मूंठ sentence in Hindi
pronunciation: [ muneth ]
"मूंठ" meaning in English
Examples
- इसमें विभिन्न रंगों व आकारों वाली तराशी हुई मूंठ वाकी तलवारें भी हैं, जिनमें से कई मीनाकारी के जड़ऊ काम व जवाहरातों से अलंकृत है तथा शानदार जड़ी हुई म्यानों से युक्त हैं।
- इसी कविता में मसान सिद्धि, मूंठ मारना, टोटके आदि के बीच एक तरफ संस्कृति के मुख पर मनुष्य अस्थियों की राख का विकट प्रश्न है तो दूसरी तरफ सराफा बाजार में सट्टे का धंधा है।
- पर जिस तरह से आग्रह होता है वो गलत है. कम से कम अगला शुरु मे झूंठ मूंठ ही यह भी लिख दे कि आपका लेख बहुत अच्छा लगा, आप मेरा पढ कर भी अपने विचार व्यक्त करें तो बात कुछ सुंदर हो जायेगी.
- अगर मैं बना सकता शब्दों को चाकू और खरज की आवाज़ से गढ़ सकता मजबूत मूंठ तो पीछे से बाँहों में भरता हुआ तुम्हारे कान में टूटे पत्तों के हल्के शोर सा बजने लगता आई लव यू... आई लव यू... आई लव यू...
- पर नाटक देखते हुए लग रहा था कि घर के मुखिया भास्कर के हाथ में एक चांदी की मूंठ वाली छड़ी हो सकती थी, या नहीं भी हो सकती थी, क्योंकि नाटक के परिवेश में क्षरित होते सामंती जीवन-मूल्यों की कसक तो थी, चांदी की मूंठ वाली ज़मींदाराना ठसक नहीं थी।
- पर नाटक देखते हुए लग रहा था कि घर के मुखिया भास्कर के हाथ में एक चांदी की मूंठ वाली छड़ी हो सकती थी, या नहीं भी हो सकती थी, क्योंकि नाटक के परिवेश में क्षरित होते सामंती जीवन-मूल्यों की कसक तो थी, चांदी की मूंठ वाली ज़मींदाराना ठसक नहीं थी।
- यहां कम से कम बुढिया को तो ये मालुम है कि सूई अंदर गिरी है पर अंदर (मन) अंधेरा है, फ़िर झूंठ मूंठ ही सही, सूई (प्रभु) को खोजने के प्रयत्न में तो लगी है, शायद है ढूंढते ढूंढ्ते कभी बाहर से अंदर भी पहुंच जाये.
- कोठे पे पहुँच के शाम-ढले दस्तूर के मुताबिक जब करीम वो ही शेर की मूंठ वाला चाकू लेकर उसके कमरे में पहुंचा तो वो खोली के भीतर लगा बडा-सा जाला झाडू से झाडने में जुटी थी उसकी तरफ एक नजर देख के उसने आँखे घुमा लीं थी और फिर अपने काम में जुट गई थी ।
- जीवन के वैविध्य के चित्र उकेरना कुछ इस तरह है, जैसे एक अनाड़ी, दर्जी आड़ी, तिरछी, बेहिसाब लम्बी और बौनी परछाईयों के माप से, सिलता रहे कपड़े या फ़िर एक अकेला चरवाहा किसी पहाड़ की मूंठ से अपनी ही प्रतिध्वनी की गूंज मे बुनता रहे भ्रम और नकारता रहे जीवन का इकहरापन,
- इसके पाठ के साथ ही एक दृश्य खुलने लगता है और जमीन में खुंपे, ढेलों को पलट पलट देते हल की मूंठ पर थमी हथेली और बैलों को हांकती आवाजों के साथ खेत को उपजाऊ बनाने में जुटे किसान के चेहरे से उत्कट मानवीय इच्छा रूपी पसीने को बहते देखा जा सकना संभव हो रहा होता है।