अवगुंठित sentence in Hindi
pronunciation: [ avegaunethit ]
"अवगुंठित" meaning in Hindi
Examples
- वे बहुत सरलता से ब्लॉग जगत पर नए किस्से, नए मुहावरे और नई उपमाएं गढ़ जाते हैं और उन्हें अपनी रचनात्मकता के साथ इस तरह अवगुंठित करते हैं कि कहीं सब कुछ बहुत स्वाभाविक, प्राकृतिक और पूर्व-प्रचलित सा महसूस होता है।
- मिडिया चिकित्सक या किसी भी क्षेत्र में कार्यरत नारी अपने पुरुष सहकर्मियों से आगे निकल कर श्रेष्ठ साबित होती है तो वो ही पुरुष मन अवगुंठित विरोध करने लगता है जो खुद कभी उसें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता था..
- वे बहुत सरलता से ब्लॉग जगत पर नए किस्से, नए मुहावरे और नई उपमाएं गढ़ जाते हैं और उन्हें अपनी रचनात्मकता के साथ इस तरह अवगुंठित करते हैं कि कहीं सब कुछ बहुत स्वाभाविक, प्राकृतिक और पूर्व-प्रचलित सा महसूस होता है।
- इस समस्या को कम करने के लिए, ऑस्ट्रेलिया ने एरियल बंडल्ड कंडक्टर्स (विद्युत्-ग्राहकीय अवगुंठित चालक) का उपयोग आरम्भ कर दिया है, जिसमे तीन चरण (फेज़) के तार को जमीन (अर्थ) के तार के साथ इंसुलेटेड कर फिर से एक साथ लपेट दिया जाता है.
- इस समस्या को कम करने के लिए, ऑस्ट्रेलिया ने एरियल बंडल्ड कंडक्टर्स (विद्युत्-ग्राहकीय अवगुंठित चालक) का उपयोग आरम्भ कर दिया है, जिसमे तीन चरण (फेज़) के तार को जमीन (अर्थ) के तार के साथ इंसुलेटेड कर फिर से एक साथ लपेट दिया जाता है.
- मैं शांत और सरल दिखना चाहता हूँ; मैं एक प्रेम गीत लिखना चाहता हूँ, ऐसा भी नहीं कि शब्द नहीं हैं मेरे पास शब्दकोष से मैंने चुन रखा है स्पर्श, आलिंगन और मनुहार जैसे शब्द, जो प्रेमगीत में अवगुंठित हो निश्चय ही, करेंगे सबको निःशब्द.
- जिन सौभाग्या को प्रकाश अर्श की संवेदनाओंपगी ग़ज़ल समर्पित है वो तो अवश्य ही प्रमुग्ध हों, मग़र उत्फुल्ल तो हमसभी हुए हैं, हर तरह से...! इस शुभ-सूचना के अवगुंठित स्वरूप को साझा करने के लिये पंकजभाईजी को सादर धन्यवा द.
- सही व्यंग्य रचना अपने कथ्य के द्वारा उस सत्य को बेपरदा करती है, जो समाज में एक पाप की तरह अवगुंठित रहता है व्यंग्यकार एक शल्य चिकित्सक की तरह काम करता है, ताकि बीमारी का उपचार हो सके, राजनीति और समाज की अनेक असंगत एवं बीमार प्रवृतियाँ विकसित हो रही हैं।
- मानव-प्रेम की असफलता का एक यही उदाहरण मैंने देखा था, उसी पर क्यों अपना चित्त स्थिर किये हूँ? वे जो इतनी आच्छादित, अवगुंठित, अलंकृत चपलाएँ वहाँ आती थीं और सहज स्वभाव से या कभी-कभी सम्भ्रम से मेरे सिन्दूर-तिलक लगाती और मेरा आलिंगन कर लेती थीं, उनके प्रणय तो सभी सुखमय हो होंगे, उनका प्रेम तो इतना विमूढ़ और विवेकहीन नहीं होता होगा? और फिर मानवों का तो प्रेम के विषय में आत्मनिर्णय करने का अधिकार होता है?