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बाछा meaning in Hindi

pronunciation: [ baachhaa ]
बाछा meaning in English

Examples

  1. ओ मधेश की ओर जाने वाले ! यदि तुम कभी लखनऊ शहर जाओ , तो वहां के गारद में रहता है जो भला सा आदमी , उससे कहना - तुम्हारा बेटा दौड़ना सीख गया है और काली बाछी को तीसरा बाछा हुआ है … .
  2. यद्यपि इस अनुष्ठान के परिचालन की जिम्मेदारी बलेङछारप ' पर है , फिर भी सभी क्षेत्रों में छार्थे या मुखिया राय - परामर्श देते रहते हैं और छार्थे की गैर हाजिरी में ‘ जिरछङ ' के काम देखने के लिए एक रिछ ' बाछा या युवा मुखिया नियुक्त करते हैं।
  3. यद्यपि इस अनुष्ठान के परिचालन की जिम्मेदारी बलेङछारप ' पर है , फिर भी सभी क्षेत्रों में छार्थे या मुखिया राय - परामर्श देते रहते हैं और छार्थे की गैर हाजिरी में ‘ जिरछङ ' के काम देखने के लिए एक रिछ ' बाछा या युवा मुखिया नियुक्त करते हैं।
  4. तब अमृतसर में उनकी बिरादरी वाले तंग चक्करदार गलियों में हर एक लड्ढी वाले के लिये ठहरकर सब्र का समुद्र उमड़ाकर ‘बचो खालसाजी ! ' ‘हटो माईजी !' ‘ठहरना भाई !' ‘आने दो लाला जी !' ‘हटो बाछा !' कहते हुये सफेद फेंटों, खच्चरों और बत्तखों, गन्ने और खोमचे और भारे वालों के जंगल में राह खेते हैं।
  5. न्यास के स्थायी आय के स्रोत हैं- मंदिर में चढ़ावा , मुंडन न्योछावर , विवाह न्योछावर , चढ़ावा में दिए गए पाड़ा एवं बाछा के मूल्य , मवेशी हाट , गुदरी हाट ( मंदिर परिसर में ) , जोत की जमीन के ठेका से , फलकर एवं जलकर , धर्मशाला का भाड़ा , दूकान का भाड़ा , अस्थायी दूकान भाड़ा , वार्षिक शिवरात्रि मेला एवं विवि ध.
  6. अनरुध सूर्य के साथ उठता है गाँव की नदी की ओर भागता है अनरुध नदी नहीं उलान्घता मानो तीनों लोक हैं उसके लिए उस की पर्णकुटी और उसकी पत्नी और उसका बच्चा और खूंटे से बंधा हुआ बाछा अनरुध सारी दुनिया का चक्कर नहीं लगाएगा उसका पूरा संसार है झोपड़ी से नदी तक पर्णकुटी की परिक्रमा करेगा वह नृत्य के छंद में अनरुध मानो तीनो लोक घूम लेगा।
  7. अनरुध सूर्य के साथ उठता है गाँव की नदी की ओर भागता है अनरुध नदी नहीं उलान्घता मानो तीनों लोक हैं उसके लिए उस की पर्णकुटी और उसकी पत्नी और उसका बच्चा और खूंटे से बंधा हुआ बाछा अनरुध सारी दुनिया का चक्कर नहीं लगाएगा उसका पूरा संसार है झोपड़ी से नदी तक पर्णकुटी की परिक्रमा करेगा वह नृत्य के छंद में अनरुध मानो तीनो लोक घूम लेगा।
  8. संघर्ष के इन दिनों में उसे ब्रह्मपुर की बहुत याद आती . ... बचपन के मित्र , गुल्ली-डण्डा , गजानन बाबू की गाय का बाछा , ददन भैया की बकरी के छौनों की उछल-कूद , बड़ा तालाब , गन्ने के खेत , आम के बाग , कच्चे अमरूद , झरबिरिया के खट्टे बेर , तेज आँधी में हवा की कुपित दहाड़ , तपी हुयी धरती पर पहली बौछार का स्वागत करती ब्रह्मपुर की माटी की सुगन्ध ..... और भी न जाने क्या-क्या।
  9. आज काल्हे पपेर्वा में पढे कि राजधानी का एगो बहुत बडका हास्पीटल में daktarwaa सब एगो छोटका बाछा का किडनी निकाल दिहिस , अरे नहीं भैया कौउनो बीमारी में नहीं बल्कि गलती से अब ई त बताने का जरूरत तो नहीं है कि ई डाक्टर सब आज कल ई किडनी , आँख , लिवर , निकाले और पेट में तोलिया , रुमाल , कैंची , चादर सब छोड के अलावा और कन्या भ्रूण हत्या जैसन काम भी खूब जोर शोर से कर रहा ।
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