मज़ाक कर रहे हो sentence in Hindi
pronunciation: [ mejak ker rh ho ]
"मज़ाक कर रहे हो" meaning in English
Examples
- ' ' बिहारी-'' चुप रहो! तुम यहाँ हँस-हँसकर मुझसे मज़ाक कर रहे हो और वहाँ तुम्हारी आशा तुम्हारे कमरों में रोती फिर रही है।
- “ मंत्री गुस्से में बोला, ” मज़ाक कर रहे हो? ” यदि संन्यासी को इतने रुपए दे दिए तब तो राजकोष खाली हो जाएगा।
- मैं ये क्या देख-सुन रहा हूँ ललित..? कई बार तुम मज़ाक करते हो, इसलिए समझ में नहीं आ रहा कि तुम इस बार मज़ाक कर रहे हो या गंभीर हो..
- क्या बात है भाई इतने दिन के बाद चुप्पी तोड़ी तो हक़ीकत लिखा डाली...भाई हम भले मज़ाक कर रहे हो पर इतनी बढ़िया भाव व्यक्त करने के लिए कुछ ना कुछ ज़ज्बात को होना ज़रूर पाया जाता है..
- यार ये बतओ आतंकवाद से वाट लगा रखी है तुम बोल रहे हो कि कुछ नही बिगाड सकता! मज़ाक कर रहे हो क्या तुम ये बोलो कि हम लोग अपने भ्रष्ट नेतओ का कुछ नही बिगाड सकते है
- नम्रता … शिष्टचार … सभ्याचार … क्या मज़ाक कर रहे हो दोस्त? बिलकुल नहीं! इनको इन सब की कोई परवाह नहीं … ये बातें अनजानी बातें हैं … महज़ किसी भी पाठ्यक्रम की बातें … और इनके लिए सदैव ये ऐसी ही रहेंगी।
- अतानुः ब्लॉग से भारत का परिवर्तन? मज़ाक कर रहे हो? भारत को कोई बदल नहीं सकता और कम से कम इन मुठ्ठी भर बेवकुफ़ाना चिट्ठों से, जिनके लेखकों को जिंदगी जीने की और जिनके पाठकों को घुमक्कड़ी की सख्त दरकार है, उम्मीद करना बेमानी है।
- अब तो उनके कान खड़े हो गए क्यों कि उन्हों ने अपने बुद्धिमानों का अपमान होते देखा और अपने पूर्वजों के प्रति अप्रिय शब्द सुने तो घबरा गए और कहने लगेः “ इब्राहीम! क्या वास्तव में तुम ठीक कह रहे हो या मज़ाक कर रहे हो, हमने ऐसी बात कभी नहीं सुनी ”? ।
- गढ़ा और शेरे में अंतर नही जनता तो तू कैसा डाइरेक्टर है / ऐसा करते है तुम सब को ज़दू लगाने भेज देते है ओर जो पागल हो चुके है है उनेह डाइरेक्टर बना देते है शाएेद वो तुमसे अछा फिल्म बना दे /बाघ देश का प्रतीक है वो ख़त्म होने वेल है सारी दुनिया को चिंता है तुम मज़ाक कर रहे हो कल तुम कहोगे कूटे बचो,मुर्गी वो कैसे वो तो तुम रोज़ मुहन खोल खोल कर खाते होगे
- जिश मुर्खजी ने कलम रखी तो सुझाव दिया, ” ब्राउज़र के बाहर भी एक दुनिया है, उसका ज़ायका लो ” भारतीय समाज पर ब्लॉग के असर के प्रश्न पर अर्थशास्त्री और ब्लॉगर अतानु दे कह उठे, “ मज़ाक कर रहे हो क्या! भारत को कौन बदल सकता है? ” ये नाकारात्मक रूख मेरी इस भावना को बलवती करते रहे हैं कि चिट्ठाकार मूलतः अपने मेट्रिक्स में कैद आत्ममुग्ध अंर्तमुखी लेखक ही हैं बस, वे शायद समाज के सत्य से रूबरू ही नहीं होना चाहते।