औद्योगिक विवाद अधिनियम sentence in Hindi
pronunciation: [ audeyogaik vivaad adhiniyem ]
Examples
- बंगाल चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष हर्ष झा ने कहा कि मानेसर के दोषियों पर आपराधिक क़ानून के तहत मुकदमा चलना चाहिए और इसे औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत नहीं देखा जाना चाहिए।
- भारत में औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 छंटनी द्वारा, प्रतिष्ठानों को बंद करके, अधिक स्टाफ में कमी करने के मामले में नियोजकों पर प्रतिबंध लगाता है और छंटनी प्रक्रिया में बहुत वैधताएं और जटिल प्रक्रियाएं अंतर्निहित हैं।
- स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ श्रमिक आंदोलन भी नया रूप लेता जा रहा था पहले प्रांतीय स्तर पर मुम्बई में औद्योगिक विवाद अधिनियम आया तथा मध्य भारत में मी बाद में अलग से अधिनियम बनाया गया.
- याचिका में कहा गया कि यह विवाद पूरी तरह से औद्योगिक विवाद अधिनियम के प्रावधानों के तहत औद्योगिक विवाद की परिभाषा के दायरे में आता है और अदालत को इससे संबंधित याचिका पर सुनवाई का अधिकार नहीं है।
- अनुमान लगाया जाता है कि इन मजदूरों का बड़ा हिस्सा ऐसे कारोबारों में काम करता है, जिनमें मजदूरों की संख्या, औद्योगिक विवाद अधिनियम या फैक्ट्री अधिनियम के दायरे में आने के लिए निर्धारित संख्या से कम है।
- बहुत से पत्रकारों को यह नहीं पता है कि उनके लिए बना एकमात्र कानून ' वर्किंग जर्नलिस्ट्स एक् ट ' लगभग पूरी तरह औद्योगिक विवाद अधिनियम (1947) और ट्रेड यूनियन अधिनियम (1926) पर आधारित है।
- मौजूदा औद्योगिक विवाद अधिनियम के अनुसार अगर किसी कारख़ाने में 100 से ज़्यादा मज़दूर हैं तो उसे बन्द करने से पहले मालिक को सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है, मुआवज़ा देना पड़ता है, कई औपचारिकताएँ निभानी पड़ती हैं।
- भारत में औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 छंटनी द्वारा, प्रतिष् ठानों को बंद करके, अधिक स् टाफ में कमी करने के मामले में नियोजकों पर प्रतिबंध लगाता है और छंटनी प्रक्रिया में बहुत वैधताएं और जटिल प्रक्रियाएं अंतर्निहित हैं।
- क. विधानसभा के अनुमोदन और भारत सरकार की सहमति के अध्यधीन, औद्योगिक विवाद अधिनियम को इसके अध्याय 5-बी की अनुप्रयोज्यता को वर्तमान में 100 श्रमिकों के स्थान पर 300 अथवा अधिक श्रमिकों वाले उद्योगों तक सीमित करने के लिए संशोधित किया जाएगा।
- कोलकाता, नोएडा (उत्तर प्रदेश), मुम्बई, हैदराबाद, चेर्लापल्ली (रंगारेड्डी) स्थित भारतीय टकसालों में सेवाओं को औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के अंर्तगत तत्काल से अगले छह महीनों के लिए जनोपयोगी सेवा घोषित कर दिया गया है।