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हज़्म meaning in Hindi

pronunciation: [ hejem ]
हज़्म meaning in English

Examples

  1. यदि मोज़ों पर मसह की अवधि समाप्त हो जाए और आप तहारत की हालत में हों , तो राजेह कथन के अनुसार जिसे विद्वानों के एक समूह ने चयन किया है , जिनमें इब्ने हज़्म और शैखुल इस्लाम इब्ने तैमिय्या रहिमहुल्लाह शामिल हैं , आपकी तहारत समाप्त नहीं होगी ; क्योंकि तहारत के टूटने की कोई दलील नहीं है , बल्कि तहारत ( पवित्रता ) सर्वज्ञात वुज़ू तोड़ने वाली चीज़ों से ही समाप्त होती है जैसे हवा खारिज होना।
  2. ये अनशन भ्रष्ताचार के खिलाफ होता तो जरूर सफल होता बाबा खुद तो बिना तैक्स की दौलत इकट्ठी कर इतना बडा साम्राज्य् 6 खडा करने मे लगे हैं और दूसरों पर ऊँगली उठा रहे हैं ऐसे आन्दोलन मे उस व्यक्ति का साथ दिया जाता है जो खुद पाक साफ हो कम से कम मुद्दे पर जिसके लिये वो लड रहा है एक नेपाली बाहर से आ कर 10 - 12 साल मे इतनी दौलत कमा ले बात हज़्म नही होती।
  3. Drug Combo staves off Type 2 Diabetes- - को पढ़ना शुरु किया तो बात मुझे बिल्कुल हज़्म नहीं हो रही थी लेकिन जैसे तैसे पढ़ना जारी रखा तो बहुत सी बातें अपने आप ही स्पष्ट होने लगीं - अर्थात् इस तरह की सिफारिश कर कौन रहा है , इस तरह का अध्ययन कितने लोगों पर किया गया है , यह स्टड़ी करने के लिये फंड कहां से आए और सब से अहम् बात यह कि इस के बारे में मंजे हुये विशेषज्ञों का क्या कहना है ?
  4. जो आदमी कभी एक टिप्पणी न करता हो , उसने दे दनादन चार कर डालीं ? ब्लॉग जगत इसे समझेगा बौखलाना ! आप देखिए और सोचिए कि हमने तो आपकी 3 + 1 चार चार टिप्पणियाँ अपने विरोध में सजाकर रखी हैं लेकिन आपसे हमारी एक टिप्पणी हज़्म न हो सकी , आपने उसे मिटा डाला आख़िर क्यों ? जबकि अपनी पोस्ट में आप वाइफ़ स्वैपिंग , लिव इन रिलेशन और समलैंगिक संबंध आदि समस्याएं गिना रहे थे और हम आपको इनसे मुक्ति का उपाय बता रहे थे।
  5. इमाम अली अलैहिस सलाम ने मुख़्तसर जुमलों में एक तीसरी रविश को इस अहम और मुश्किल मसले के हल के लिये बयान किया है जिस में न तो समाज से कट कर रहना और मुख़्तलिफ़ वसीअ रवाबित जो समाजी ज़िन्दगी का लाज़िमा है उससे किनारा कश होना है और न ही समाज में हज़्म और फ़ना हो जाना और कई कई चेहरे और कई कई ज़बान बदलना है बल्कि दूसरों से राब्ता क़ायम करना , अपने और ख़ुदा के दरमियान राब्ते को मुनज़्ज़म करने की बुनियाद पर हो।
  6. जहाँ तक तिर्मिज़ी और इब्ने हज़्म और मौसिली के उन को ज़ईफ क़रार देने का संबंध है तो हमारे ज्ञान के अनुसार उसका कोई अधार नहीं है , जबकि ज्ञात होना चाहिए कि तिर्मिज़ी रहिमहुल्लाह ने जो कुछ उल्लेख किया है उस में वह माज़ूर हैं , क्योंकि उन्हों ने अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस की हदीस को ज़ईफ तरीक़ों से रिवायत किया है , जबकि अबू दाऊद , नसाई और इब्ने माजा ने उसे दूसरे शुद्ध तरीक़ों से रिवायत किया है , शायद कि तिर्मिज़ी रहिमहुल्लाह को इस का पता नहीं चला।
  7. मुझे पूरा विश्वास सा होने लगा है कि जैसे हमारे आयुर्वेद डाक्टर कहते हैं कि खाने-पीने की वस्तुओ का सेवन अपने शरीर की प्रवृत्ति के अनुसार ही किया जाये - ऐसा है ना कि अकसर हमें कईं खाध्य पदार्थ सूट नहीं करते और हम उन्हें खा कर बीमार सा हो जाते हैं -कोई कोई दाल ऐसी है जो रात में हज़्म नहीं होती हैं लेकिन इस के बारे में मेरे ख्याल में आज का सिस्टम कम ही कुछ कहता है जब कि आयुर्वैदिक प्रणाली में इन सब के बारे में खूब चर्चा होती है।
  8. इब्ने हज़्म कहते हैं : जो भी पैरों में पहना जाता है -जिनका पहना जाइज़ है जो दोनों टखनों से ऊपर तक हों- उन पर मसह करना सुन्नत है , चाहे वे चमड़े या लबूद या लकड़ी या हलफा ( एक घास का नाम है ) के मोज़े हों अथवा सन या ऊन या कपास ( सूती ) या रोआं या बाल -उन पर त्वचा हो या न हो- के जुर्राब हों , या मोज़ों के ऊपर मोज़े या जुर्राबों के ऊपर जुर्राब हों . . . . “ अल-मुहल्ला ” ( 1 / 321 )
  9. हर तरफ़ फैली हुई ये ज़ुल्मतें रौशनी होंगी तेरी कब रहमतें शह्र को अब कर रहे हैं सब सलाम हज़्म कर ली शह्र ने सब ज़िल्लतें कुछ कंदीलें जल रही मरहूमों पर गिन नहीं पाते हैं इतनी मैय्यतें दो मिनट का मौन रखना सीख ले कारगर होती हैं अच्छी सोहबतें मौत का साया धुआं बन कर उड़ा बढ़ गई इक दूसरे से कुर्बतें ये सियासत है संभल कर के चलो हो सके तो सीख लो सब तोहमतें अलविदा पर ख़त्म है ये दास्ताँ कौन रखेगा किसी से चाहतें ( अर्थ: ज़ुल्मतें = अंधेरे, जिल्लतें = अपमान, कंदीलें = मोमबत्ति
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