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शर्वरी meaning in Hindi

pronunciation: [ sherveri ]
शर्वरी meaning in English

Examples

  1. कार्यक्रम के पहले चरण में सवाईमाधोपुर से आये राजस्थान के प्रतिबद्ध कवि विनोद पदरज ने बेटी के हाथ की रोटी , शिशिर की शर्वरी , दादी माँ , उम्र आदि शीर्षक कविताओं का प्रभावपूर्ण पाठ किया।
  2. अब मुझसे रहा नहीं गया और मैं शर्वरी को लिटा के उसके पैर अलग करके बीच में घुटने टेक के बैठा और उसकी चूत पे शलाका की लार से तर मेरा लंड लगाके अन्दर टोपा घुसाया।
  3. दशकों पहले महाकवि सूर्यकांत त्रिापाठी निराला ने लिखा था- ' शिशिर की शर्वरी, हिंस्र पशुओं से भरी' तब उनको भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि आने वाले दिनों में शिशिर गरीबों के लिए मौत का मौसम साबित होगा।
  4. शर्वरी चौंक कर मुझसे अलग होने की कोशिश करने लगी , लेकिन मैंने एक हाथ से उसकी कमर कस के पकड़ रखी और दूसरे हाथ से पास आई शलाका को खींच के उसके भी कमर में हाथ डाल के उसे भी अपने साथ सटा लिया।
  5. आती जब शर्वरी , पॉछती नहीं विश्व के सिर से केवल तपन-चिन्ह, केवल लांछन सफेद किरणॉ के; श्रमहारी, निर्मोघ, शांतिमय अपने तिमिरांचल में कोलाहल, कर्कश निनाद को भी समेट लेती है तिमिर शांति का व्यूह, तिमिर अंतर्मन की आभा है, दिन में अंतरस्थ भावॉ के बीज बिखर जाते हैं;
  6. शर्वरी नामक संवत होने के कारण इस वर्ष पृथ्वी पर वर्षा के योग अधिक हैं , अनाज आदि का लाभ रहेगा , भूमि , भवन , वाहन का सुख विशिष्ट लोग भोगेंगे , चंद्र ( राजा ) की शनि ( मंत्री ) के सामने कुछ भी नहीं चल पाएगी।
  7. “ चूमो न उसे ! ” शर्वरी ने हंसते हुए कहा तो शलाका ने उसे पकड़ कर बड़ी सावधानी से उसके टोपे पर हल्के से होंठ रखकर चूमा और फ़िर धीरे धीरे अच्छी तरह से चूमने लगी और फ़िर पहले टोपा और बाद में पूरा मुँह में लेकर चूसने लगी।
  8. विनोद पदरज ने कचनार का पीत पात , बेटी के हाथ की रोटी , शिशिर की शर्वरी , दादी माँ , उम्र आदि कविताएँ सुनाईं , जबकि अनंत भटनागर ने झुकी मुट्ठी , सेज का मायावी संसार , मुझे फांसी दो , मोबाइल पर प्रेम आदि कविताओं का पाठ किया।
  9. उनकी एक सहेली उर्मिला नेने की शादि उसकी मर्जी के खिलाफ़ हो रही थी तो शादी के एक रात पहले सीमांतपूजन की रात शलाका और शर्वरी ने मुझे शादी के हॉल में कैसे छुपा कर रखा और उर्मिला नेने के साथ मैंने उसकी शादी के एक रात पहले ही सुहागरात मनाई।
  10. यदि शिखा संग देती रहेगी सदा प्रण हमारा तमस व्याप्त होगा नहीं हो विरह की अगनी से प्रकाशित धरा मिलन हो न हो तम घिरेगा नहीं , बाँध दूंगा किरण -पाश में मैं तमस क्लान्त हो कर चली जायेगी शर्वरी मांग लूँगा रवि से मैं उसकी विभा पर तमाछान्न होने न दूंगा महि , यदि …
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