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प्लाविका meaning in Hindi

pronunciation: [ pelaavikaa ]
प्लाविका meaning in English

Examples

  1. प्लाविका को रक्त से पृथक करने के लिए एक परखनली मे ताजा रक्त लेकर उसे सेंट्रीफ्यूज़ ( अपकेंद्रिक) में तब तक घुमाना चाहिए जब तक रक्त कोशिकायें नली के तल मे बैठ न जायें, इसके बाद ऊपर बचे प्लाविका को उड़ेल कर अलग या तैयार कर लें।
  2. प्लाविका को रक्त से पृथक करने के लिए एक परखनली मे ताजा रक्त लेकर उसे सेंट्रीफ्यूज़ ( अपकेंद्रिक) में तब तक घुमाना चाहिए जब तक रक्त कोशिकायें नली के तल मे बैठ न जायें, इसके बाद ऊपर बचे प्लाविका को उड़ेल कर अलग या तैयार कर लें।
  3. प्लाविका को रक्त से पृथक करने के लिए एक परखनली मे ताजा रक्त लेकर उसे सेंट्रीफ्यूज़ ( अपकेंद्रिक) में तब तक घुमाना चाहिए जब तक रक्त कोशिकायें नली के तल मे बैठ न जायें, इसके बाद ऊपर बचे प्लाविका को उड़ेल कर अलग या तैयार कर लें।
  4. प्लाविका को रक्त से पृथक करने के लिए एक परखनली मे ताजा रक्त लेकर उसे सेंट्रीफ्यूज़ ( अपकेंद्रिक) में तब तक घुमाना चाहिए जब तक रक्त कोशिकायें नली के तल मे बैठ न जायें, इसके बाद ऊपर बचे प्लाविका को उड़ेल कर अलग या तैयार कर लें।
  5. बी कोशिका ( B cell) सक्रियण के पश्चात् एक प्रतिजन (एंटीजन) के साथ कोशिका से जुड़े प्रतिपिंड (एंटीबॉडी) के अणु के जुड़ने की प्रक्रिया होती है, जिसके कारण कोशिका विभाजित हो जाती है और एक प्रतिपिंड (एंटीबॉडी) बनाने वाली कोशिका में परिवर्तित हो जाती है जिसे प्लाविका कोशिका कहते हैं.
  6. या तो घुलनशील एंटीबॉडी में स्रावित होने वाली प्रतिपिंड ( एंटीबॉडी) उत्पादक कोशिकाओं, जिन्हें प्लाविका कोशिकाएं भी कहते हैं, में या शरीर में लम्बे समय तक बनी रहने वाली स्मृति कोशिकाओं में अंतर करती हैं, ताकि प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिजन(एंटीजन) को याद रख सके तथा इनके पुनः प्रकट होने पर त्वरित प्रतिक्रिया कर सके.
  7. सक्रिय बी कोशिकाएं ( B cells) या तो घुलनशील एंटीबॉडी में स्रावित होने वाली प्रतिपिंड (एंटीबॉडी) उत्पादक कोशिकाओं, जिन्हें प्लाविका कोशिकाएं भी कहते हैं, में या शरीर में लम्बे समय तक बनी रहने वाली स्मृति कोशिकाओं में अंतर करती हैं, ताकि प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिजन(एंटीजन) को याद रख सके तथा इनके पुनः प्रकट होने पर त्वरित प्रतिक्रिया कर सके.
  8. शरीर के भार में कमी , अम्ल और क्षार के संतुलन में विक्षोभ, रक्त में प्रोटोनविहीन नाइट्रोजन की वृद्धि, क्लोराइड की प्लाविका प्रोटीनसांद्रण में वृद्धि, शरीर के ताप में वृद्धि, नाड़ी में वृद्धि और हृदय निपज (output) में कमी, प्यास लगना, त्वचीय और उपत्वचीय जल्ह्रास के कारण त्वचा का ढीलापन, शुष्कता और उसमें झुर्रियाँ पड़ना तथा परिक्लांति और पात।
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