बंकिम चंद्र चटर्जी sentence in Hindi
pronunciation: [ benkim chender chetreji ]
Examples
- पुण्यतिथि / बंकिम चंद्र चटर्जी भारत के राष्ट्र गान के रचनाकार स् व. बंकिम चंद्र चटर्जी (27.6.1838-8.4.1894) बंगला के प्रथम और सर्वाधिक पठित उपन्यासकार रहे हैं।
- गीता अमृत (सुदर्शन कुमार गोयल द्वारा हिन्दी में कविता रूप में अनुदित गीता के कुछ श्लोक), टैगोर की रचनाएँ मीरा, वन्दे मातरम् बंकिम चंद्र चटर्जी का लिखा देशभक्ति का गीत।
- सौमेन्द्र नाथ ठाकुर के अनुसार-‘‘ बंगाली काव्य जगत ने बंकिम चंद्र चटर्जी और रविन्द्र नाथ टैगोर की कविताओं के माध्यम से जो ऊंचाई प्राप्त की है, उसकी आधारशिला राजा राममोहन राय ने ही रखी थी।
- बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 1882 में लिखे गए इस महान गीत को तैयार करने में सोनू निगम, शंकर महोदवन, सुनिधि चौहान, शुभा मुद्गल, रूप कुमार राठौड़, महालक्ष्मी अय्यर, पलाश सेन और उनका बैंड ‘इंडियन ओशन' भी शामिल हैं.
- वंदे मातरम गीत के रूप में भारत को उसकी व्यापक राष्ट्रीयता की पहचान देने वाले महान बांग्ला उपन्यासकार बंकिम चंद्र चटर्जी न केवल बंगाल के चुनिंदा लेखकों में एक थे, बल्कि उन्हें भारतीय अंग्रेजी साहित्य की शुरुआत का भी श्रेय जाता है।
- वंदे मातरम गीत के रूप में भारत को उसकी व्यापक राष्ट्रीयता की पहचान देने वाले महान बांग्ला उपन्यासकार बंकिम चंद्र चटर्जी न केवल बंगाल के चुनिंदा लेखकों में एक थे, बल्कि उन्हें भारतीय अंग्रेजी साहित्य की शुरुआत का भी श्रेय जाता है।
- अंग्रेज़ों के इस आदेश से बंकिम चंद्र चटर्जी को जो तब एक सरकारी अधिकारी थे, बहुत ठेस पहुँची और उन्होंने संभवत 1876 में इसके विकल्प के तौर पर संस्कृत और बांग्ला के मिश्रण से एक नए गीत की रचना की और उसका शीर्षक दिया-“वंदे मातरम”।
- 1882 मे भारत के क्रांतिकारी जिनका नाम था बंकिम चंद्र चटर्जी उन्होने एक गीत लिखा था जिसका नाम था वन्देमातरम! तो इस गीत को गाने पर अंग्रेज़ो ने प्रतिबंद लगा दिया! और गीत गाने वालों को जेल मे डालने का फरमान जारी कर दिया! तो इन दोनों बातों के कारण लोगो मे अंग्रेज़ो के प्रति बहुत भय आ गया था!!
- बंकिम चंद्र चटर्जी के अलावा अन्य कवियों ने भी स्वतन्त्रता की लड़ाई में अपनी लेखनी को तलवार की तरह इस्तेमाल किया है. लोगों के सोये स्वाभिमान को जगाने के लिये वह लिखते है....“निज भाषा, निज गौरव, देश पर जिसे अभिमान नही, नर नहीं वह पशु है, जिसको स्वदेश से प्यार नहीं”.राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने तो संपूर्ण देश में राष्ट्रीयता की भावना ही भर दी थी.
- आनद मठ उपन्यास बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा था अँग्रेजी सरकार के विरोध मे और उन राजा महाराजाओ के विरोध मे जो किसी भी संप्रदाय के हो लेकिन अँग्रेजी सरकार को सहयोग करते थे! फिर उसमे उन्होने बगावत की भूमिका लिखी कि अब बगावत होनी चाहिए! विरोध होना चाहिए ताकि इस अँग्रेजी सत्ता को हम पलट सके! और इस तरह वन्देमातरम को सार्वजनिक गान बनना चाहिए ये उन्होने घोषित किया!