लेउ meaning in Hindi
pronunciation: [ leu ]
Examples
- आभासी दुनिया के भीतर स्थित दृश्यों , अगर वे उदात्त रहते हैं, तथापि, वर्षों के वजन के आरोप लगाते हैं, लेकिन लेउ अग्रणी और अभिनव पहलू अपनी ताकत के बल कोई भी खो देता है.
- > मां चूल्हा है , बर्तन है लेउ है घर है शाम की बतकही है नींद लाती कहानी है,लोरी है मां मिटटी है,पेड-पहाड है कोठार भर अन्न है चिलकती धूप पर ठंडी बयार है मुसलाधार बारिश है।
- अब न्यूज़ीलैंड कोई बिहार तो है नहीं कि ऊँच-नीच समझाकर या चुपचाप जेब में माल खिसका कर कह दिया जाता , ” चुप्पे धै लेउ , अपने बाली-बच्चन के ख़ातिर इह जाड़े के मौसम मा सूटर ख़रीद लिहे।
- आ एह के देखला के बाद हम अतने कहब कि अयिसन ( संकीर्ण सोच , नकारात्मक विचार , और क्षुद्र मानसिकता ) सोच वाला लोग भले जबरदस्ती भावुक लगा लेउ लेकिन उ भा ओइसन सोच वाला व्यक्ति हमेशा बाउक रही।
- मां चूल् हा है , बर्तन है लेउ है घर है शाम की बतकही है नींद लाती कहानी है , लोरी है मां मिटटी है , पेड-पहाड है कोठार भर अन् न है चिलकती धूप पर ठंडी बयार है मुसलाधार बारिश है।
- छीतू चौबे , इस प्रकार अपना मानसहित नाम सुनकर और भी द्रवित हुए तथा तत्क्षण भीतर जाकर दोनों हाथ जोड़कर तथा साष्टांग प्रणाम कर अर्ज की, “”जैराज, मोई सरन में लेउ, मैं मन में भौत कुटिलता लैके यहाँ आयो हो सो सब आपके दरसनन ते भाजि गई।
- छीतू चौबे , इस प्रकार अपना मानसहित नाम सुनकर और भी द्रवित हुए तथा तत्क्षण भीतर जाकर दोनों हाथ जोड़कर तथा साष्टांग प्रणाम कर अर्ज की, “”जैराज, मोई सरन में लेउ, मैं मन में भौत कुटिलता लैके यहाँ आयो हो सो सब आपके दरसनन ते भाजि गई।
- तौ लेउ आनन्द- अब जिउ मां धरु धीर , राम की प्यारी अवधी बोली बारह जिला अवध के ब्वालें और अगरा के आठ रीवां, विंध्य, अमरकंटक, से छत्तिसगढ़ लौं पाठ बुंन्देलिन अवधी की चेली, कनवज वाली बांदी ब्रजभाषा सबकी मुंहचुमनी, भोजपुरी उदमादी तुइ पर मस्त गंवार गंवारिन, हंसिहंसि करैं चबोली।
- जब बारी नरेश सक्सेना जी की आई तो उन्होंने मेरी अवधी कविता ‘ जमीन हमरी लै लेउ ' की आत्मा को टटोलते हुए कहा , - “ इस कविता में ऐसा क्या है जो हमें बरबस अपनी ओर खींचता है , ‘ बुझे दिया कै बाती लेउ / पुरिखन कै थाती लेउ / फारि कै हमरी छाती लेउ।
- जब बारी नरेश सक्सेना जी की आई तो उन्होंने मेरी अवधी कविता ‘ जमीन हमरी लै लेउ ' की आत्मा को टटोलते हुए कहा , - “ इस कविता में ऐसा क्या है जो हमें बरबस अपनी ओर खींचता है , ‘ बुझे दिया कै बाती लेउ / पुरिखन कै थाती लेउ / फारि कै हमरी छाती लेउ।