपये लगते हैं | मामला २ ० रुपये में सुलटा | फिर हमें दिव्यज्ञान मिल गया, ४ ० रुपये मेरे ट्राली बैग के थे | माताश्री ने बोला “ एक फटहा झोला साथ लिए होते तो १ ५ में भी आ जाते ” | सब श्रद्धा की बात है | बेढब बनारसी याद आ गए “
- उनकी यह भी थीसिस है कि साहित्य के अखाड़े में विवेकानन्द से लेकर प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, भगवतीचरण वर्मा, कमलेश्वर, दुष्यंत कुमार, श्रीकांत वर्मा, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, रघुपति सहाय ‘ फिराक गोरखपुरी ‘, रघुवीर सहाय, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, बेढब बनारसी, निर्मल वर्मा, प्रमोद वर्मा, हरिवंश राय बच्चन वगैरह भी कायस्थ कुलोद्भव होने के कारण कलम रगड़ने को अपना धर्म समझते रहे. इसलिए उन्हें लेखक मान लिया गया होगा.