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रुख़्सत meaning in Hindi

pronunciation: [ rukheset ]
रुख़्सत meaning in English

Examples

  1. लेकिन शायद आप लोगों में वो आग कभी थी ही नहीं आप तो सिर्फ़ पेट और प्रजनन के लिए पैदा हुए हो और ऐसे ही इस दुनिया से रुख़्सत हो जाओगे … हमारा देश बड़ी विषमताओं का देश है यहाँ जिसको पत्रकार बनना चाहिए वो नौकरी कर रहा होता है और जिसको नौकरी करनी चाहिए वो पत्रकारिता कर रहा है … .
  2. सावन तेरी ज़ुल्फ़ों से घटा माँग के लाया हाय , माँग के लाया बिजली ने चुराई है तड़प तेरी नज़र से अरे, तड़प तेरी नज़र से तसवीर बनाता हूँ तेरी मैं दिल में बिठा कर तुझे रुख़्सत न करूँगा हाय, रुख़्सत न करूँगा मुश्किल है तेरा लौट के जाना मेरे घर से अरे जाना मेरे घर से तसवीर बनाता हूँ तेरी और अब हबीब वली मोहम्म्द साहब की आवाज में....
  3. सावन तेरी ज़ुल्फ़ों से घटा माँग के लाया हाय , माँग के लाया बिजली ने चुराई है तड़प तेरी नज़र से अरे, तड़प तेरी नज़र से तसवीर बनाता हूँ तेरी मैं दिल में बिठा कर तुझे रुख़्सत न करूँगा हाय, रुख़्सत न करूँगा मुश्किल है तेरा लौट के जाना मेरे घर से अरे जाना मेरे घर से तसवीर बनाता हूँ तेरी और अब हबीब वली मोहम्म्द साहब की आवाज में....
  4. डॉ . सागर आज़मी ने अपनी बात इस तरह से कही- अब तो हमारे घर का ये माहौल हो गया है रिश्तों का अहसास भी लब्ज़ों का खेल हो गया है वो फूल दे के हाथ में, रुख़्सत हो गया लेकिन दबाने से वो काँटे चुभो गया तमाम उम्र वो मुझको जागने की सजा दे के सो गया ये और बात है कि न बादल बरस सका लेकिन तमाम शहर की पलकें भिगो गया
  5. कुछ तुझको खबर है हम क्या क्या , ये शोरिशे-दौरां भूल गए वो ज़ुल्फ़े-परीशां भूल गये, वो दीदा-ए-गिरियां भूल गए ऐ शौक़े-नज़ारा क्या कहिये, नज़रों मे कोई सूरत ही नहीं ऐ ज़ौक़े-तसव्वुर क्या कीजै, हम सूरते-जानां भूल गए अब गुल से नज़र मिलती ही नहीं,अब दिल की कली खिलती ही नहीं ऐ फ़स्ले-बहारां रुख़्सत हो,हम लुत्फ़े-बहारां भूल गए सब का तो मुदावा कर डाला,अपना ही मुदावा कर न सके सब के तो गरेबां सी डाले,अपना ही गरेबां भूल गए ये अपनी वफ़ा का आलम है, अब उनकी जफ़ा को क्या कहिये इक नश्तरे-ज़हर-आगीं रखकर, नज़दीके-रगे-जां भूल गए
  6. यह ऐहतेमाल रसूले अकरम ( स ) की सीरत के बर खिलाफ़ है , जो हज़रात तारीख़े रसूल ( स ) का मुतालआ रखते हैं वह जानते हैं कि आँ हज़रत ( स ) ने अपनी 23 साल की ज़िन्दगी में इस्लाम की नश्र व इशाअत और मुसलमानों की इज़्ज़त व सर बुलंदी के लिये बहुत कोशिशें की हैं , आप ने अपने मरज़ुल मौत में भी इस्लामी सहहद की हिफ़ाज़त के लिये एक लश्कर तैयार किया और ख़ुद आप बीमारी के आलम में इस लश्कर को रुख़्सत करने के लिये मदीने से बाहर तशरीफ़ लाये।
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