कुलदीप जैन sentence in Hindi
pronunciation: [ kuledip jain ]
Examples
- [शेष आगामी अंक में ………] जीवन से रस लेती है लघुकथा/ डॉ॰ कमल किशोर गोयनका [दोस्तो, 1990 में लघुकथाकार कुलदीप जैन ने लघुकथा संकलन ‘अलाव फूँकते हुए' का संपादन किया था।
- कुलदीप जैन की क्षमता इस अर्थ में अधिक लेनी चाहिए कि उनका चुनाव किसी विचारधारा अथवा दुराग्रह से परे एक ऐसी अभिव्यक्ति पर आधारित है जिसकी संप्रेषणीयता जीवन संदर्भों के सापेक्ष भिन्न-भिन्न है।
- मैं तुम्हारी कुछ-और लघुकथाओं पर भी चर्चा करना चाहता था तथा कुलदीप जैन एवं सुकेश साहनी की रचनात्मकता पर भी लिखना चाहता था, परन्तु मैंने कलम न रोकी तो रेल छूट जायेगी।
- दोस्तो, इसी सप्ताह की 23 तारीख को मैंने कुलदीप जैन द्वारा संपादित लघुकथा संकलन ‘अलाव फूँकते हुए' में संकलित मेरी लघुकथाओं पर डॉ॰ कमल किशोर गोयनका द्वारा लिखित पत्रात्मक आलोचना को प्रस्तुत किया था।
- दोस्तो, इसी सप्ताह की 23 तारीख को मैंने कुलदीप जैन द्वारा संपादित लघुकथा संकलन ‘ अलाव फूँकते हुए ' में संकलित मेरी लघुकथाओं पर डॉ॰ कमल किशोर गोयनका द्वारा लिखित पत्रात्मक आलोचना को प्रस्तुत किया था।
- दकानदार सुरजमल खत्री, संतोष कुमार आर्य, वेद प्रकाश आर्य, बनवारी लाल गुप्ता, भीमसेन सिंगल, संजीव गोयल, सत्य टे्रडिंग कंपनी के संचालक, कुलदीप जैन सहित अन्य दुकानदारों ने डा. अजय सिंह चौटाला व राजेश गोदारा के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं।
- इस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री कुलदीप जैन, उपायुक्त डा. जे. गणेसन, पुलिस अधीक्षक श्री सौरभ सिंह, उपमंडलाधिकारी (ना) श्री संतलाल पचार, नगराधीश श्री प्रेम चंद, पूर्व जिला कांग्रेस प्रधान होशियारी लाल शर्मा, व अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
- आक्रोश व्यक्त करने वालों में अजीत प्रकाश जैन, प्रमोद जैन, सुमन जैन कन्नी, आशुतोष जैन, गुलाबचन्द्र जैन, विपिन जैन, राकेश जैन सेठी, पवन जैन, पीकेलाल जैन, यतेन्द्र जैन, कुलदीप जैन, हर्ष जैन, अरुण जैन, विशाल जैन, राजेश जैन, पदमचंद जैन, जियालाल जैन, सुकुमाल जैन आदि प्रमुख थे।
- लघुकथा के नाम पर राजधानी में संभवत: यह पहली विचार गोष्ठी थी, जिसमें नरेंद्र कोहली, विष्णु प्रभाकर, जानकीप्रसाद शर्मा, दिनेश शाकुल, प्रेम जनमेजय, रमेश उपाध्याय, डॉ. महीपसिंह, द्रोणवीर कोहली, डॉ. विनय, डॉ. हरदयाल के सान्निध्य में महावीर प्रसाद जैन, जगदीश कश्यप, रमेश बतरा, कुलदीप जैन, डॉ. जगदीश चंद्रिकेश सहित कई और साहित्यकार उपस्थित थे।
- इसी तारतम्य में कविता के टुकड़े जैसे कुछ लघुकथाओं के शीर्षक दृष्टव्य हैं कागज का आदमी / कमलेश भारतीय, चढ़ता हुआ जहर / विभारश्मि, नागफनी के फूल / कुलदीप जैन, पीले हाथों के लिए / कमल चोपड़ा, चेहरे सुबह के / राजकुमार गौतम, बड़ी मछली का आहार / विक्रमसोनी, मृगजल / बलराम, मुलाकातों के रंग / मोहन राजेश, छोटे बड़े हरे टुकड़े / राजा नरेन्द्र, विध गया सो मोती / विष्णुप्रभाकर, युग सूर्य / पूरन मुदगल।