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बाछी meaning in Hindi

pronunciation: [ baachhi ]
बाछी meaning in English

Examples

  1. बुलबुल चिरई आ गयीली का ? आरे हमर बाछी ....... आ गयीनी रउआ ......... आवाज़ इतनी धीमी थी कि शक्क हुआ अपने आप पर कि ये मैं कैसे सुन सकती हूं ? कई बार सोचा कान बज रहे हैं मेरे इसी उमर में ..........
  2. ओ मधेश की ओर जाने वाले ! यदि तुम कभी लखनऊ शहर जाओ , तो वहां के गारद में रहता है जो भला सा आदमी , उससे कहना - तुम्हारा बेटा दौड़ना सीख गया है और काली बाछी को तीसरा बाछा हुआ है … .
  3. जैतपुर गाँव में एक किसान ने उसे अपनी एक बाछी दे दी थी और कहा था , ' यह बाछी गाय बन कर तुम्हें वर्षों दूध पिलाए और तुम स्वस्थ रह कर सालों-साल अपने नाच-गाने के फन से हम किसानों के दुखदर्द को कम करते रहो।
  4. जैतपुर गाँव में एक किसान ने उसे अपनी एक बाछी दे दी थी और कहा था , ' यह बाछी गाय बन कर तुम्हें वर्षों दूध पिलाए और तुम स्वस्थ रह कर सालों-साल अपने नाच-गाने के फन से हम किसानों के दुखदर्द को कम करते रहो।
  5. पति से रुठीं तो , सास- ननद से बाता-बाती हुई तो, तीज-त्यौहार हो तो, भाई को राखी बांधनी या बजरी खिलानी हो तो, मां बीमार है तो, पिता उदास हैं तो, गाय ने बाछी दी तो, खुद मां बनना हो तो.....बात-बात में मायका, जैसे मायका हो कुन्ती का अक्षयपात्र।
  6. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ- द्वारा गोहत्या के विरोध मंे चलाये जा रहे अभियान का उद्वेश्य इस प्रश्न पर जन जागरण करना , सम्पूर्ण देश के वयस्क व्यक्तियों के हस्ताक्षरों के रूप में जनमत को अभिव्यक्त करना और दुधारू या बूढ़ी या बाछी गोहत्या पर देशव्यापी प्रतिबंध के लिए सरकार से आग्रह करना है।
  7. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ- द्वारा गोहत्या के विरोध मंे चलाये जा रहे अभियान का उद्वेश्य इस प्रश्न पर जन जागरण करना , सम्पूर्ण देश के वयस्क व्यक्तियों के हस्ताक्षरों के रूप में जनमत को अभिव्यक्त करना और दुधारू या बूढ़ी या बाछी गोहत्या पर देशव्यापी प्रतिबंध के लिए सरकार से आग्रह करना है।
  8. लंगोटा नंद ने कहा - श्री बाबा शठाधीश जी महाराज दूसरों को मोक्ष का मार्ग दिखाने से पहले खुद मदिरा-पान से मोक्ष पा लें ! कल्याण हो ! लंगोटा नंद से श्री श्री बाबा शठाधीश जी ने कहा - लंगोटानंद महाराजआप भी संतों को गलत सलाह दे रहे हैं गाछी, बाछी और दासी ।
  9. पर तभी एक वृद्ध हाथ मे मुझे छुआ . .... जैसे आत्मा तृप्त हो गयी ........... मेरी आंखे और उनकी आंखे मिलीं और ........ काहे एज़वा बईठल् बानी बबुनी ? काहे ? देवंतिया के माई रउआ हमरा पहचान गयीनी ? कइसे ? एतना दिन बाद ? ए बाबू भला रउआ के ना पहचानेम ? ए हमर बाछी देखी ना केतना बढियां लागता .....
  10. मृत्युभोज के लिए खाने पर बैठी पंगत के आगे खेदना को खड़ा किया गया , चारों तरफ से सबकी निगाहें उसकी देह बींधती जा रही थीं , लग रहा था जैसे कोई मेमना फँस गया हो भेड़ियों के गिरोह में , पंडित जी कह रहे थे .... ' अरे खेदना , एक ठो खाट , रजाई , गद्दा , चद्दर , धोती , साड़ी , जाकिट , ५ ठो बर्तन , चाउर-दाल , कुछ दछिना और बाछी दान में नहीं देते तो तुम्हारा बाप , यहीं भटकते रह जाता ... उसका मुक्ति ज़रूरी था ना ...
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