अन्तरराष्ट्रीय राजनीति sentence in Hindi
pronunciation: [ anetreraasetriy raajeniti ]
Examples
- पि छले लगभग 50 बरसों से तो बहुत हद तक अन्तरराष्ट्रीय राजनीति भी पश्चिम एशियाई देशों की करवट के साथ बदलती रही है।
- सामरिक दृष्टि से देखें तो मई 1998 में भाजपा की एनडीए गठबंधन की सरकार ने परमाणु विस्फोट करके अन्तरराष्ट्रीय राजनीति के मूलस्वरूप को ही बदल दिया।
- इसके अलावा गेंद को पाकिस्तान के पाले में फेंक देने का जबर्दस्त फायदा अन्तरराष्ट्रीय राजनीति में भी मिला | दुनिया के प्रमुख नेताओं ने अक्षरधाम-कांड की भर्त्सना की और उसे कश्मीर से भी जोड़ा | एक पत्थर से कई शिकार हुए |
- पिछले हफ्ते ब्रातिस्लावा में हुई जॉर्ज बुश और व्लादिमीर पूतिन की मुलाकात यदि असफल हो जाती तो अन्तरराष्ट्रीय राजनीति में काफी खलल पैदा हो सकता था| उसका असर सिर्फ मध्य एशिया के पुराने सोवियत गणतंत्रों पर ही नहीं पड़ता, ईरान, अफगानिस्तान, एराक़ और फलस्तीन जैसे मुद्दे भी प्रभावित [...]
- (यहाँ स्वार्थ और हितों में अन्तर है, अन्तरराष्ट्रीय राजनीति पुरी तरह हितों का ही खेल है, लेकिन अमेरिकी राजनीति पुरी तरह स्वार्थों से ही संचालित होती है) अब हमें इस मुगालते से भी बाहर आ जाना चाहिए की उसने भारत से परमाणु समझोता इसलिए किया कि हमे इसकी जरुरत है....
- पहले खोदोरकोवस्की के साथ जो समझौता होना था, अब रूसी सरकार के साथ होगा | लोकतंत्र बड़ा सिद्घ हुआ कि तेल? अमेरिका ने रूसी लोकतंत्र की बजाय रूसी तेल को ज्यादा महत्व दिया है | इससे यह भी सिद्घ हुआ कि अन्तरराष्ट्रीय राजनीति में सिद्घांतों की बजाय राष्ट्रीय हितों का महत्व कहीं अधिक होता है |
- Nav Bharat Times, 3 March 2005: पिछले हफ्ते ब्रातिस्लावा में हुई जॉर्ज बुश और व्लादिमीर पूतिन की मुलाकात यदि असफल हो जाती तो अन्तरराष्ट्रीय राजनीति में काफी खलल पैदा हो सकता था | उसका असर सिर्फ मध्य एशिया के पुराने सोवियत गणतंत्रों पर ही नहीं पड़ता, ईरान, अफगानिस्तान, एराक़ और फलस्तीन जैसे मुद्दे भी प्रभावित [...]
- लेकिन अगर इस घटना से जुड़े अन्य पहलुओं पर विचार करेंगे तो पाएंगे कि शोएब सिर्फ पाकिस्तान में चल रही राजनीति की ही नहीं एक तरह से खेल में हो रही गुटबाजी और अन्तरराष्ट्रीय राजनीति के बीच फंस गए.... कैसे? अब देखिए पाक ने जैसे ही पाबंदी लगाई वैसे ही इंडियन प्रीमियर लीग ने भी उनसे नाता तोड़ने की मंशा जाहिर कर दी....
- वास्तव में भारत में जितने मुसलमान रहते हैं, उतने इस्लामी सम्मेलन के 25-30 देशों में भी कुल मिलाकर नहीं रहते | फिर भी भारत न तो इस सम्मेलन का सदस्य बनना चाहता है और न ही उसने पर्यवेक्षक बनने के लिए कोई अर्जी लगाई है | सच पूछा जाए तो पंथ-निरपेक्ष भारत अगर इस संगठन का सदस्य बनेगा तो उसकी बड़ी बदनामी होगी | मज़हब के नाम पर राजनीति चलाना अपने आप में घटिया बात है और अन्तरराष्ट्रीय राजनीति चलाना तो घटिया होने के साथ-साथ अव्यावहारिक भी है |
- जन्म 30 दिसम्बर, 1944, इंदौर| सदा प्रथम श्रेणी के छात्र| दर्शन और राजनीतिशास्त्र् मुख्य विषय| अन्तरराष्ट्रीय राजनीति में 1971 में ‘जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय' से पीएच0डी0| विषय ‘अफगानिस्तान में सोवियत-अमेरिकी प्रतिस्पर्धा|' संस्कृत, फारसी और रूसी भाषा का विशेष प्रशिक्षण| अपने अफगानिस्तान सबंधी शोध-कार्य के दौरान न्यूयॉर्क की कोलम्बिया यूनीवर्सिटी, लंदन के स्कूल ऑफ ओरिएन्टल स्टडीज़, मास्को की विज्ञान अकादमी और काबुल विश्वविद्यालय में अध्ययन का अवसर| लगभग अस्सी देशों की यात्राएँ| अनेक देशों के राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और विदेशमंत्रियों से व्यक्तिगत परिचय| 1999 में संयुक्तराष्ट्र संघ में भारतीय प्रतिनिधि के तौर पर तीन व्याख्यान|