कुंअर बेचैन sentence in Hindi
pronunciation: [ kunar bechain ]
Examples
- कुंअर बेचैन जी के अनुसार ” ग़ज़ल में शेरों की संख्या विषम अर्थात दो की संख्या से न कटने वाल होनी चाहि ए. जैसे-5,7,9,11 आदि,.
- डॉ कुंअर बेचैन का शेर भी इसी सच्चाई को सामने रखता है-इन दुखों के कैदखानों में भी बस चलते रहो है अभी दीवार, आगे खिड़कियाँ भी आ जायेंगी.
- इस अवसर पर डॉ हरिओम पंवार, सरिता शर्मा, डॉ कुंअर बेचैन और डॉ सुरेन्द्र दुबे सहित कई जाने माने कवि, पत्रकार और साहित्य प्रेमियों की गरीमामयी उपस्थिति रही.
- * कुंअर बेचैन 1 जुलाई 1942 सरस व भावपूर्ण गीत व ग़ज़लों से मंच पर छा जाने वाले कुंअर बेचैन का आज देश-विदेश दोनों ही जगह तहे दिल से स्वागत किया जाता है।
- * कुंअर बेचैन 1 जुलाई 1942 सरस व भावपूर्ण गीत व ग़ज़लों से मंच पर छा जाने वाले कुंअर बेचैन का आज देश-विदेश दोनों ही जगह तहे दिल से स्वागत किया जाता है।
- पदम् श्री गोपाल दास ' नीरज ' कहते हैं “ ' कुंअर बेचैन ' ग़ज़ल कहने और लिखने वालों में सबसे अधिक ताज़े, सबसे अधिक सजग और सबसे अधिक अनुपम ग़ज़लकार हैं. ”
- कवि सम्मेलन अब अपने पूरे शबाब पर था और इस संध्या के सबसे बड़े आकषॅण थे गीतकार-कवि-शायर डॉ. कुंअर बेचैन, जिन्हें सुनने के लिए श्रोता दिल थामे, शॉल-जैकेट में दुबके बैठे थे।
- उसके उपलक्ष में प्रसिद्ध कवि ‘डॉ. कुंअर बेचैन' जी की ‘मां' पर लिखी एक कविता-‘मां' डॉ. कुंअर बेचैन कभी उफनती हुई नदी हो, कभी नदी का उतार हो मां रहो किसी भी दिशा-दिशा में,...
- उसके उपलक्ष में प्रसिद्ध कवि ‘डॉ. कुंअर बेचैन' जी की ‘मां' पर लिखी एक कविता-‘मां' डॉ. कुंअर बेचैन कभी उफनती हुई नदी हो, कभी नदी का उतार हो मां रहो किसी भी दिशा-दिशा में,
- हिन्दी ग़ज़ल और दोहा हिन्दी ग़ज़ल और दोहा विषय पर आयोजित दूसरे सत्र में प्रख्यात ग़ज़लकार कुंअर बेचैन ने कहा कि चीजें अच्छी भी बनती हैं और बुरी भी किन्तु परिपक्वता ही रचना को कालजयी बनाती है।