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प्रेम-प्रदर्शन meaning in Hindi

pronunciation: [ perem-perdershen ]
प्रेम-प्रदर्शन meaning in English

Examples

  1. जानती है उनका स्वभाव , पति होने की पूरी मर्यादा निभाते हैं , बहुत सभ्य-संयत हैं प्रेम-प्रदर्शन में भी . हर काम समय से , उचित ढंग से करने में विश्वा स.द ुनिया में कुछ होता रहे विचलित नहीं होते . द्रौपदी की इच्छा का मान रखते हैं .
  2. कि आज के वक्त मे हम प्रेम-प्रदर्शन के लिये कपोत-संदेश का नही वरन् वोडाफ़ोन-एयर्टेल आदि की ' खास ' ( उस विशिष्ट नंबर के लिये एसाइन की हुई ) रिंगटोन बजने या डेडीकेटेड ' संक्षिप्त-संदेश-सेवा ' के भरोसे रहते हैं ( रात्रिकालीन कन्सेशनल काल सेवा का भला हो ) ..
  3. वैसे अच्छा ही हुआ बुढौती का प्रेम-प्रदर्शन और उससे होने वाली शर् म . .. रुचिता के शब्दों में कहूं तो ... “ हाय राम ! कुछ तो आगे पीछे की सोचा करें आप ... ” . ............................... ............................... .............. मुस्कुरा रहा हूँ . उसके हाथों में हाथ डाल के मूवी देखना मेरी ज़िन्दगी को ईश्वर द्वारा दिए कुछ अच्छे वरदानों में से एक है . ...
  4. मुझे भी ना पता नही कैसे कैसे असमय विचार आते हैं , याद आ रहा है अगर किसी जीव को अनजाने पैर लग जाता था तो हमारे गाँव मे छू कर माफी माँग ली जाती थी, चलिए पति-पत्नी अलग मामला रहा और माना आप हमें इतना अपना मान रहे हैं की हमारा घर भी अपना लग रहा है अहोभाग्य अतिथिदेव-देवी परन्तु आखिर इस प्रेम-प्रदर्शन की सीमा रेखा क्या है?
  5. 3 . आपने कई जगह पढ़ा होगा की लाल गुलाब प्रेम प्रदर्शन का सबसे बेहतर जरिया है , मेरे ख्याल में आप कभी भी गुलाब लेके लड़कियों को propose मत कीजिये , आपको “ C ” Grade का आवारा ( C grade इस लिए क्योंकि A और B तो ऐसे भी समझती है ) समझेगी ! Normal प्रेम-प्रदर्शन से तो शायद पट भी जाये , आपके इस हरकत से तो Never ......
  6. ख़ाब- सपना , शबाब- जवानी , आब- आंसू , महबूब परश्तिश- प्रेमिका की इबादत , शिर्क-इ-इलाही- ईश्वर की साथ इबादत में किसी और को शरीक करना , अजाब-दंड , इताब- गुस्सा , क्रोध , नकाब- पर्दा , बरज़ख- मौत और क़यामत की बिच की मुद्दत , ईश्वर का गुस्सा ( कुरान में प्रयुक्त वो शब्द जो प्रायः उनलोगों से सम्बद्ध है जो ईश्वर के साथ उसकी इबादत में किसी कौर को भी शरीक करते हैं ) , इजहार-इ-मोहब्बत- प्रेम-प्रदर्शन , माहताब-चाँद !!
  7. ' प्रीतम को पतियां लिखूं, जो कहुं होय विदेस/ तन में मन में नैन में, वाको का संदेस।' वाले हमारे भारत देश में युवा-युवतियों का यूं सार्वजनिक और खुले रूप में प्रेम-प्रदर्शन के रूप में मनाए जाने वाला यह त्योहार परंपरागतगत रुचि और रूढ़ियों से टकराया भी है और जगह जगह आए दिन ही इसके खिलाफ प्रदर्शन और भर्तस्ना भी हुई हैं, परन्तु हजार अवरोधों के बाद भी अब यह दिन भारत में भी बड़े जोर-शोर और उत्साह से मनाया जाने लगा है और युवा वर्ग में काफी प्रचलित भी हो गया है।
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