लोक क्रांति sentence in Hindi
pronunciation: [ lok keraaneti ]
"लोक क्रांति" meaning in English
Examples
- लोक क्रांति मोर्चा में शामिल पीस पार्टी पूर्व में राम बिलास पासवान के नेतृत्व वाली लोजश व भारतीय समाज पार्टी के साथ मिलकर रैलियां कर चुकी है।
- रालोद की अगुवाई में सात दलों से मिलकर बने लोक क्रांति मोर्चे में वही सब दल शामिल हैं जो इससे पूर्व बने कई मोचरे में शामिल रहे।
- पीस पार्टी, इंडियन जस्टिस पार्टी और जनवादी पार्टी को लेकर उन्होंने लोक क्रांति मोर्चा बनाने का एलान किया, लेकिन पिपराइच विधानसभा उपचुनाव में यह बिखर गया।
- गौरतलब है कि राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख अजीत सिंह के नेतृत्व में गत् वर्ष प्रदेश में एक राज्यस्तरीय गठबंधन ' लोक क्रांति मोर्चा ' के नाम से गठित किया गया था।
- गौरतलब है कि किसी भी कला के दो मुख्य प्रयोजन हो सकते हैं-एक, शुद्ध मनोरंजन और दूसरा वैचारिक जागरूकता, लोक क्रांति सघन संवेदनात्मकता जहाँ कलम को हथियार बन जाना होता है!
- गौरतलब है कि किसी भी कला के दो मुख्य प्रयोजन हो सकते हैं एक, शुद्ध मनोरंजन और दूसरा वैचारिक जागरूकता, लोक क्रांति सघन संवेदनात्मकता जहाँ कलम को हथियार बन जाना होता है!!..
- यहां बात अन्ना हजारे की लोक क्रांति की है जो जनलोकपाल बिल को लेकर है, लेकिन मैं इस क्रांति की सफलता और असफलता से इतर (इसके निहितार्थों) की बात कर रहा हूं जो देश की कूटनीति के लिये बड़े मायने रखती है।
- लॉ की पढाई बीच में छोड़ माननीय श्री अशोक भगत से प्रभावित होकर झारखण्ड के तत्कालीन रक्षित बिहार के पठारी गुमला के जिलों में वनवासियों के बीच सेवा कार्यों में तीन वर्ष कार्य एवं अध्यनों परान्त परिवर्तन क्रांति की आग को लोक क्रांति का बोध हुआ जो आजीवन जीवन साधना की प्रेरणा बन गया।
- 1919 में हुये जलियावाला बाग हत्याकाण्ड से करीब छह साल पहले 17 नवम्बर 1913 को मानगढ़ पहाड़ी पर हुआ क्रूर, बर्बर एवं दिल-दहला देने वाला नरसंहार भले ही इतिहास में अपेक्षित स्थान प्राप्त नहीं कर पाया, मगर राजस्थान गुजरात और मध्यप्रदेश के इस सरहदी दक्षिणी अंचल के लाखों लोगों में स्वाभिमान एवं देश-प्रेम जागृत करने वाले लोक क्रांति के प्रणेता गोविन्द गुरू के प्रति आज भी आदर और आस्था कायम है।
- (स्थापित दलों को छोड़ दिया जाये तो) संभवतः वक़्त की नब्ज़ टटोलते हिन्दी नाट्य लेखक/निर्देशकों को हिन्दी कहानियों में अधिक विस्तार दिख रहा है, नतीजतन उत्साही निर्देशकों के सामने दो ही रस्ते बचते हैं, या तो वो ‘'स्कंदगुप्त, अंधायुग''से लेकर ‘'सूर्य की अंतिम किरण......या ‘'कथा एक कंस की''जैसे पुराने प्रख्यात बहुआयामी लोक क्रांति के नाटक खेलें (दोहराव करें) या फिर किसी अनूदित नाटक या किसी कहानी/लोक कथा आदि का नाट्य रूपांतरण कर उसे मंचित करें!!