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सिरताज meaning in Hindi

pronunciation: [ siretaaj ]
सिरताज meaning in English

Examples

  1. मुनिवर , यह काल धूर्तों का सिरताज है , इसे कितना ही तोड़ो पर यह टूटता नहीं , जलाने पर जलता नहीं और दृश्य होने पर भी स्वरूप से नहीं दिखाई देता इसकी धूर्तता की सीमा नहीं है।।
  2. तुम मर गये होते , तो इसी तरह वह भी अब तक किसी के पास चली गयी होती ? मैं जानती हूँ कि मैं मर जाती , तो मेरा सिरताज ' जन्म ' भर मेरे नाम को रोया करता।
  3. शहजादी ने भी वैसी ही शालीनता दिखाते हुए कहा , ऐ मेरे सिरताज , वैसे तो मैं लड़की होने के कारण विवाह में अपने पिता की इच्छा की पाबंद हूँ और वे जिसे मेरा पति बनाते उसे मैं प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार कर लेती।
  4. जनता की उन्मत्तता के कारण मोटर को दस कदम पीछे ही रुक जाना पड़ा - ' देश के सिरताज की जय ! ' , ' सरस्वती के वरद पुत्र की जय ! ' ' राष्ट्र के मुकुट-मणि की जय ! ' के नारों से पहाड़ियाँ गूँज उठीं।
  5. इन टूटी-फूटी बेजोड़ , मगर मतलब से भरी बातों को जो इस मरने वाले के मुंह से अनायास निकल पड़ी है सुनकर निश्चय हो गया कि आपके बड़े भाई और ऐयारों के सिरताज तेज सिंह किसी ऐसी आफत में , जो बहुत जल्द तबाह कर देने की कुदरत रखती है , फंस गए हैं।
  6. फिरोज अहमद खां , अमरनाथ , पवन मिश्र , राम धीरज , रईस अहमद खान , रमेश ंिसह , नवी अहमद , एजाज अहमद , पवन कुमार , मो 0 अख्तर , नईम असरफ , इम्तियाज , सिरताज अहमद , सवी उल्लाह , अमरनाथ , मो 0 नसीम , नरेन्द्र , अरूण यादव , राम सुरेश वर्मा आदि लोग मौजूद रहे।
  7. फिरोज अहमद खां , अमरनाथ , पवन मिश्र , राम धीरज , रईस अहमद खान , रमेश ंिसह , नवी अहमद , एजाज अहमद , पवन कुमार , मो 0 अख्तर , नईम असरफ , इम्तियाज , सिरताज अहमद , सवी उल्लाह , अमरनाथ , मो 0 नसीम , नरेन्द्र , अरूण यादव , राम सुरेश वर्मा आदि लोग मौजूद रहे।
  8. अस् मात् उस की स् तुति में यह गीत स् मर्तव् य है कि - ' आव मेरे झूठन के सिरताज ! छल के रूप कपट की मूरति मिथ् यावाद जहाज ! ' यद्यपि जिस की प्रशंसा में भारतेंदु जी ने यह वाक् य कहा है वह कपटी मित्र नहीं है , वह जिसे मित्र बनाता है उसे तीन लोक और तीन काल में सबसे बड़ा कर दिखाता है , किंतु कपटियों ( राक्षसों ) को उच्छिन् न करके तब कहीं ' क्रोधोऽपि देवस् य नरेण तुल् य : ' का उदाहरण दिखलाता है।
  9. रेशम में लिपटे काँटों को हम गुलाब कहते रहे - नीव खोदी ही नहीं गयी मितरां मकान बनते रहे- जो बन न सका जुगुनू भी , रात का उसे माहताब कहते रहे - जो कर गया टुकड़ों में वतन सिरताज कहते रहे - शुमार कर दिया आतंकवादियों में जिनको वो इनकलाब कहते रहे - झूल गए फांसी पर मर्द हंसते -हंसते ना-मर्द वाह- वाह कहते रहे - सारा जीवन हिंसा में ही गुजर गया वो अहिंसा का पाठ करते रहे- सोचा नहीं अवाम की दर्दो आवाज क्या है सौदाई कारोबार करते रहे- - उदय वीर सिंह
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