गैंदा sentence in Hindi
pronunciation: [ gaainedaa ]
Examples
- गोरखपुर गन्ना कृषक आंदोलन से उभरे बड़े नेता बाबू गैंदा सिंह, सन् 1935 के ईख संघ के सचिव, बाबू अक्षैबर सिंह, ट्रेड यूनियन नेता और गोरखपुर के गन्ना-शाह, संविधान सभा के सदस्य और सांसद-शिब्बनलाल सक्सेना।
- ज्ञात हो कि बुधवार को रेखाबाई पत्नी गैंदा लाल ने जिला अस्पताल के प्रसूता वार्ड के बाहर ही एक बच्ची को जन्म दिया था मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने उस समय ड्यूटी पर मौजूद लापरवाह नर्सों को निलंबित कर जाँच के आदेश दिये हैं।
- हैण्ड पम्प से पानी भर टायलेट जाता अभिषेक फोन पर अटका हुआ, गाय बछड़े को जन्म देती हुई और उससे जुड़ी हमारी अंधविश्वासी धार्मिक आस्था, पाँच साल से सूखी तुलसी फिर एकाएक हरी भरी होती, कबूतर बाजी, गैंदा फूल ससुराल और फिर वही, जलेबी अछूत लड़की जिसे हर किसी में छूने की ललक.
- सर्वश्रेष्ठ गीत वो होता है जिसका नशा पूरे साल न टूटे, मेरी नज़र में इस वर्ष ऐसा एक ही गीत रहा जिसने बच्चों बूढों और जवानों, शहरों, गाँवो और विदेशों में भी एक सी धूम मचाई, वो है दिल्ली ६ का “ गैंदा फूल ”, मैं इस गीत को सर्वश्रेष्ठ गीत में नामांकित करना चाहूँगा.
- हैण्ड पम्प से पानी भर टायलेट जाता अभिषेक फोन पर अटका हुआ, गाय बछड़े को जन्म देती हुई और उससे जुड़ी हमारी अंधविश्वासी धार्मिक आस्था, पाँच साल से सूखी तुलसी फिर एकाएक हरी भरी होती, कबूतर बाजी, गैंदा फूल ससुराल और फिर वही, जलेबी अछूत लड़की जिसे हर किसी में छूने की ललक. जाने क्या क्या.
- बेला शिंदे ने “ सू छे ” से प्रभावित किया पर मेरा नामाकन पाने में सफल रही रेखा भारद्वाज अपने गीत “ गैंदा फूल ” के लिए, वैसे रेखा ने इस वर्ष “ उम्मीद कोई ” (फ़िराक) और “ रात के ढाई बजे ” (कमीने) में भी अपनी आवाज़ दी, पर गैंदा फूल में वो बस कमाल साबित हुई है.
- बेला शिंदे ने “ सू छे ” से प्रभावित किया पर मेरा नामाकन पाने में सफल रही रेखा भारद्वाज अपने गीत “ गैंदा फूल ” के लिए, वैसे रेखा ने इस वर्ष “ उम्मीद कोई ” (फ़िराक) और “ रात के ढाई बजे ” (कमीने) में भी अपनी आवाज़ दी, पर गैंदा फूल में वो बस कमाल साबित हुई है.
- है जलवा-ए-तन से दर-ओ-दीवार बसंती पोशाक जो पहने है मेरा यार बसंती गैंदा है खिला बाग़ में मैदान में सरसों सहरा वो बसंती है ये गुलज़ार बसंती गैंदों के दरख़तों में नुमाया नहीं गेंदे हर शाख़ सर पे है ये दस्तार बसंती मुंह ज़र्द दुप्पट्टे के आंचल में ना छुपाओ हो जाए ना रंग-ए-गुल-ए-रुख़सार बसंती फिरती है मेरे शौक़ पे रंग की पोशाक ऊदी, अगरी चंपई गुलनार बसंती है लुत्फ़ हसीनों की दो रंगी का 'अमानत' दो चार गुलाबी हों तो दो चार बसंती-अमानत लखनवी पूछने हैं तुमसे कुछ सवाल दोस्तों (गणतन्त्र-दिवस पर)