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पुकारू meaning in Hindi

pronunciation: [ pukaaru ]
पुकारू meaning in English

Examples

  1. कार्यक्रम के प्रारंभ में गुना से आये शिक्षक राजेश पाठक ने मां सरस्वति की वंदना मैं भूल जाउं मैया तुम ना भुलना , प्रेम से पुकारू जब भी दौड़ी चली आना की पंक्तियों का सस्वर गायन किया।
  2. हां अपनी चारो बच्चियों को अपने मनोनुकूल नाम देकर स् वयं तो संतुष् ट हुए , पर उनके द्वारा किया गया बच्चियों का नामकरण सर्टिफिकेट्स तक ही सीमित रहा , उन् हें सबलोग पुकारू नाम से ही जानते रहें।
  3. इसलिये जब ‘ कब तक पुकारू ¡ ' पर टीवी धारावाहिक बनाने की बात आई तो कृति के साथ एक माध्यम में अन्याय न हो इसी वजह को ध्यान में रखते हुए अशोक शास्त्री ने स्वयं पटकथा लिखने की ठानी।
  4. खामोश और संजीदा दिखते वैद ने अपने मन को इस ' इन्द्राज ' ( डायरिओं को दिया उनका पुकारू नाम ) से जितनी ईमानदारी से बांटा है , उससे वह पहले से कहीं ज्यादा वेध्य ही नहीं , बोध्य भी हो चले हैं।
  5. दो सीरियल ने मुझे खासा प्रभावित किया था एक था “उडान ”सर्फ़ वाली कविता चौधरी का . दूसरा “कब तक पुकारू ”जिसमे शायद हबीब तंवर ने खुद अभिनय किया था ….सबसे बड़ी बात एक प्रोग्राम था जिससे हम बड़े बोर होते थे वो था क्रषि दर्शन …
  6. मित्र-सम्बन्धी लोग फोटो की , शिशु भोजन की , माँ शांति की , परिवार उत्सव की | मेरी छोटी बहन ने शिशु के लिए पुकारू नाम तय कर लिया गया था ; “ आदि ; जो मेरे और पत्नी ले नामों ले प्रथमाक्षर ऐ-दि का परवर्तित हिंदी रूप है |
  7. सोचता हूँ , तुम्हें पुकारू आकाश कभी लेकिन देखता हूँ तुम्हारी आँखों में सितारों से कहीं ज्यादा आँसू हैं / दामन में इतनी सिलवटें कि दामिनी गुम हो जाये कहीं अपनी चमक खो कर तुम आकाश तो नही हो सकती जो इतराता है अपने मुट्ठी भर सितारों पर या चाँद के एक टुकड़े पर
  8. आज इन्कार किया है या कल इन्कार किया था ? रात के जगमगाते हुए शहर में मेरी परछाइयां खो गयी है कहीं गैर है आस्मां अजनबी है जमीं मैं पुकारू किसे चल के जाउं कहाँ रात के जगमगाते हुए ‘ शहर में खो गयी मेरी परछाइयां ! रफ़्फ़न ने जन्नत की तरफ देखा ।
  9. माँ तो बस माँ होती है पर साथ माँ का मिलता है उसको जिसकी किस्मत अच्छी होती है मन से मन की बांधती डोर पुकारू माँ को चारो ओर न पाकर साथ में माँ को बेचैनी सी होती है माँ तो बस माँ होती है साथ नहीं फिर भी एहसास है माँ का याद नहीं …
  10. दोगे दर्शन कब मोरे श्याम प्यासी अखिया कब से नाथ कब से तोहे मैं पुकारू कब से तके नयन राह तुम्हारी विनती करूं मैं आजा मेरे प्यारे आजा अपने दरस दिखा दे मुरली की वो प्यारी तान सुना दे मोरो जैसा जो किया नृत्य था तूने आज श्याम उसकी तू इक झलक दिखा दे कब से श्याम श्याम कह में पुकारू अब तो आजा मेरे श्याम मेरे श्याम . .
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